किसानों को सम्मान और ताकत मिलने से उनके चेहरे पर चमक आई है

किसानों को सम्मान और ताकत मिलने से उनके चेहरे पर चमक आई है

harinath dwivedi | Publish: Apr, 17 2018 05:32:37 PM (IST) Ratlam, Madhya Pradesh, India

मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजनान्तर्गत जिले के 9722 किसानों को 14 करोड 63 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि वितरित

रतलाम. मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजनान्तर्गत जिले के 9722 किसानों को 14 करोड 63 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई। मुख्यमंत्री किसानों के हितों का पूरा ध्यान रख रहे हैं। आज किसानों को सम्मान और ताकत मिलने से उनके चेहरे पर चमक आई है। प्रधानमंत्री ने बैंकों में जन-धन खाते खुलवाकर गरीबों और किसानों के खाते में पैसा जमा करवाकर कमीशनखोरी खत्म कर दी है। प्रदेश सरकार किसानों को 1 लाख रुपये का ऋण देती है तो बदले में किसानों को 10 प्रतिशत कम अर्थात 90 हजार रूपए वापस करना हैं।


किसान भाई खेती से जुड़े पशु पालन से दूध, दही, घी, छाछ, गोबर आदि के लिए अन्य पर निर्भर न होना पड़े। यह बात महु-नीमच रोड स्थित कृषि उपज मंडी प्रांगण में आयोजित जिला स्तरीय किसान सम्मेलन एवं प्रोत्साहन राशि प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राज्यमंत्री नर्मदा घाटी विकास 'स्वतंत्र प्रभारÓ लालसिंह आर्य ने कही। कार्यक्रम के पूर्व अतिथियों ने कृषक समृद्धि योजना अन्तर्गत किसानों को मंच पर बुलाकर साफा बांधकर सम्मान किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सांसद सुधीर गुप्ता और कांतिलाल भूरिया के अलावा शहर विधायक चेतन्य काश्यप और वित्त आयोग के अध्यक्ष हिम्मत कोठारी, विधायक जितेंद्र गेहलोत नहीं पहुंचना किसानों में जनचर्चा का विषय बना रहा।


टेंट की छांव में रखा मंत्री का वाहन
किसानों के सम्मान के इस आयोजन में शामिल होने आए मंत्रीजी तो मंच पर कुलर की हवा में बैठे रहे, तो वहीं उनका वाहन भी आयोजन के बने पांडाल के पीछे लगे टेंट के नीचे छांव में इस तरह खड़ा रहा। मंत्रीजी के वाहन के अलावा तमाम पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों के साथ जिलेभर के एकत्रित हुए नेताओं का वाहन भी धूप में खड़े रहे। मंत्री और उनका वाहन भले ही छांव में रहा, लेकिन जिन किसानों का सम्मान करने मंत्री यहां पहुंचे थे वह धूप और गर्मी में परेशान होते रहे।


कुलर तो थे, लेकिन चालू ही नहीं हुए
आयोजन में किसानों को विभिन्न जगहों पर बसों से लाया गया। किसान बसों से यहां पहुंचे और पांडाल में उन्हें बैठाया गया। पांडाल में चारों और कई कुलर लगाए गए थे, लेकिन विडबंना यह की सभी कुलर बंद पड़े रहे और शोपीस के रुप में ही रखें रहे। पूरे आयोजन के दौरान इन कुलर को चालू भी नहीं किया जा सका। बंद कूलर के कारण किसानों को अधिक परेशान होना पड़ा।

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