Video : 400 गैंगसाॅ में से मात्र 10-15 में हलचल

बिल्ड अप इण्डिया...
- सरकार मदद करे तो बने बात
- साल का 500-700 करोड़ का टर्नओवर

By: Rakesh Gandhi

Updated: 24 May 2020, 08:47 AM IST

राकेश गांधी
राजसमंद. जिले में मार्बल गैंगसा कब शुरू होंगे, अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। यहां स्थापित करीब 350 से 400 गैंगसा में से मात्र 10 से 15 में अभी हलचल शुरू हुई है, जहां पुराना कार्य निपटाया जा रहा है। शेष में अभी सारी मशीनें ठप हैं। व्यवसाइयों का मानना है कि बिना सरकार के हस्तक्षेप या कोई आर्थिक पैकेज के इन इकाइयों का फिर से खड़े हो पाना कठिन है। इन 400 गैंगसा का टर्नओवर मिला लें तो साल में कुल 500 से 700 करोड़ व्यापार हो जाता हैं।
उल्लेेखनीय है लॉकडाउन से पूर्व इन 400 गैंगसा में करीब छह हजार लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तरीके से रोजगार मिला हुआ था। गैंगसा पर काम करने के लिए कुशल कारीगरों की जरूरत होती है, अन्यथा नुकसान की पूरी गुंजाइश रहती है। कई गैंगसा पर काम करने वाले कुछ कुशल कारीगर दूसरे राज्यों के भी हैं, जो लॉकडाउन के कुछ समय बाद ही अपने गृहराज्यों में चले गए। ऐसे में उनकी वापसी कब होगी, कुछ भी कह पाना संभव नहीं है। जो स्थानीय कुशल कारीगर हैं, वे भी अभी कोरोना वायरस के कारण डरे-सहमे हैं और काम पर नहीं लौटना चाहते। दूसरा पहलू ये भी है कि मार्बल की मांग मुख्यत: महाराष्ट्र व गुजरात की मार्बल मंडियों से रहती है, जहां अभी सबकुछ ठप पड़ा है। ऐसेे में गैंगसा शुरू करके भी व्यवसायी करेंगे क्या? इसके अलावा बिजली के बिल का भुगतान, किस्तों को चुकाने का बोझ जैसे कई आर्थिक पहलू भी व्यवसाय में आड़े आ रहे हैं।

पिछले काफी समय से मंदी की चपेट में
यहां ये जानना भी जरूरी है कि मार्बल व्यवसाय पिछले कुछ वर्षों से वैसे भी मंदी की चपेट में है। हालात तो कुछ व्यापारियों ने ऐसे बताए कि उनकी गैैंगसा में पिछले कुछ समय एक शिफ्ट में ही काम चलाया जा रहा है। गुजरात में निर्मित टाइल्सों के कारण व मार्बल की खानें गहरी हो जाने से लागत बढऩे के कारण भी इसका असर व्यवसाय पर पड़ा है।

स्थानीय कारीगरों से मिल सकती है राहत
एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि शर्मा ने बताया कि कुशल कागीगरों के बिना गैंगसा चलाना काफी मुश्किल है, पर यदि हम स्थानीय कारीगरों को लें और तीन माह में उन्हें अच्छे से प्रशिक्षित किया जाए, तो भविष्य में काफी राहत मिल सकती है।

मार्बल व्यवसाय को ऑक्जीजन देने के लिए सरकारें पहल करें
अभी न तो पूरी तरह मार्बल की खानें शुरू हो पाई है और न ही बाजार से कोई डिमांड आ रही है। दक्षिण की मुख्य मार्बल मंडियां बंद पड़ी है। कारीगर अपने घरों से लौटे नहीं है। केन्द्र सरकार ने भी हाल ही में जो राहत के पिटारे खोले हैं, उनके मार्बल व्यवसाय को कोई फायदा होने वाला नहीं दिख रहा। कुछ मिलाकर व्यवसाय फिलहाल शुरू करने के हालात नहीं दिख रहे। अभी कुछ वक्त लगेगा। हां, यदि सरकार टेक्सटाइल व्यवसाय को दी गई टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन फंड (टफ) जैसी कोई योजना मार्बल व्यवसाय के लिए लाए तो कुछ राहत मिल सकती है। इस व्यवसाय को ऑक्सीजन देने के लिए राज्य व केन्द्र सरकार को पैकेज तो जारी करने ही चाहिए। सरकार को जीएसटी कम करने पर भी विचार करना चाहिए।
- रवि शर्मा, अध्यक्ष- मार्बल गैंगसा एसोसिएशन, राजसमंद

Rakesh Gandhi Editorial Incharge
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