HOD यदि देवर्ष की यह बात मान लेते तो शायद बच जाती जान, जानिए पूरा सच

HOD यदि देवर्ष की यह बात मान लेते तो शायद बच जाती जान, जानिए पूरा सच

Manish Kumar Dubey | Publish: Sep, 16 2018 09:46:14 AM (IST) | Updated: Sep, 16 2018 09:46:15 AM (IST) Sagar University, Moti Nagar, Sagar, Madhya Pradesh, India

फेल करने की धमकी देने के आरोप, देवर्ष एक होनहार छात्र था, जो 84 फीसदी अंक से पास होता था

सागर. डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विवि में शुक्रवार शाम बीएससी थर्ड सेमेस्टर के छात्र देवर्ष बागरी ने टेगौर हॉस्टल में फंदा लगाकर जान दे दी। इसकी वजह बीएससी थर्ड सेमेस्टर के छात्र देवर्ष द्वारा की गई आत्महत्या की वजह एक दिन में तीन से चार मिड सेमेस्टर के एग्जाम होना बताया जा रहा है। देवर्ष एक होनहार छात्र था, जो ८४ फीसदी अंक से पास होता था, लेकिन लगातार हो रहे एग्जाम के कारण वह काफी तनाव में था। मृतक छात्र के साथियों ने बताया कि देवर्ष ने मैथ्स विभाग के एचओडी से दो दिन बाद यह पेपर कराने का आग्रह किया था, लेकिन एचओडी ने उसे डांट कर चुप करा दिया और कहा कि पेपर नियमानुसार ही होंगे।
विद्यार्थियों का आरोप है कि कई विभागों में मिड सेमेस्टर की परीक्षा की तारीख बढ़ाई गई है, लेकिन यहां एेसा नहीं किया गया। हास्टल में उसके साथ रह रहे साथियों ने बताया कि 4.30 बजे जब वह पेपर देने के लिए गया था। उस दौरान भी वह काफी तनाव में था। इसी दौरान परीक्षा हॉल में मौजूद रिसर्च स्कॉलर्स ने उसकी तलाशी ली। जहां उसकी जेब से फोन मिला। बताया जाता है कि इसी दौरान देवर्ष को टीचिंग कार्य में तैनात किए गए रिसर्च स्कॉलर्स ने बहुत डांटा और उसे पेपर नहीं देने दिया था।
छात्र द्वारा की गई आत्महत्या के बाद विवि प्रशासन भी सकते में आ गया। आनन-फानन में प्रोक्टर प्रो. एपी दुबे, प्रो. प्रदीप तिवारी और प्रो. आशीष वर्मा हॉस्टल पहुंचे, जहां उन्होंने छात्र को मेडिकल कॉलेज भेजा। इस दौरान हॉस्टल सील किया गया।
यह सभी अधिकारी बीएमसी पहुंचे, जहां डॉक्टरों से चर्चा के दौरान पता चला कि बीएमसी पहुंचने से पहले ही छात्र की मौत हो गई। इस दौरान प्रो. एपी दुबे बीएमसी में आक्रोशित विद्यार्थियों को शांत कराने की कोशिश की। बाद में रजिस्ट्रार कर्नल राकेश मोहन जोशी भी वहां आए गए। वहीं, कुछ विभागों के एचओडी और डीन भी वहां पहुंचे गए थे।
विवि में पढ़ाई का स्तर चौपट, शोधार्थियों के भरोसे हैं छात्र
नाराज छात्रों ने विवि में नियमित शिक्षकों द्वारा पढ़ाए न जाने के भी आरोप लगाए हैं। मृतक छात्र के साथियों ने बताया कि मैथ्स विभाग में एक भी नियमित शिक्षक छात्रों को पढ़ाने नहीं आता है। इस वजह से किसी भी छात्र का कोर्स पूरा नहीं हुआ है। छात्रों का कहना था कि रिसर्च स्कॉलर्स भी बदल-बदल कर पढ़ाने आते हैं, जिनका रवैया भी छात्रों के प्रति रूखा रहता है।

नहीं मिला सुसाइड नोट, शुरू की जांच
प्रो. आशीष वर्मा ने बताया कि मृतक के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। हालांकि इस मामले में तनाव की बात सामने आने पर विवि प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं कई छात्रों के
बयान भी लिए जाएंगे।

&घटना दुख:द है। छात्र ने किस वजह से खुदकुशी की है। इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी पाया
जाएगा उसके खिलाफ
कार्रवाई की जाएगी।
कर्नल राकेश मोहन जोशी, प्रभारी रजिस्ट्रार

 

ऐसे चला घटनाक्रम
लाठी-रॉड लेकर विवि के छात्र बीएमसी पहुंचे तो
वहां हड़कंप मच गया।
उत्पात के बाद मेन रोड पर लोगों में भगदड़ मच गई और सड़क जूते-चप्पलों से पट गई।
कलेक्टर व एसपी कंट्रोल रूम पहुंचे और वहां से
हालात पर नजर रखे रहे।
उत्पात देख पुलिस ने जिला अस्पताल व बीएमसी के बीच दुकानें बंद कराते हुए ट्रैफिक रोक दिया।
छात्रों के पथराव में आरआई रणजीत ङ्क्षसह सिकरवार सहित
चार पुलिसकर्मी जख्मी हो गए।
बीएमसी में छात्रों के पथराव-उत्पात के बाद पुलिस,सुरक्षा एजेंसी ने विवि परिसर में सुरक्षा बढा़ई
उत्पात के बाद करीब एक दर्जन जख्मी छात्रों गोपालगंज
थाने पहुंचे तो उनकी मेडिकल
जांच कराई गई।
छात्र के पीएम को लेकर पुलिस चौकस
देवर्ष की खुदकुशी के बाद आक्रोशित छात्रों द्वारा मचाए गए उत्पात को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने शनिवार को पोस्टमार्टम के दौरान कड़ी चौकसी के इंतजाम कर लिए हैं। देवर्ष के शव को मर्चुरी में रखवाते हुए उसके नागौद निवासी परिजनों को सूचना दे दी गई है।
पत्थरबाजों की पहचान कर रहे हैं
उत्पात में जख्मी पुलिसकर्मियों एवं कुछ छात्रों को मेडिकल परीक्षण कराया है। वहीं, हंगामे के दौरान पुलिसकर्मियों से झूमाझपटी कर रहे एक युवक को हिरासत में लिया है। जबकि अन्य पत्थरबाजों की पहचान कर रही है। मेडिकल के डॉक्टरों द्वारा जिन छात्रों से मारपीट की गई है। उनके भी बयान लिए जा रहे हैं। इस मामले की जांच की जा रही है। पथराव के दौरान आधा दर्जन थानों के टीआई, १०० पुलिस जवानों के मोर्चा संभाले थे।
रामेश्वर सिंह, एससपी

पुलिस की कार्रवाई की निंदा
सागर. छात्र द्वारा की गई आत्महत्या के बाद बीएमसी में पुलिस द्वारा की गई लाठी चार्ज की कार्रवाई निंदनीय है। बड़ा बाजार छात्र संघ के संरक्षक नरेंद्र चौबे ने कहा कि एेसे मामलों में युवा छात्र आक्रोशित होत हैं, लेकिन प्रशासन को धैर्य से काम लेना था। इन दिनों छात्रों की परिक्षाएं चल रहीे हैं, इस घटना से उनके मनमष्तिक पर गहरा असर पड़ेगा। मामले की जांच होना चाहिए।

 

 

डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विवि में शुक्रवार शाम बीएससी थर्ड सेमेस्टर के छात्र देवर्ष बागरी ने टेगौर हॉस्टल में फंदा लगाकर जान दे दी। साथी छात्र उसे गंभीर हालत में विवि के स्वास्थ्य केंद्र ले गए, लेकिन वहां ताला मिला। आनन-फानन में लगभग ६.३० बजे छात्र को बीएमसी लाया गया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसी बात पर छात्र भड़क उठे और डॉक्टरों से विवाद करने लगे। छात्रों का आरोप था कि डॉक्टर चैक करने से पहले फॉर्म भरने की बात कर रहे थे। उधर, डॉक्टरों का कहना था कि छात्र मृत हालत में लाया गया था। देखते ही देखते विवि और बीएमसी के छात्र आमने-सामने आ गए। भीड़ बेकाबू होते देख पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। आंसू गैस का गोला भी दागा गया। तिली रोड पर दो से ढाई घंटे तक तनाव जैसे हालात रहे।
ऐसे शुरू हुआ हंगामा- बताया जाता है कि बीएमसी में डॉक्टरों ने हॉस्टल कॉल कर विद्यार्थियों को बुला लिया था, जहां चार से पांच छात्रों के साथ मारपीट की गई। इसी के बाद विवाद बढ़ गया। विवि के छात्रों ने भी तीनों हॉस्टलों में फोन कर दिया। विवाद की जानकारी लगते ही पुलिस अधिकारी बीएमसी पहुंच गए। परिसर में जमा बीएमसी हॉस्टल के छात्रों को खदेड़ा गया। सीएसपी आरडी भारद्वाज ने मेन गेट बंद कर पुलिस बल को तैनात कर दिया।
करीब २० मिनट बाद विवि के सैकड़ों छात्र बीएमसी पहुंचे। वे डंडे और रॉड लिए थे। मेन गेट से करीब १०० फीट दूर पुलिस ने छात्रों को रोक लिया। आक्रोशित भीड़ डॉक्टरों द्वारा की गई मारपीट को लेकर गुस्से में थी। जहां उन्होंने नारेबाजी की और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर की मांग करने लगे।


यह बताई वजह...
नागौद (सतना) निवासी बीएससी थर्ड सेमेस्टर के छात्र देवर्ष बागरी का शुक्रवार को मिड सेमेस्टर का पेपर था। बताया जाता है कि पेपर के दौरान फैकल्टी द्वारा की गई जांच में उसकी जेब से मोबाइल निकला था। इसी बात पर शिक्षक ने उसको बहुत डांटा। छात्रों की मानें तो उसे पेपर भी नहीं देने दिया था। इससे मायूस होकर देवर्ष अपने हॉस्टल पहुंचा, जहां ३८ नंबर कमरे में उसने फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली।
अभद्रता के बाद धुना
छात्र वैभव यादव ने इस बीच महिला टीआई संगीता सिंह से अभद्रता कर दी और हंगामा खड़ा हो गया। स्थिति बिगड़ते देख पुलिसकर्मियों ने बल प्रयोग करते हुए उत्पाती छात्रों पर जमकर लाठियां भांजी। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे। लाठीचार्ज और भगदड़ में एक दर्जन से अधिक छात्र घायल हो गए। जवाब में छात्रों ने पुलिस पर पथराव और लाठियां
चलाई गईं। इससे आरआई रणजीत सिंह सिकरवार सहित छह से ज्यादा पुलिसकर्मी जख्मी हुए हैं।

 

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