गिटार के प्रति बच्चों में क्रेज

गिटार के प्रति बच्चों में क्रेज
Crazy in children's guitar

Jyoti Gupta | Publish: May, 14 2019 12:41:13 PM (IST) Satna, Satna, Madhya Pradesh, India

संगीत के लिए क्रेजी यंगस्टर्स गिटार सीखने में दिखा रहे इंटरेस्ट

सतना. संगीत किसी के भी जीवन को खुशियों से भर सकता है। आजकल का जमाना तो मल्टी टैलेंटेड होने का है। संगीत का बढ़ता दायरा, इसकी बढ़ती लोकप्रियता ने युवाओं के साथ बच्चों को भी अपना दीवाना बना लिया है। क्रेज बढ़ रहा गिटार वादन का। पैरेंट्स भी चाहते हैं कि उनके बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी आगे रहें। स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां हो गईं। जगह-जगह समर कैम्प भी शुरू हो गए हैं। एेसे में शहर का हर बच्चा कुछ न कुछ नया सीख रहा है। वाद्य यंत्रों में अभी गिटार का चलन सबसे ज्यादा है। छह से सात साल के उम्र से बच्चे गिटार सीखना पसंद कर रहे हैं। पढ़ाई के साथ को-करीकुलर एक्टिविटीज पर भी खासा ध्यान दिया जा रहा है।

छह से 14 साल के बच्चों में क्रेज
शहर के बच्चों में वाद्ययंत्रों में इधर कुछ वर्षों से गिटार की ओर रुझान बढ़ा हुआ है। छह साल से 14 साल के बच्चे अलग-अलग संस्थानों में गिटार का प्रशिक्षण लेने पहुंच रहे हैं। गिटार के प्रति एेसा नशा है कि एक धुन पूरी तरह से कंपलीट नहीं हो पाती फिर भी बच्चे गिटार बजाना शुरू कर देते हैं। बॉयज ही नहीं गल्र्स में भी गिटार के प्रति बेहद लगाव देखते बन रहा है।

शौक को बनाना चाहते हैं प्रोफेशन

शहर के कुछ बच्चों से बात करने में पता चला कि गिटार सीखना उनका शौक है लेकिन गिटार को वे प्रोफेशन बनाना चाहते हैं। कुछ का कहना है कि गिटार सीखकर वह खुद का बैंड तैयार करेंगे। कुछ का कहना है कि वह बड़े सिंगर के लिए गिटार बजाना चाहते हैं। कुछ ने बताया कि गिटार बजाना एक पैशन भी है। जब वह किसी जगह, स्कूल या फंक्शन में गिटार बजाते हैं तो उनकी लोकप्रियता बढ़ जाती है। बहुत अच्छे अच्छे कमेंट भी मिलते हैं।

एकॉस्टिक गिटार सबसे ज्यादा लोकप्रिय
बाजार में कई तरह के गिटार उपलब्ध हैं। इसमें स्पेनिश गिटार में एकॉस्टिक सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। इसके साथ-साथ इलेक्ट्रिक गिटार भी लोगों को अपने संगीत से आकर्षित कर रहा है। एकॉस्टिक गिटार का क्रेज अभी बहुत ज्यादा है। इसकी वजह यह है कि इसकी धुन मधुर व धीमी होती है, जो कानों को सुनने में भी अच्छी लगती है। यह लकड़ी का बना होता है। कीमत भी लकड़ी व स्ट्रिंग के गुणवत्ता पर निर्भर करती है। इसे किसी भी ऊर्जा के स्त्रोत से जोडऩे की जरूरत नहीं होती और वहीं इलेक्ट्रिक गिटार को बिजली या बैटरी की जरूरत होती है बजाने के लिए और इसे एम्पलीफ ायर से भी जोड़ा जाता है। एकॉस्टिक गिटार के साथ ऐसा नहीं है।


मैं गिटार बजाना सिखाता हंू। आसपास भी कई म्यूजिक क्लास हैं। छह साल से लेकर क्लास दसवीं के बच्चे भी गिटार सीखने के लिए आते हैं। शुरुआत के लिए बच्चों को एकॉस्टिक ही सिखाता हूं। छह से सात महीने के बाद जब वो सीख जाते हैं उसके बाद इलेक्ट्रिक गिटार सिखाता हूं।

अवनीश नेमा, गिटार वादक एक्सपर्ट, भरहुत नगर

मुझे गिटार सीखना बहुत पसंद है। एक साल से गिटार चलाने की प्रैक्टिस कर रहा हंू। आगे चलकर मैं इसे प्रोफेशन बना लूंगा।
जतिन चौरसिया

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