जिला मुख्यालय पर छात्रसंघ चुनावों का इतिहास, 47 सालों में नहीं बदले छात्र राजनीति के मुद्दे

जिला मुख्यालय पर छात्रसंघ चुनावों का इतिहास, 47 सालों में नहीं बदले छात्र राजनीति के मुद्दे

Vijay Kumar Joliya | Publish: Aug, 14 2019 06:36:51 PM (IST) Sawai Madhopur, Sawai Madhopur, Rajasthan, India

छात्रों की समस्या व मांग के आधार पर तय होते हैं मुद्दे, लेकिन चुनाव जीतने के बाद नहीं होता इन पर कोई गौर

 

सवाईमाधोपुर. ( pg college in sawai madhopur) जिला मुख्यालय पर छात्रसंघ चुनावों का इतिहास करीब 47 साल पुराना है। 1972 में कॉलेज शुरू होने के साथ ही पहला छात्रसंघ का चुनाव लड़ा गया, लेकिन इतने सालों के बाद भी छात्र राजनीति के मुद्दे बदले नहीं है। हर बार छात्र नेता व चुनावों में अपनी किस्मत अजमाने वाले प्रत्याशी विद्यार्थियों की लंबित मांगों को ही अपने चुनाव प्रचार का जरिया बनाकर चुनाव लड़ते हैं। तब से लेकर आज तक छात्र राजनीति के इस महाकुंंभ के मुद्दों में अधिक बदलाव नहीं आया है।

इन पर हुई सुनवाई
इतने मुद्दों पर चुनाव लडऩे के बाद भी अधिकतर मुद्दे व विद्यार्थियों की समस्याएं जस की तस है। पीजी कॉलेज में केवल चार विषयों में पीजी है। वर्तमान छात्रसंघ अध्यक्ष के कार्यकाल में विद्यार्थियों का विकास शुल्क कम करने, आरओ प्लांट लगवाने व महाविद्यालय में शौचालय की सुविधा पूरी हुई है। इसके अतिरिक्त कक्षा कक्षों की कमी को देखते हुए राजनीती शास्त्र के लिए अलग भवन तैयार किया गया है। एक ऑडिटोरियम की मांग को भी पूरा किया गया है। इसके अतिरिक्त कॉलेज में ग्रीन बोर्ड व इनवर्टर की सुविधा मुहैया कराई गई है।


इन मुद्दों पर लड़ा था पिछला चुनाव

पिछली बार छात्रसंघ का चुनाव कॉलेज में व्याख्याताओं, कक्षा-कक्षों की कमी, अधिकतर विषयों में पीजी अध्ययन की सुविधा, प्रयोगशाला की कमी, कृषि फार्म की बदहाली, खेल प्रकोष्ठ के संसाधनों, सुरक्षा गार्ड की कमी, विकास शुल्क को कम करने व परिसर में शौचालय निर्माण आदि मुद्ïदों पर लड़ा गया था।


चुनाव के समय ही याद आते हैं मुद्दे, फिर गायब

छात्रसंघ नेताओं ने बताया कि पहले छात्रसंघ के अध्यक्ष वर्ष भर छात्रों व विद्यार्थियों के हितों के लिए संघर्ष करते थे, लेकिन अब यह बात नहीं रही। छात्र संघ चुनावों के नजदीक आते ही चुनाव लडऩे के इच्छुक उम्मीदवारों को विद्यार्थियों की समस्या याद आ जाती है। वे विद्यार्थियों की मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर देते हैं, लेकिन चुनाव के बाद सब समस्याओं को भूल जाते हैं।


ये रहे पीजी कॉलेज में अध्यक्ष
डॉ. अबरार अहमद 1971-72
हरफूल मीणा 1972-73
भरतसिंह राजावत 1973-74
श्रीफल मीणा 1974-75
गुलाबचन्द मीणा 1977-78
महेश शर्मा 1978-79
रामस्वरूप मीणा 1979-80
रमेश वैष्णव 1980-81
राजेश जैन 1981-82
गिर्राज जाट 1982-83
हरिसिंह मीणा 1990-91
सीताराम मीणा 1993-94
डिग्गीप्रसाद मीणा 1994-95
भरतलाल मीणा 1995-96
भागचन्द सैनी 1997-98
धर्मसिंह मीणा 1998-99
रमेश मीणा 1999-2000
रामराज चौधरी 2001-2002
मदनलाल मीणा 2002-2003
हेमराज मीणा 2003-2004
श्योराज मीणा 2005-2006
दीपक मीणा 2010-2011
केशवदेव मीणा 2011-2012
रवि मीणा 2012-2013
रजनी मीणा 2013-2014
विष्णु जाट 2014-2015
कविता मीणा 2015-2016
राधा मीणा 2016-2017
सचिन मीणा 2017-2018
दिनेश मीणा 2018-2019

  • कॉलेज में मेरे कार्यकाल में ऑडिटोरियम का निर्माण व विकास शुल्क में कमी करके विद्यार्थियों को राहत दी गई है। कई मांगों पर कोई सुनवाई नहीं हुई है।
    दिनेश मीणा, छात्रसंघ अध्यक्ष, श.रिपुदमन सिंह राजकीय पीजी कॉलेज स.मा.

  • मेरे कार्यकाल के दौरान हमने विद्यार्थियों की समस्याओं को पुरजोर तरीके से उठाया था। सुराक्षा के लिए सीसीटीवी की मांग को पूरा भी किया। शिक्षकों की कमी आदि पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
    कविता मीणा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष

  • मेरे कार्यकाल के दौरान हमने छात्रों की समस्यपाओं की मांगों को पुरजोर रूप से उठाया था। हालांकि राज्य स्तर की मांगों पर प्रशासन की ओर से कोई सुनवाई नहीं हुई।
    सचिन मीणा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष

  • कॉलेज में छात्र राजनीति छात्रों की मांगों व समस्याओं को मजबूत तरीके से उठाने के लिए आवश्यक है। हालांकि प्रशासन की उदासीनता के चलते कई मांगे पूरी नहीं हो पाती हैं।
    दीपक मीणा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष

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