चन्द्रग्रहण 31 को, भारत सहित 8 देशों में आएगा नजर

चन्द्रग्रहण 31 को, भारत सहित 8 देशों में आएगा नजर

Shubham Mittal | Publish: Jan, 14 2018 07:51:00 PM (IST) Sawai Madhopur, Rajasthan, India

चन्द्रग्रहण 31 को, भारत सहित 8 देशों में आएगा नजर

ज्योतिषियों के अनुसार ग्रहण अवधि के दौरान किया गया दान-पुण्य रहेगा फलदायी

सवाईमाधोपुर. इस साल 31 जनवरी को चन्द्रग्रहण रहेगा। यह चन्द्रग्रहण दर्शन वृषभ, कन्या, तुला और कुंभ राशि के लिए सुखद है। मां कामाक्षा ज्योतिष शोध संस्थान अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य ताराचंद शास्त्री व पण्डित कैलाश चंद तेहरिया, नगेन्द्र शर्मा ने बताया कि चन्द्रग्रहण का प्रारंभ स्पर्श काल संयम शाम 5 बजकर 21 मिनट से और मोक्ष शुद्धि काल रात 8 बजकर 14 मिनट तक होगा।

यह सर्व ग्रास खग्रास संज्ञा का प्रतीक होगा तथा चन्द्र ग्रहण पुष्य, अश्लेषा, नक्षत्र, और कर्क राशि पर चरितार्थ होगा। इन राशि वालों को ग्रहण का दर्शन नहीं करना चाहिए। वृषभ, कन्या, तुला, कुंभ, राशि के लिए दर्शन करना सुखद है। वहीं मेष , कर्क , सिंह, धनु, राशि के लिए शोक दर्शन करना योग्य नहीं है। मिथुन, वृश्चिक, मकर, मीन राशि के लिए सामान्य व मध्यम फलद होगा। शास्त्री बताते हैं कि सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्य कर्म एक लाख गुना और सूर्यग्रहण में दस लाख गुना फलदायी है।

यदि गंगाजल पास में हो तो चन्द्र ग्रहण व सूर्य ग्रहण ज्यादा फलदायी होता है। यह चन्द्र ग्रहण भारत के अलावा अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका, कोरिया, रूस आदि देशों में भी दृश्य के रूप में प्रतीत होगा।

ग्रहण में क्या करें और क्या नहीं करेंग्रहण में क्या करें और क्या नहीं करेंग्रहण में क्या करें और क्या नहीं करेंचन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के समय संयम रखकर जप ध्यान करने से कई गुना फल होता है।


श्रेष्ठ साधक उस समय उपवास पूर्वक ब्राह्मी घृत का स्पर्श करके 'ऊं नमो नारायणामÓ मंत्र का आठ हजार जाप करने के बाद ग्रहण शुद्धि होने पर उस घृृत को पी ले। ऐसा करने से वह मेधा (धारण शक्ति ), कवित्व शक्ति तथा वाक सिद्धि प्राप्त कर लेता है।


सूर्य ग्रहण में ग्रहण ४ प्रहर पूर्व और चन्द्र ग्रहण में ३ प्रहर घंटे पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। बुजुर्ग, बालक और रोगी डेढ़ प्रहर पूर्व तक खा सकते हैं। ग्रहण वैध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियां डाल दी जाती हैं। वे पदार्थ दूषित नहीं होते।


ग्रहण वेध के प्रारंभ में तिल या कुश मिश्रित जल का उपयोग भी अत्यावश्यक परिस्थितियों में ही करना चाहिए और ग्रहण शुरू होने से अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिए।
ग्रहण के समय गायों को घास,पक्षियों को अन्न, वस्त्र दान से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है। ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और पुष्प नहीं तोडऩे चाहिए। बाल तथा वस्त्र नहीं निचोडऩे चाहिए।


बिना किसी सुरक्षा उपकरण के देख सकते हैं ग्रहण
ताराचंद शास्त्री ने बताया कि विश्व में किसी सूर्य ग्रहण के विपरीत, जो कि पृथ्वी के एक अपेक्षाकृत छोटे भाग से ही दिख पाता है। चन्द्र ग्रहण को पृथ्वी के रात्रि पक्ष में किसी भी भाग से देखा जा सकता है।

चन्द्रमा की छाया की लघुता के कारण, सूर्य ग्रहण किसी भी स्थान से केवल कुछ मिनटों तक ही दिखता है। ग्रहण की अवधि कुछ घंटों की होती है। ग्रहण को सूर्य ग्रहण के विपरीत किसी भी विशेष सुरक्षा उपकरण के बिना आंखों से भी देखा जा सकता है। क्योंकि चन्द्र ग्रहण की उज्ज्वलता पूर्ण चन्द्र से भी कम होती है।

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