महिलाओं ने सुलझाया बुजुर्ग महिला का विवाद

- घर पर होती थी मारपीट
- बातचीत के जरिए सुलझाया प्रकरण

By: Rakesh Gandhi

Updated: 03 Jul 2020, 04:30 PM IST

राजसमंद. महिला मंच की कार्यकर्ताओं ने पिछले काफी समय से ग्रामीण अंचलों में महिलाओं के साथ हो रही घरेलू हिंसा को रोकने के लिए काफी सराहनीय कार्य किया है। ये कार्यकर्ता समझाइश के साथ ही पुलिस व न्यायालय का सहारा लेकर भी इन मामलों को सुलझाने के प्रयास करती हैं।
कुछ ऐसा ही प्रकरण पिछले दिनों हुआ। छगनी बाई (नाम बदला हुआ है) एक वृद्ध एवं विधवा महिला है। इनके पति की जमीन व मकान सब इनके नाम ही है। उनके दो बेटे हैं। एक बेटा बाहर रहता है, जबकि दूसरा बेटा व उसका पोता उसके साथ आए दिन मारपीट व गाली ग्लोज करते हैं व खेत के कागज पर अंगूठा लगाने की जिद करते हैं। परेशान छगनी बाई अपने गांव में महिला मंच की कार्यकर्ता के पास गई और जबरन कागजों में अगूंठा आदि लगवाने व अन्य परेशानी के बारे में बताया। इस पर कार्यकर्ता ने उसे रात को अपने ही घर रखा और दूसरे दिन दूसरी कार्यकर्ता को यह बात बताई कि ये बुजुर्ग महिला घर जाने डर रही है। वे सभी छगनी बाई को लेकर नाथद्वारा थाने में गई। वहां रिपोर्ट दर्ज करने के बजाए मामले को परिवाद में डाल दिया गया और कहा कि वे उनके बेटे को समझा देंगे, लेकिन पुलिस की कोई कार्यवाही नहीं हुई। पुलिस का दो दिन इंतजार करने व कार्यवाही न होने से निराश महिला मंच की साहसी कार्यकर्ता डरी हुई छगनी बाई को उसके घर छोडऩे गईं। तब उसके बेटे व पोते को बुलाया, पर वे खेत से नहीं आए। इस पर वे सभी कार्यकर्ता उसके खेत पर गईं और उन्होंने उन दोनों को समझाया और कहा कि अगर मारोगे तो हम कोर्ट में तुम्हारी रिपोर्ट देंगे। तुम यदि मां की सेवा करोगे तो सबकुछ तुम दोनों बेटों को ही देगी। पर यदि मारपीट करोगे तो वो तुमको कुछ नहीं देगी। कापी देर बातचीत के बाद छगनी बाई के बेटे व पोते समझे और छगनी बाई को दूसरे बेटे की पत्नी के साथ जिस घर में वो रहती है वहीं पर उसे वापस व्यवस्थित करवाया। साथ ही मंच की कार्यकर्ताओं ने पड़ोसियों को भी कहा कि यदि छगनी बाई के साथ भविष्य में मारपीट होती है तो वो उन्हें सूचित करेंगी। इस तरह एक बुजुर्ग महिला फिर से अपने परिवार के साथ रहने लगी।
राजसमन्द महिला मंच की निदेशिका शकुन्तला पामेचा ने बताया कि महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा होना आम बात है, किन्तु कोविड-19 के दौरान माह अप्रेल से महिलाओं पर हिंसा बढ़ी है। ऐसे हालात में महिला मंच की कार्यकर्ताओं ने इन परिवारों से चर्चा कर इन पीडि़त महिलाओं को हिंसा से राहत दिलवाने का कार्य जारी रखा है। इस कार्य में पुलिस के साथ ही न्यायालय ने भी सहयोग दिया है।

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