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Yogini Ekadashi 2022: योगिनी एकादशी के दिन इस शुभ मुहूर्त में करें विष्णु पूजा, सभी कष्टों से मुक्ति मिलने की है मान्यता

Yogini Ekadashi Vrat 2022: हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा विधि-विधान से करने और व्रत रखने से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।

नई दिल्ली

Updated: June 14, 2022 11:18:27 am

Yogini Ekadashi Vrat 2022 Shubh Muhurat Puja Vidhi: साल भर में पड़ने वाली 24 एकादशियों में योगिनी एकादशी का व्रत काफी महत्वपूर्ण माना गया है। योगिनी एकादशी का व्रत हर साल आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इस साल 2022 में 24 जून को शुक्रवार के दिन योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। मान्यता है कि योगिनी एकादशी के व्रत मात्र से 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने का पुण्य प्राप्त हो जाता है। साथ ही इस दिन भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करने वाले मनुष्य को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। तो आइए जानते हैं योगिनी एकादशी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त और सम्पूर्ण पूजा विधि...

योगिनी एकादशी मुहूर्त

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Yogini Ekadashi 2022: योगिनी एकादशी के दिन इस शुभ मुहूर्त में करें विष्णु पूजा, सभी कष्टों से मुक्ति मिलने की है मान्यता

पंचांग के मुताबिक एकादशी तिथि 23 जून, गुरुवार को रात्रि 9:41 बजे से शुरू होकर इसका समापन 24 जून, शुक्रवार को रात 11:12 बजे पर होगा। वहीं योगिनी एकादशी का व्रत 24 जून को रखा जाएगा।

योगिनी एकादशी व्रत का पारण
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक योगिनी एकादशी व्रत का पारण 25 जून, शनिवार को प्रातः 5:41 बजे से सुबह 8:12 बजे के मध्य है।

योगिनी एकादशी पूजा विधि

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी व्रत का पालन दशमी तिथि की रात्रि से ही शुरू हो जाता है। दशमी तिथि की रात्रि को व्रत करने वाले लोगों को बिना नमक वाला सात्विक भोजन करना चाहिए। फिर एकादशी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के पूजा स्थल को साफ करके वहां दीप जलाएं और एकादशी व्रत का संकल्प लें।

इसके पश्चात घर के मंदिर में एक चौकी लगाकर उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं और इस पर विष्णु जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। फिर भगवान विष्णु को पीला रंग अतिप्रिय होने के कारण उन्हें पूजा में पीला चंदन, पीले फूल, पीले फल और मिष्ठान आदि अर्पित करें। साथ ही भोग के साथ तुलसी दल जरूर रखें। शास्त्रों के अनुसार तुलसी के बिना विष्णु भगवान की पूजा संपूर्ण नहीं मानी जाती है। इसके बाद धूप-दीप जलाकर आरती करें और फिर मन में भगवान विष्णु से आशीर्वाद प्राप्त प्राप्ति कामना करें।

(डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। patrika.com इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह ले लें।)

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