विश्वविद्यालय कार्यपरिषद के मनमानी निर्णयों पर राजभवन ने कसी नकेल

- कुलपति के पास आया पत्र, सदस्यों के दबाव में नियम विरुद्ध प्रस्ताव नहीं हों पारित
- पूर्व में शासन के निर्णय के विपरीत प्रस्ताव हो गया था पारित



रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय की कार्य परिषद द्वारा लिए जाने वाले मनमानी निर्णयों पर अब राजभवन ने नकेल कसने की तैयारी की है। कुलपति के पास आए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ऐसे निर्णय नहीं लिए जाएं जिससे बाद में विषम परिस्थितियां निर्मित होती हैं। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा उठाई गई आपत्ति के आधार पर राजभवन की ओर से कुलपति को पत्र लिखकर निर्देशित किया गया है कि कार्यपरिषद के अध्यक्ष कुलपति होते हैं, इसलिए बैठकों का एजेंडा तय करते समय यह ध्यान रखें कि शासन के नियमों विपरीत प्रस्ताव पास नहीं हों। यदि कार्यपरिषद सदस्यों की ओर से कोई आपत्ति उठाई जाती है या फिर कोई ऐसा नया प्रस्ताव लाया जाता है, जिसकी वजह से नियमों की अवहेलना होने की आशंका होती है। ऐसे मामलों में शासन से मार्गदर्शन प्राप्त करने के बाद ही कोई निर्णय किए जाएं। कार्यपरिषद यदि बहुमत के आधार पर कोई विरोधाभाषी प्रस्ताव पारित करता है तो आदेश जारी करने से पहले शासन से अनुमति अनिवार्य रूप से प्राप्त करें। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के साथ ही प्रदेश के अन्य कई विश्वविद्यालयों में भी कार्यपरिषद के कुछ निर्णयों को लेकर आपत्ति उठाई गई थी। इसलिए शासन ने राजभवन को पत्र भेजकर अनुरोध किया था कि कुलपतियों को आदेश जारी कर विरोधाभाषी निर्णय लेने से बचने के लिए कहा जाए।
- बिना पद स्वीकृति के नियमित करने का लिया था निर्णय
विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद ने पूर्व में एक ऐसा निर्णय ले लिया था, जिसमें शासन के नियमों की खुले तौर पर अवहेलना हो रही थी। पूर्व में 84 की संख्या में दैनिक वेतनभोगी रखे गए थे। बाद में इन्हें नियमित कर दिया गया और शासन के नियमों का लाभ दिया जाने लगा। इन कर्मचारियों के लिए पद ही शासन से स्वीकृत नहीं हुआ है लेकिन कार्यपरिषद ने उन्हें नियमित करने का निर्णय ले लिया। ऐसे में शासन के कार्यपरिषद के इस निर्णय पर समस्या उत्पन्न हो रही है। इसी तरह के अन्य कई मामले सामने आए हैं जिसमें कार्यपरिषद की ओर से मनमानी निर्णय लिए गए हैं।
- कुलपति और सदस्यों में होता रहा है टकराव
विश्वविद्यालय कार्यपरिषद के सदस्यों और कुलपति के बीच कई कुछ मामलों को लेकर बड़े टकराव भी सामने आते हैं। पूर्व के कई कुलपतियों ने विश्वविद्यालय के भ्रष्टाचार की जांच के मामले में खामोशी बरती तो कार्यपरिषद सदस्यों ने बैठक और उसके बाहर भी विरोध जताया। इसी वजह से कई बार कुलपति सदस्यों के दबाव में आकर नियम विरुद्ध आने वाले प्रस्तावों को भी पास करा देते हैं। अब राजभवन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी हालत में नियम विरुद्ध निर्णय नहीं लिए जाएंगे।
- इन निर्देशों का करना होगा पालन
- बैठकों के पूर्व विचाराधीन विषयों की कार्यसूची तैयार करते समय शासन के नियमों और निर्देशों का ध्यान रखा जाए।
- कार्यसूची में शामिल विषयों में निर्णय के समय सभी सदस्यों को शासन के निर्देशों से अवगत कराना होगा।
- संबंधित विषयों में लिए जाने वाले निर्णयों में शासन के नियमों का पूर्णत: पालन सुनिश्चि करना होगा। शासकीय नियमों के विरुद्ध किसी तरह का निर्णय नहीं लिया जा सकेगा।
- परिस्थितिवश यदि कोई शासन के नियमों विपरीत निर्णय कार्यपरिषद द्वारा लिया जाता है तो कार्यकारी आदेश जारी करने से पहले शासन से अनुमति लेना होगा।

Mrigendra Singh Reporting
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