इन पापों को कभी क्षमा नहीं करते भगवान शिव, महादेव के कोप से बचना है तो भूलकर भी न करें ये कर्म

शिव पुराण में है इनका वर्णन...

By: दीपेश तिवारी

Updated: 01 Aug 2020, 12:54 PM IST

श्रावन माह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। वहीं भगवान शिव जितनी आसानी से प्रसन्न होते है, उतना ही इनका क्रोध भी प्रलयंकारी माना जाता है। भगवान शिव के भोले होने के चलते ही इनका एक नाम भोलेनाथ भी है। वहीं शिव के प्रलयंकारी गुस्से के संबंध में यहां तक कहा जाता है कि जिस दिन शिव ने अपनी तीसरी आंख खोल दी, उसी दिन दुनिया का अंत निश्चित है।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार कुछ ऐसे कर्म भी हैं, जिन्हें भगवान शिव कभी क्षमा नहीं करते इसका वर्णन शिव पुराण में भी है। इसके अनुसार कार्य, बात-व्यवहार और सोच द्वारा किए गए 12 पाप ऐसे हैं, जिसे भगवान शिव कभी क्षमा नहीं करते। जिसके चलते ऐसे कर्म करने वाला व्यक्ति हमेशा ही शिव के कोप का भाजन होगा और कभी भी सुखी जीवन व्यतीत नहीं कर सकता।

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इसके तहत भले ही बात और व्यवहार में आपने किसी को नुकसान ना पहुंचाया हो, लेकिन अगर मन में किसी के प्रति कोई दुर्भावना है या आपने किसी का अहित सोचा हो, तो यह भी पाप की श्रेणी में आता है।

ये हैं वे पाप, जिन्हें भगवान शिव भी क्षमा नहीं करते...

: किसी भोले-भाले और निरपराध इंसान को कष्ट देना, उसे नुकसान पहुंचाने, या धन-संपत्ति लूटने, उसके लिए बाधाएं पैदा करने की योजना बनाना या ऐसी सोच रखना भगवान शिव की नजरों में हर हाल में माफी ना देने योग्य पाप है।

: दूसरों के पति या पत्नी पर बुरी नजर रखना, या उसे पाने की इच्छा करना भी पाप की श्रेणी में रखा गया है।

: दूसरों का धन अपना बनाने की चाह रखना भी भगवान शिव की नजर में अक्षम्य अपराध और पाप है।

: अच्छी बातें भूलकर बुरी राह को स्वयं चुनने वाले के पाप अक्षम्य होते हैं।

- शिव पुराण के अनुसार जिस प्रकार आप किसी का बुरा नहीं करने के बावजूद, उसके लिए बुरी सोच रखने के कारण भी पाप के हकदार और दंड की श्रेणी में आ जाते हैं, उसी प्रकार भले ही आपने अपने कार्य से किसी का बुरा ना किया हो, लेकिन आपकी बोली अक्षम्य पापों का हकदार भी बना सकती है। खासतौर से इन हालातों में :-

: किसी गर्भवती महिला या मासिक के दौरान किसी महिला को कटु वचन कहना या अपनी बातों से उनका दिल दुखाना शिव की नजरों में अक्षम्य अपराध और पाप है।

: किसी के सम्मान को हानि पहुंचने की नीयत से झूठ बोलना ‘छल’ की श्रेणी में आता है और अक्षम्य पाप का भागीदार बनाता है।

: समाज में किसी के मान-सम्मान को हानि पहुंचाने की नीयत से या उसकी पीठ पीछे बातें करना या अफवाह फैलाना भी एक अक्षम्य पाप है।

- आपकी सोच और बातों के अलावा आपके द्वारा जीवन में किए गए ये कार्य भी आपको पापों का भागी बना सकते है :-

: धर्म अनुसार मना की गई चीजें खाना या धर्म के विपरीत कार्य करना किसी हाल में व्यक्त के लिए स्वीकार्य नहीं होना चाहिए, वरना आप भगवान शिव की नजरों में हमेशा ही अपराधी रहेंगे।

: बच्चों, महिलाओं या किसी भी कमजोर जीव के खिलाफ हिंसा और असामाजिक कार्यों में लिप्तता मनुष्य को पाप का दोषी बनाता है।

: गलत तरीके से दूसरे की संपत्ति हड़पना, ब्राह्मण या मंदिर की चीजें चुराना या गलत तरीके से हथियाना भी आपको इस श्रेणी में लाता है।

: गुरु, माता-पिता, पत्नी या पूर्वजों का अपमान भी आपको भूलकर भी नहीं करनी चाहिए।

: शराब पीना, गुरु की पत्नी के साथ संबंध बनाना, दान की हुई चीजें या धन वापस लेना महापाप माने जाते हैं जिसे भगवान शिव कभी भी क्षमा नहीं करते।

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दीपेश तिवारी
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