पॉलीथिन पर प्रतिबंध का आदेश हवा-हवाई, 14 माह में चार कदम भी नहीं चली कार्रवाई

पॉलीथिन पर प्रतिबंध का आदेश हवा-हवाई, 14 माह में चार कदम भी नहीं चली कार्रवाई

Hamid Khan | Publish: Jul, 14 2018 10:58:53 AM (IST) Sagar, Madhya Pradesh, India

प्रदेश सरकार मई 2017 से लगा चुकी है बैन, फिर भी जिले में रोजाना 6 क्विंटल की खपत

सागर. पर्यावरण के लिए घातक होने के बाद भी अमानक (तय माइक्रॉन से कम) पॉलीथिन-प्लास्टिक पर सख्ती से प्रतिबंध लगाने में सरकार के हाथ कांप रहे हैं। सागर जैसे जिले में रोजाना औसतन 6 क्विंटल पॉलीथिन-प्लास्टिक की खपत हो रही है। प्रदेश की सीमा से लगे महाराष्ट्र के बाद अब 15 जुलाई से यूपी सरकार भी पॉलीथिन बिक्री को प्रतिबंधित कर रही है, लेकिन मप्र सहित जिले में सवा साल बाद भी हालात वही हैं। जानकारी के मुताबिक पॉलीथिन बिक्री को लेकर जिले में आज तक कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है।
मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जुलाई 5017 में प्लास्टिक थैलियों के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, विक्रय एवं उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की सार्वजनिक सूचना जारी की थी लेकिन इस सूचना जारी होने के बाद फिर पर्यावरण संरक्षण को लेकर कोई प्रयास नहीं हुए। जुलाई-2018 में भी यह कार्रवाई ठंडे बस्ते में पड़ी है।
मई-2017 में लिया गया था निर्णय
प्रदेश के पर्यावरण मंत्रालय ने 24 मई 2017 को अधिसूचना जारी कर मप्र जैव अनाश्य अपशिष्ट (नियंत्रण) अधिनियम 2004 की धारा 3 में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए लोकहित में पूरे प्रदेश में प्लास्टिक थैलियों के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, विक्रय एवं उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था। अधिसूचना में कहा गया था प्रावधानों का उल्लघंन पाए जाने पर जैव अनाश्य अपशिष्ट (नियंत्रण) अधिनियम 2004 की धारा ९ के तहत दण्ड का नियम है। उल्लंघन पर एक महीने तक का कारावास या एक हजार रुपए तक का जुर्माना अथवा दोनों एक साथ लगाए जा सकते हैं। उल्लंघन की निरंतरता पाए जाने पर तीन महीनों तक का कारावास या पांच हजार रुपए तक का जुर्माना अथवा दोनों कार्रवाई एक साथ दंडित करने का प्रावधान है।
खुलेआम उपयोग
बाजारों में खुलेआम पॉलिथिन का उपयोग हो रहा है। खाद्य सामग्री से लेकर फल-सब्जी तक पॉलिथिन में ही पैक करके दी जा रही है। यही घर-घर पहुंच जाती है और फिर कचरे में फेंक दी जाती है।
तय की गई थी ये गाइडलाइन
पान मसाला, तम्बाकू और गुटखा की पैकिंग में प्लास्टिक सामग्री/विनाइल एेसीडेट, मेलिक एसिड, विनाइल क्लोराइड का उपयोग नहीं होगा।
प्लास्टिक शीट या मल्टी लेयर पैकिंग जिस पर निर्माता का विवरण या मार्ग स्थापित नहीं है उसका क्रय विक्रय नहीं होगा।
प्लास्टिक शीट/फिल्म का निर्माण नियम 2016 में किए गए प्रावधान के अनुसार लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन के बिना नहीं किया जाएगा।
प्लास्टिक कैरी बैग के स्थान पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रमाणित व आईएस-17088 मानकों के अनुरूप निर्मित कम्पोरटैबिल (बॉयो वेस्ट) कैरी बैग का उपयोग किया जा सकता है।
अनाधिकृत क्षेत्रों में अनाधिकृत रूप से संचालित प्लास्टिक फिल्म निर्माता इकाइयों को जिला प्रशासन के माध्यम से तत्काल बंद किया जाए।
स्थानीय/ नगरीय निकाय एवं ग्राम पंचायतें खुले क्षेत्र में प्लास्टिक अपशिष्ट को जलाने पर प्रभावशील रूप से नियंत्रण करेंगी।
अपशिष्ट प्लास्टिक नियम २०१६ के प्रावधानों का उल्लंघन पाए जाने पर पांच वर्ष का कारावास या फिर एक लाख रुपए का जुर्माना या दोनों कार्रवाई का प्रावधान है।
हर हाल में करने होंगे ये तीन काम विकल्प के तौर पर कपड़ा व कागज के थैले बाजार में उपलब्ध कराने होंगे।
लोग पॉलीथिन का उपयोग न करें, इसको लेकर जागरुकता अभियान चलाना होगा। पॉलीथिन मामले में शासन-प्रशासन को सख्त रुख
अख्तियार करना होगा।
सरकार हमेशा हड़बड़ी में निर्णय लेती है। पॉलीथिन उत्पादन, भंडारण, परिवहन, विक्रय एवं उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के पहले व्यापारियों व आम जनता को पॉलीथिन का विकल्प देना होगा।
-अखिल दुबे, ऑटो पाट्र्स विक्रेता
बड़े व्यापारियों ने प्लास्टिक की जगह कपड़े के कैरी बैग रखना शुरू कर दिया, लेकिन इसका असर आम लोगों पर पड़ रहा है। सरकार को इसमें पहल करनी चाहिए ताकि पॉलीथिन पर प्रतिबंध लग सके।
-संतोष जैन, कपड़ा व्यापारी

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