सेहत और पर्यावरण संरक्षण के लिए थाम लिया साइकिल का हैंडल

सेहत और पर्यावरण संरक्षण के लिए थाम लिया साइकिल का हैंडल
World Cycling Day

Jyoti Gupta | Publish: Jun, 04 2019 09:59:05 PM (IST) Satna, Satna, Madhya Pradesh, India

वर्ल्ड साइकिलिंग डे: शौक को बना लिया प्रोफेशन

सतना. याद है न बचपन वाली साइकिल की कहानी, छुप छुप बिना बताए दोस्तों के साथ बाहर निकल जाना, खुद के पा साइकिल न होने पर एक रुपए देकर किराए से साइकिल लेकर चलाना। उस दौर में साइकिल सिर्फ वीकल नहीं होते थे बल्कि इनसे बहुत सारी यादे जुड़ी होती थी। आनंद छिपा होता था और दूर दराज का सैर-सपाटा और नेचर से लगाव रहता था । पर समय बदला और साइकिल की जगह दो पाहिया, चार पाहिया वाहनों ने लिया। जिसका नतीजा यह है अब हम फिटनेस से तो दूर हो ही गए हैं, लेकिन पर्यावरण को भी बुरी तरह से प्रभावित कर रहे हैं। शुक्र है कि शहर में कुछ लोग अभी भी एेसे हैं जो साइकिल से ही ज्यादातर सफर तय करना पसंद करते हैं। कुछ साइकिल ग्रुप भी एेसे हैं जो लोगों को साइकिल की इंपॉर्टेंस बताने के लिए जागरूकता भरे कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इनमें बच्चे, युवा और ४० प्लस लोग भी शामिल हैं। आज वल्र्ड साइकिलिंग डे है यानी खुद से वादा करने का दिन कि अब नेचर सेफ्टी और फिटनेस के लिए साइकिल ही चलाना है...

फिटनेस के लिए शुरू की साइकिलिंग, अब बन गई पहचान
डॉ. मुकेश त्रिपाठी को आज कौन नहीं जानता। उनकी पहचान डाक्टरी के पेशे से तो थी ही पर अब वह फेमस साइकिलिस्ट भी बन गए हैं। डॉ. मुकेश बताते हैं कि आज से कुछ वर्ष पहले उनका वजन काफी बढ़ गया था और ब्लड प्रेशर भी हाई होने लगा। बहुत से उपाय किया पर सेहद के लिए उन्हें साइकिल ही भायी। अब उनका वजन तो कंट्रोल हो ही गया है। साथ ही वह कई साइकिल स्र्पाधाओं में भाग लेकर शहर का नाम रोशन कर रहे हैं। उनका कहना है कि साइकिल से वह फिट तो रहते हैं साथ ही वे नेचर के करीब भी हो पाते हैं। उनका कहना है कि मोटरसाइकिल और चार पाहिया वाहन से निकलने वाले धुएं से एन्वायर्नमेंट का खतरा है। एेसे में वो साइकिल चलाकर ग्रीन हाउसेस गैस और कार्बनमोनोडआक्साइड गैस के उत्र्सजन को कम कर पाते हैं। वे हर दिन 40 किलोमीटर तक साइकिलिंग करते हैं। इसके साथ ही साइकिल क्लब से जुड़ कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लेवल तक की प्रतिस्पार्धा में भाग लेते हैं।

 

फिटनेस के लिए नेचुरल शानदार एक्सरसाइज

शहर के ही वीरेंद्र सिंह रावल को साइकिलिंग से बेहद लगाव है। उनका कहना है कि साइकिलिंग एक नेचुरल शानदार एक्सरसाइज है। जिसके बाद आपको किसी और तरह की एक्सरसाइज की जरुरत नहीं है। वीरेंद्र भी लगभग छह साल से साइकिलिंग कर रहे हैं। अब वह इसे प्रोफेशन में भी शामिल कर चुके हैं। अपने वर्र्किंक के दौरान भी वे साइकिल से आना जाना पसंद करते हैं। उनका कहना है कि साइकिलिंग की वजह से वह हर दिन नेचर के बेहद करीब पहुंच जाते हैं। कोई भी टहलने जाता है तो वह एक या दो किलीमीटर तक ही शहर में वॉक कर लेता है। पर जब साइकि ***** की जाती है तो आप ४५ से ६५ मिनट के अंदर ४० किलोमीटर का सफर तय करते हैं यानी शहर के बाहर, जहां चारों तरफ हरियाली ही हरियाली होती है। अब मैं इसके बिना खुद को कंपलीट नहीं समझ सकता। घर, परिवार, शहर के लोगों को भी साइकिलिंग के लिए जागरूक करता हंू।

डेढ़ साल में घटा लिया 25 किलो वजन, तब से साइकिल का मुरीद

भरहुत नगर निवासी विवेक जगवानी बताते हैं कि उनका वजन काफी बढ़ गया था। जिम ज्वाइन किया। योगा किया। दवाइया खाई पर कोई असर नहीं हुआ। थक हार कर साइकिलिंग का सहारा लिया। जिसके बाद डेढ़ साल में २५ किलो वजन कम किया।अब साइकिल मेरी फेवरेट हो गई है। सब्जी लेने जाना हो, दुकान या फिर वॉक पर अब साइकिल का ही सहारा लेता हंू। एेसे में फिटनेस भी बरकरार है साथ ही एन्वायरमेंट को सेफ कर रहा हंू। शहर के लोगों से यही अपील कर रहा हंू कि वे भी साइकिलिंग शुरू कर दें फिर देखे इसके कितने सारे फायदे ही फायदे हैं।

बना लिया साइकिल क्लब
डॉ. मुकेश और वीरेंद्र सिंह रावल ने शहर के लोगों को फिटनेस का पाठ पढ़ाने के लिए और शहर के पर्यावरण को सुरक्षित करने के उद्देश्य से २०१५ में सतना साइकिल क्लब का गठन किया। शुरूआत में सिर्फ दस मेंबर्स थे पर चालीस के ऊपर हैं। इस क्लब द्वारा समय समय पर लोगों को जागरूक करने के लिए कई स्पार्धाएं आयोजित की जाती हैं। इनके क्लब में बच्चे, युवा और महिलाएं भी शािमल है। क्लब द्वारा 100 200 300 400 500 600 800 किलीमीटिर की प्रतिस्पर्धा आयोजित की जा चुकी है। यही नहीं ग्रुप के प्रोफेशनल साइकिलिस्ट 1450 किलीमीटर की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेकर शहर का नाम रोशन कर चुके हैं। इनका पूरा ग्रुप आज भी हर दिन सुबह सुबह एक घंटे तक साइकिलिंग करते हैं जिसमें वह 40 से 50किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। ग्रुप में शैलेंद्र नेमा, मनीष शर्मा, विवेक जानवानी, उत्तम अग्रवाल, विक्रम चौहान, अशोक अग्रवाल, आनंद वर्मा, अविनाश वर्मा, भाष्कर त्रिपाठी, बृजेश सिंह, डॉ. आशीष सिंह, जितेश सबलोक, कार्तिक हांडा, सौरभ कौशिक , अरुण विश्वकर्मा, अशोक सिंह, मनीष, जितेंद्र, संदीप, दीपेश, सौरभ पटनाहा, मनीष जायसवाल, राकेश अग्रवाल, मनीष कटारे, नीरज पांडेय, प्रदीप, बाल गोविंद, ओम प्रकाश, यश, गुरुजीत सिंह सेठ्ठी , प्रदीप शामिल हैं। तीन जून को विश्व साइकिलिंग डे है। पूरी दुनिया यह दिवस मनाएगी, लेकिन अपने शहर के साइकिलिंग क्लब के सदस्यों के मन में एक कसक है कि शहर में अलग ट्रैक कब बनेगा, जहां सभी साइकिल सवार बड़े वाहनों और ट्रैफि क के डर के बिना आराम से साइकिलिंग कर सकें।

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