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प्रदेश का अनोखा दफ्तर, 11 साल पहले खुला आज तक एक साथ नहीं बैठे कर्मचारी..पढ़े पूरा मामला

locationराजसमंदPublished: Feb 07, 2024 11:58:28 am

Submitted by:

himanshu dhawal

राजसमंद. सरकार की ओर से मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन पदों के रिक्त होने के कारण आमजन को इसका समुचित लाभ नहीं मिल रहा है। स्थिति यह है कि जिला मुख्यालय पर मत्स्य पालन विभाग अधिकारी कार्यालय को खुले 11 साल से अधिक हो गया। इसके बावजूद जिले की जिम्मेदारी सिर्फ एक क्लर्क पर है। इसके अलावा सभी पद रिक्त चल रहे हैं। मत्स्य विभाग अधिकारी का अतिरिक्त चार्ज उदयपुर में विभाग के सहायक निदेशक के पास है।

प्रदेश का अनोखा दफ्तर, 11 साल पहले खुला आज तक एक साथ नहीं बैठे कर्मचारी..पढ़े पूरा मामला
मत्स्य पालन विभाग कार्यालय भवन
शहर के सलूस रोड स्थित एक मकान में मत्स्य विकास अधिकारी कार्यालय संचालित हो रहा है। यहां पर आठ पद स्वीकृत है। वर्तमान में सिर्फ एक क्लर्क का पद भरा हुआ है। इसके अतिरिक्त सभी पद रिक्त चल रहे हैं। मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य क्षेत्रीक और मत्स्य पालक लगाए जाते थे, लेकिन कई वर्षो से टेक्निकल पदों पर भर्ती नहीं होने के कारण यह पद रिक्त चल रहे हैं। वर्तमान में मत्स्य विकास अधिकारी का चार्ज भी उदयपुर में तैनात सहायक निदेशक के पास है। इनके पास उदयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा, रावतभाटा और चितौड़ का अतिरिक्त चार्ज बताया जा रहा है। ऐसे में काम कैसे होता होगा इसका स्वयं ही अंदाजा लगाया जा सकता है। वर्तमान में केन्द्र सरकार की किसान के्रेडिट कार्ड योजना संचालित हो रही है। इसमें मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए आमजन को जागरुक कर फार्म पौंड बनाकर मत्स्य पालन आदि करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
यह है पदों की स्थिति
मत्स्य विकास अधिकारी कार्यालय में आठ पद स्वीकृत है। इसमें एक मत्स्य विकास अधिकारी, एक क्लर्क, एक मत्स्य क्षेत्रिक एवं 5 मत्स्य पालक के पद स्वीकृत है। इसमें से वर्तमान में सिर्फ एक क्लर्क कार्यरत है, जबकि एक महिला को पद के विरूद्ध चतुर्थ श्रेणी के पद पर लगा रखा है।
टेक्निकल स्टॉफ का काम
- तालाब आदि के ठेके करवाना
- मत्स्य बीज की जानकारी देना
- तालाबों की चैकिंग करना
- मछलियों की जांच एवं दिशा-निर्देश
इस तरह होते हैं ठेके
- जिले में एक क्लास के पांच डेम है। बाघेरी का नाका, नंदसमंद बांध, चिकलवास, देवगढ़ का सापेरी डेम और मानसरोवर में मत्स्य पालन हो रहा है। 5 लाख से अधिक के ठेके विभागीय मुख्यालय स्तर पर होते हैं।
- बी क्लास के 12 तालाब है। वर्तमान में इसमें से 10 में मत्स्य पालन हो रहा है। जिला परिषद के माध्यम से 50 हजार से 5 लाख तक के ठेके किए जाते हैं। इससे जिला परिषद को आय होती है।
- पंचायत समिति के अधीन आने वाले तालाब के ठेके पंचायत करती है। वर्तमान में 35 में से 23 में मत्स्य पालन हो रहा है। इसमें 10 हजार से 50 हजार तक के ठेके पंचायत के माध्यम से होते हैं।
नहीं होने देते काम बाधित
मत्स्य विभाग के काम तो बाधित नहीं होने देते हैं। टेक्निकल स्टॉफ आदि की भर्ती कर्मचारी चयन बोर्ड से होती है। यहां पर एक बाबू और एक चतुर्थ श्रेणी कार्यरत है।
- अनिल जोशी, सहायक निदेशक मत्स्य पालन विभाग उदयपुर

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