बड़ी खबर : भाजपा से जुड़े मेयर इन काउंसिल के सभी सदस्यों को बर्खास्त करने का प्रस्ताव, मचा हड़कंप

बड़ी खबर : भाजपा से जुड़े मेयर इन काउंसिल के सभी सदस्यों को बर्खास्त करने का प्रस्ताव, मचा हड़कंप
Proposal to sack all members of Mayor-in-Council associated with BJP

Mrigendra Singh | Updated: 23 Sep 2019, 11:42:25 AM (IST) Rewa, Rewa, Madhya Pradesh, India

-एमआइसी और निगम आयुक्त में टकराव के बीच बड़ी कार्रवाई....

- नियम विरुद्ध कार्य करते हुए पद के दुरुपयोग का आरोप, निगम आयुक्त ने संभागायुक्त को भेजा प्रस्ताव

- मनमानी रूप से निर्णय लेने का है आरोप


रीवा। मेयर इन काउंसिल और नगर निगम आयुक्त के बीच नियमों को लेकर चल रहे टकराव के बीच बड़ी कार्रवाई करते हुए आयुक्त ने सभी सदस्यों को बर्खास्त करने का प्रस्ताव भेज दिया है। संभागायुक्त को भेजे गए प्रस्ताव में कई बिन्दुओं का उल्लेख किया गया है, जिसमें आरोप है कि नगर निगम के हितों की अनदेखी करते हुए कार्रवाई की गई है। महापौर ममता गुप्ता अनिश्चिकाल के लिए अवकाश पर चली गई हैं।

इसलिए वर्तमान में प्रभारी महापौर वेंकटेश पाण्डेय सहित सभी 9 मेयर इन काउंसिल के सदस्यों को पार्षद पद से हटाए जाने का प्रस्ताव भेजा गया है। हर पार्षद की भूमिका प्रस्ताव में बताई गई है। जिसमें एमआइसी में कुछ समय पहले ही शामिल किए गए अखिल गुप्ता पर केवल एक ही आरोप स्कीम नंबर छह से जुड़े प्रस्ताव में निर्णय लेने में मनमानी करने का आरोप है। अन्य सदस्यों पर पूर्व में किए गए नियम विरुद्ध कार्यों का भी उल्लेख है।

शहर के स्कीम नंबर छह में अवैधानिक रूप से कालोनी विकसित हो गई है। इसमें जांच निगम आयुक्त ने शुरू कराई है। तत्कालीन कार्यपालन यंत्री शैलेन्द्र शुक्ला और एसडीओ एचके त्रिपाठी के निलंबन का प्रस्ताव बीते महीने एमआइसी को निगम आयुक्त ने भेजा था। जिसको लेकर टकराव उत्पन्न हुआ और एमआइसी के कामकाज संचालन नियम के तहत दस दिन के भीतर कोई निर्णय नहीं हुआ तो दोनों अधिकारियों को आयुक्त ने निलंबित कर दिया। इसके बाद एमआइसी ने आयुक्त के आदेश को पलट दिया। मामला कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने मेयर इन काउंसिल को ही अधिकारियों के निलंबन पर निर्णय का आदेश जारी किया।इस बीच आयुक्त ने एमआइसी सदस्यों को पद से पृथक करने का प्रस्ताव देकर एक बार फिर मामले को गर्म कर दिया है। यह मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ेगा।

- सरकार की जांच रिपोर्ट का दिया हवाला
एमआइसी के कामकाज को लेकर पहले भी आरोप लगाए गए थे। प्रदेश में नई सरकार गठित होने के बाद मुख्यमंत्री ने रीवा, छिंदवाड़ा और ग्वालियर नगर निगम की जांच कराई थी। जिसमें पाया गया है कि वर्ष 2015 से लेकर 2018 तक संपत्तिकर के अधिभार की राशि में छह प्रतिशत की छूट देकर नगर निगम को आर्थिक रूप से हानि पहुंचाई गई। इसी तरह लेनदारियों में 18 प्रतिशत ब्याज वसूलने के बजाय 9 प्रतिशत की छूट दे दी गई। वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए अंबेडकर बाजार एवं शिल्पी प्लाजा के पीछे वाहन पार्किंग शुल्क का प्रीमियम कम निर्धारित कर निगम का आर्थिक क्षति पहुंचाई। इसी तरह अल्पकालिक निविदा बुलाई गई और उसमें नियमों की अनदेखी करते हुए निविदाओं की स्वीकृति दी गई। जिससे निगम को घाटा हुआ।
- स्कीम छह को लेकर सदस्यों पर यह है आरोप
शहर के स्कीम नंबर छह में अनियमितता को लेकर चल रही कार्रवाई को प्रभावित करने का आरोप भी एमआइसी सदस्यों पर है। बीते २ अगस्त को अधिकारियों के निलंबन के प्रस्ताव पर निर्धारित अवधि में कोई कार्रवाई नहीं करने का आरोप है। २६ अगस्त को बुलाई गई बैठक में सदस्यों ने निर्णय पर कोई हस्ताक्षर नहीं किए, बल्कि ३० अगस्त को बिना एजेंडा जारी किए स्वयं बैठक कर ली और निर्णय भी पारित कर दिया कि अनियमितता का जिन अधिकारियों पर आरोप है उन पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। आयुक्त ने अधिनियम की धारा 53(२) का उल्लेख करते हुए कहा है कि बिना सम्मिलन के निर्णय लेना विधि विरुद्ध है। जिस तरह के एमआइसी सदस्यों पर आरोप है, उनका हवाला देते हुए कहा गया है कि नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 19 के तहत पद से हटाया जाए।
- प्रभारी महापौर ने नियम विरुद्ध लिया निर्णय
प्रभारी महापौर वेंकटेश पाण्डेय पर अन्य आरोप तो दूसरे एमआइसी सदस्यों के समान ही हैं। साथ ही उन पर कई अतिरिक्त आरोप भी हैं। जिसमें कहा गया है कि बिना एजेंडा जारी किए 30 अगस्त को जो सदस्यों ने निर्णय लिया, उसकी जानकारी इ-मेल के जरिए पूर्व कार्यपालन यंत्री शैलेन्द्र शुक्ला को भेज दी। इसका उन्होंने उल्लेख हाइकोर्ट में दायर याचिका में भी किया है। इसे पदीय दायित्व के विपरीत कार्य माना गया है। वहीं 31 जुलाई के परिषद के सम्मिलन में वेंकटेश पाण्डेय सहित अन्य सदस्यों ने कहा था कि आयुक्त भ्रष्टाचार से जुड़े प्रस्ताव लाएं, उन पर सीधे कार्रवाई होगी और जब प्रस्ताव भेजा तो बचाने का कार्य करने लगे।

इसके अलावा अधिनियम की धारा 25 (२) के तहत प्रभारी महापौर को केवल आपात पस्थितियों में निर्णय लेने का अधिकार है लेकिन वेंकटेश ने एमआइसी की बैठक बुलाकर कई अन्य अहम मुद्दों पर प्रस्ताव पारित कर दिया है।
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इन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव
एमआइसी के जिन सदस्यों को पद से हटाने का प्रस्ताव है, उसमें प्रमुख रूप से वेंकटेश पाण्डेय, नीरज पटेल, मनीष श्रीवास्तव, शिवदत्त पाण्डेय, सतीश सिंह, संजू कोल, ललिता वर्मा, संजना सोनी, अखिल गुप्ता आदि शामिल हैं।
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मेयर इन काउंसिल के कामकाज संचालन का जो नियम है, उसकी अनदेखी की गई है। शासन ने भी जांच कराई तो पाया गया है कि निगम को आर्थिक नुकसान एमआइसी सदस्यों ने पहुंचाया है। स्कीम नंबर छह से जुड़े मामले में भी नियम विरुद्ध निर्णय पारित कर दिया है। इसलिए इनका पद पर बने रहना निगम हित में नहीं हैं। जिसके चलते संभागायुक्त को प्रस्ताव भेजा है कि पद से पृथक करें।
सभाजीत यादव, आयुक्त नगर निगम
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मैं व्यक्तिगत कारणों की वजह से दिल्ली जा रहा हूं। निगम आयुक्त ने क्या प्रस्ताव दिया है, इसकी जानकारी नहीं है। वापस लौटने पर ही इस मामले में कुछ कह पाऊंगा। जो निर्णय एमआइसी में हुए हैं वह नियमों के तहत हैं।
वेंकटेश पाण्डेय, प्रभारी महापौर
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एमआइसी अपने से कोई प्रस्ताव नहीं मंगाती, निगम के अधिकारी जो प्रस्तुत करते हैं उसी पर निर्णय होता है। निविदा समिति की अनुशंसा पर ही कार्रवाई होती है। स्कीम छह से जुड़ा जो विषय है, उसमें तो हम सब भी कह रहे हैं कि सभी की जवाबदेही तय हो। केवल दो अधिकारियों का निलंबन पर्याप्त नहीं है। दोनों अधिकारी वर्तमान में यहां पदस्थ भी नहीं हैं कि जांच को प्रभावित करेंगे।
नीरज पटेल, एमआइसी सदस्य

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