सतना में भी फ्लाइओवर से वाराणसी जैसे हादसे की आशंका, यहां भी सुरक्षा मापदंड दरकिनार

सेतु निर्माण विभाग ने कहा-कलेक्टर और पुलिस के आदेश से हटा दी गई सुरक्षा बैरिकेडिंग

By: suresh mishra

Published: 16 May 2018, 10:35 AM IST

सतना। जिस तरीके से वाराणसी में निर्माणाधीन फ्लाइओवर का स्लैब गिरने से दर्जनों लोगों की जान चली गई ठीक वैसे ही हादसे की आशंका सतना फ्लाई ओवर में भी है। निर्माण कार्य के आधारभूत नियमों को दरकिनार करते हुए जिस तरह कार्यस्थल से बैरिकेडिंग हटाई गई है उससे हादसे में व्यापक जानमाल की हानि हो सकती है।

हद तो यह है कि सुरक्षा की दृष्टि से लगाई जाने वाली बैरिकेडिंग हटाने के आदेश कलेक्टर और पुलिस विभाग ने दिए हैं जिसकी पुष्टि सीएम हेल्पलाइन में सेतु निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री द्वारा दिए गए जवाब से होती है। हालांकि कलेक्टर ने ऐसे किसी आदेश से इंकार किया है।

ये है मामला
फ्लाइओवर निर्माण कार्य के जो बेसिक प्रिन्सिपल है उसमें स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि जब तक इसका निर्माण कार्य पूरा नहीं हो जाता है तब तक वर्किं ग साइट को पूरी तरह से बैरिकेडिंग से घेरा जाएगा। सुरक्षा मानदण्डों के तहत वर्किंग एरिया के चारों ओर यह सुरक्षा घेरा अनिवार्य है। नियम यह भी कहता है कि जब भी प्री कास्ट स्लैब का काम चल रहा होता है और इसका काम पूरा नहीं हो जाता है तब तक यह पूरा एरिया नो मैंस लैण्ड (मानव रहित क्षेत्र) होना चाहिए और यहां किसी भी तरह का मूवमेंट नहीं होना चाहिए।

इसके नीचे किसी भी तरह की गतिविधि नहीं

नियम बताते हैं कि जब तक ब्रिज का पूरा काम नहीं हो जाता है तब तक इसके नीचे किसी भी तरह की गतिविधि नहीं होनी चाहिए। सतना में निर्माणाधीन फ्लाइओवर पर लगाए गए सुरक्षा बैरिकेड्स हटा दिए गए। इस मामले में सीएम हेल्पलाइन में शिकायत भी की गई। जिस पर सेतु निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री ने यह जवाब दिया कि कलेक्टर और पुलिस विभाग के कहने पर यह बैरीकेड्स हटाए गए हैं।

कोई अनिवार्य नहीं है बैरिकेडिंग: ईई
इधर इस मामले में जब सेतु निर्माण विभाग ईई प्रभाकर सिंह से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि सुगम यातायात के लिये कलेक्टर और पुलिस के कहने पर बैरिकेडिंग हटाई गई है। जब उनसे नियमों पर चर्चा की गई तो कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है। ठेकेदार की चीजें सुरक्षित रखने और धूल आदि से बचने यह लगाया जाता है। जहां काम होता जाता है वहां बैरिकेडिंग हटा सकते हैं। यह कोई अनिवार्य नहीं है।

मैंने ऐसा नहीं कहा: कलेक्टर
इधर इस मामले में जब कलेक्टर मुकेश कुमार शुक्ला से बात की गई और उन्हें सीएम हेल्पलाइन में ईई सेतु निर्माण विभाग के जवाब से अवगत कराया गया तो उन्होंने इसका स्पष्ट खंडन किया और कहा कि मेरे द्वारा कभी बैरिकेडिंग हटाने नहीं कहा गया है। सुरक्षा के लिहाज से यह आवश्यक है। इसे तत्काल प्रभाव से लगवाया जाएगा। बुधवार को संबंधित विभाग और उनके अधिकारियों से बात की जाएगी। इसके लिए दोपहर 12 बजे बैठक आयोजित की गई है।

जब तक पूरा काम न हो खतरनाक है हिस्सा
इस मामले में आर्किटेक्ट छवि त्रिपाठी बताते हैं कि किसी भी निर्माण कार्य शुरू करने के पहले उस बेरीकेड्स से घेरना मूल काम है। उसे तब तक नहीं हटा सकते हैं जब तक कि काम पूरा नहीं हो जाता। फ्लाईओवर निर्माण में तो यह नियम काफी सख्त है। इसलिये सर्विस लेन का प्रावधान भी किया जाता है और उसकी राशि पहले जारी कर दी जाती है। लेकिन सेतु निर्माण विभाग ने यहां शुरू से ही जनहित को ताक पर रख सर्विस लेन नहीं बनाई।

समझौता करते हुए बेरीकेड्स हटा दिए
जब लोगों को इससे दिक्कत होने लगी तो अपनी कमी छिपाने सुरक्षा से समझौता करते हुए बेरीकेड्स हटा दिए। अगर कलेक्टर और पुलिस ने ऐसा करवाया है तो यह उनके द्वारा की जा रही जनसुरक्षा की सबसे बड़ी अनदेखी है। भगवान न करे कोई हादसा हो लेकिन ऐसा कुछ घटा तो ये सभी हत्या के आरोपी माने जाएंगे क्योंकि निर्माण के मूल सिद्धांतों के विपरीत जाकर निर्णय लिये गए हैं।

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