मनीष हत्याकाण्ड: तीसरे दिन हुआ अंतिम संस्कार, साथ जले परिवार के अरमान

suresh mishra

Publish: Dec, 08 2017 11:57:15 (IST)

Rewa, Madhya Pradesh, India
मनीष हत्याकाण्ड: तीसरे दिन हुआ अंतिम संस्कार, साथ जले परिवार के अरमान

सांसद, विधायक, एसपी सहित अन्य ने परिजनों को न्याय दिलाने का दिया भरोसा

रीवा। इंजीनियर मनीष पटेल की मौत के बाद तीसरे दिन अंतिम संस्कार को लेकर उत्पन्न हुई असमंजस की स्थिति पर जनप्रतिनिधियों सहित पूरा प्रशासनिक महकमा बंधवा गांव पहुंच गया। परिजनों एवं ग्रामीणों द्वारा हत्या के प्रमुख दोषियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही थी। पीडि़त मां का साफ कहना था कि उसे आश्वासन नहीं न्याय चाहिए।

जिसपर मजिस्ट्रियल जांच मौके पर ही शुरू किए जाने के बाद परिजन अंतिम संस्कार करने को राजी हुए और प्रशासनिक देखरेख में गांव में ही अंतिम संस्कार किया गया। साथ ही कलेक्टर ने कहा है कि वह सीबीआई जांच कराने के लिए भी तैयार है।

जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद अंतिम संस्कार

हत्या के बाद गांव में बढ़ते तनाव को देखते हुए कलेक्टर, एसपी सहित भारी संख्या में पुलिस बल सुबह ही बंधवा (नईगढ़ी) पहुंच गया। प्रशासन पहले तो समझाइश देने में सफल नहीं हुआ लेकिन जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद अंतिम संस्कार किया गया। मनीष के पार्थिव शरीर को छोटे भाई ने मुखाग्नि दी। हत्या के प्रमुख आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश भी है।

आरोपियों पर कार्रवाई की मांग

5 दिसंबर को मौत के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया था। आरोपियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर परिजन अड़े थे।तब से लगातार बंधवा गांव पुलिस छावनी में तब्दील था। इधर परिजनों ने भी न्याय मिलने पर ही अंतिम संस्कार करने की घोषणा कर दी थी। स्थानीय अधिकारियों ने समझाइश देने का प्रयास किया लेकिन दो दिन तक घर के बाहर शव रखा रहा। प्रशासनिक व्यवस्था पर उठते सवालों के बीच पूरा महकमा गुरुवार की सुबह ही पहुंच गया था।

सांसद-विधायक ने भी दी सांत्वना
मृतक के परिजनों को सांत्वना देने सांसद जर्नादन मिश्रा, विधायक शीला त्यागी, जिला पंचायत अध्यक्ष अभय मिश्रा आदि पहुंचे। इन्होंने परिजनों के साथ खड़े होने का आश्वासन दिया और कलेक्टर से त्वरित जांच के लिए कहा। मौके पर मौजूद एसडीएम दीपक वैद्य ने जांच शुरू कर दी। परिजनों के बयान दर्ज किए इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए लोग रवाना हुए।

बोली मां... कैसे करूं विश्वास
नौजवान बेटे की मौत के बाद किसी मां पर आए दर्द को शब्दों में बयान करना मुश्किल होता है। वह मां जिसने कई दिनों तक बेटे को अचेत और तड़पते हुए देखा हो, उसके लिए हर आश्वासन बेमानी साबित हो रहे थे। मनीष की हत्या को पहले पुलिस ने सड़क हादसा बताया। जबकि परिजन शुरू से ही पीएसआई शिवा अग्रवाल सहित उसके दोस्तों पर मारपीट करने का आरोप लगाते रहे हंै। इसके बाद पुलिस ने गंभीर हालत में रात में मनीष को रेफर कराया।

इलाज के लिए दिल्ली ले जाने का नाटक

चौबीस घंटे जबलपुर में भटकने के बाद वापस रीवा लेकर आए। इसके बाद संजय गांधी चिकित्सालय में भर्ती कराया। इलाज के लिए दिल्ली ले जाने का नाटक पुलिस रचती रही। साथ ही यह बात फैलाई की परिजन ही उपचार के लिए नहीं जाना चाहते। लगातार धोखे खा रही मां सरोज पटेल ने कलेक्टर से पूछा कि किस पर वह विश्वास करे। पहले भी बड़े अधिकारियों ने ही धोखा किया था। कलेक्टर भी इस पर निरुत्तर रहीं।

आश्वासन नहीं न्याय चाहिए
जिस बेटे को मां ने इतने संघर्षो के बाद पालन पोषण किया। उसको न्याय दिलाने के लिस मां ने कलेजे में पत्थर रखकर उसका अंतिम संस्कार रोक दिया। तीन दिन तक मां बेटे का शव लेकर विलखती रही है। यहां तक कि वह बेटे का शव छोड़कर एक मिनट के लिए भी घर के अंदर नहीं गई। यह देख परिजनों व ग्रामीणों की भी आखें भर आई। तीसरे दिन प्रशासनिक व पुलिस के अधिकारियों से उसने साफ कहा कि न्याय के लिए मैने कलेजे में पत्थर रख लिया है। मुझे आश्वासन नहीं न्याय चाहिए। दोषी पुलिसकर्मी को गिरफ्तार करो।

संघर्ष कर कराई इंजीनियर की पढ़ाई
बंधवा गांव में जन्मा मनीष किसान का बेटा था। आर्थिक स्थित मजबूत नहीं होने के बावजूद माता-पिता ने संघर्ष करते हुए उसे सिविल इंजीनियर बनाया। इंजीनियर बेटे से परिवार के बहुत से सपने थे, लेकिन मनीष की चिता के साथ परिवार के सभी अरमान भी जल गए।

आर्थिक मदद दिया आश्वासन
सांसद, विधायक और कलेक्टर ने मनीष की हत्या की निष्पक्ष जांच कराने के साथ प्रशासन से अधिक से अधिक आर्थिक मदद दिलाने की बात कही है। वहीं कलेक्टर ने परिवार जनों को आश्वासन दिलाया है कि वह मामले की सीबीआई जांच कराने के लिए तैयार हैं।

एफआईआर की मांग पर अड़े थे परिजन
घटना को लेकर सबसे बड़ा आरोप पीएसआई शिवा अग्रवाल पर पहले दिन से ही लगाए जाते रहे हैं। प्रथम दृष्टया भूमिका पाए जाने पर एसपी ने निलंबित भी कर दिया है लेकिन परिजन उस पर एफआईआर की भी मांग कर रहे थे। मजिस्ट्रियल जांच में मां, भाईसहित अन्य कईलोगों के बयान दर्जकिए गए हैं।

पीएसआई को दोषी बताया

जिसमें पीएसआई को दोषी बताया गया है। एसपी ने कहा है कि भूमिका प्रमाणित होने पर एफआईआर की जाएगी। अब सवाल उठता है कि यदि पीएसआई दोषी नहीं था तो निलंबित क्यों किया गया। उसकी गिरफ्तारी की मांग के कारण ही समय पर शव का अंतिम संस्कार नहीं हो सका। आखिर पुलिस अधिकारी उसे क्यों बचाने में लगे हैं।

सात घरों में तीन दिन नहीं जला चूल्हा
जिस परिवार के लिए सबसे बड़ी उम्मीद बनकर मनीष पटेल उभरा था, उसकी मौत ने आसपास के लोगों को भी झकझोर दिया। पिछले तीन दिनों से न्याय दिलाने की मांग कर रहे परिजनों के साथ पड़ोस के सात घरों में भी चूल्हा नहीं जला। वहीं परिवार के अन्य सदस्य भी दिन-रात शव के पास ही बैठे रहे।

घटना की मजिस्ट्रियल जांच शुरू कर दी गई है। मौके पर परिवार वालों के कथन भी दर्ज कराएं गए हैं। मामले में जो भी दोषी मिलेगा उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जांच में दोषी मिलने पर पीएसआई पर भी मामला दर्ज किया जाएगा।
ललित शाक्यवार, एसपी रीवा

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned