गत 15 माह में किशोरियों के साथ दुष्कर्म के 76 मामले दर्ज, इनको न्याय दिलाने के लिए क्यों नहीं उठती आवाज!

गत 15 माह में किशोरियों के साथ दुष्कर्म के 76 मामले दर्ज, इनको न्याय दिलाने के लिए क्यों नहीं उठती आवाज!

Shubham Mittal | Publish: Apr, 17 2018 07:25:38 PM (IST) Sawai Madhopur, Rajasthan, India

आठ मामलों की चल रही जांच, 33 मामलों में आरोपितों के खिलाफ थाने में चार्जशीट पेश

सवाईमाधोपुर. जम्मू कश्मीर के कठुआ व उत्तर प्रदेश के उन्नाव में नाबालिग बालिकाओं के साथ हुए दुष्कर्म के मामलों से देश में भूचाल आया हुआ है। महिलाओं सहित विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठन सड़क पर है। पीडि़ताओं को इंसाफ मिले। इसके लिए पुरजोर आवाज उठाई जा रही है। इधर, सवाईमाधोपुर जिले में भी गत 15 महीनों में नाबालिग किशोरियों के साथ 76 दुष्कर्म के मामले प्रकाश में आए हैं, लेकिन इन पीडि़ताओं को न्याय दिलाने के लिए किसी संगठन ने आवाज नहीं उठाई है। हालांकि पुलिस जांच में इनमें से कुछ मामले झूठे भी पाए गए हैं।


गत वर्ष 59, इस वर्ष 17 मामले दर्ज : गत वर्ष जिला पुलिस ने नाबालिगों से दुष्कर्म के 59 मामले दर्ज किए थे। पुलिस ने इनकी जांच की तो 29 मामले झूठे पाए। जबकि 28 मामलों में चालान किया। वहीं 2 मामले अभी भी पेडिंग चल रहे हैं। इसी प्रकार वर्ष 2018 की प्रथम तिमाही (1 जनवरी से 31 मार्च तक) में जिला पुलिस ने किशोरियों के साथ दुष्कर्म के 17 मामले दर्ज किए हैं। इनमें आधा दर्जन यानि 6 मामले जांच के दौरान झूठे पाए गए। इनके अलावा 5 मामलों में चालान किया गया। वहीं शेष 6 मामले अभी भी पेडिंग है, जिनकी जांच जारी है।

इसलिए बढ़ जाती है मुकद्मों की संख्या
सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी हरिसिंह नाथावत का कहना है नाबालिगों से दुष्कर्म के अधिकांश मामले झूठे पाए जाते हैं। यह मामले रजिंशवश या लेन-देन के विवाद में दर्ज कराए जाते हैं। आरोपित पक्ष दुष्कर्म के मामले से दबाव के चलते उन्हें मुंह मांगी राशि दे सकें। अधिकांश मामले आपसी सहमति से होते हैं, लेकिन परिजनों को पता लगने पर उन्हें दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई जाती है। जो मामले सही होते हैं। उनमें आरोपितों को सजा मिलती है। ऐसे मामले बहुत कम होते हैं।

होती है निंदा
स्थानीय महिला संगठनों ने बताया कि बलात्कार के मामलों में पीडि़ता की मदद के लिए हरसंभव मदद की जाती है। जरूरत पडऩे पर विरोध-प्रदर्शन भी किया जाता है। जम्मू-कश्मीर व उत्तरप्रदेश में हुई घटनाओं का भी विरोध करते हैं, लेकिन इन घटनाओं का राजनीतिक लाभ लेने के लिए राजनीतिकरण कर दिया गया है, जो गलत है।

आज निकालेंगे कैंडल मार्च
सवाईमाधोपुर. जिला महिला कांग्रेस कमेटी की ओर से कठुआ (जम्मू) एवं उन्नाव(यूपी) में बालिका के साथ दुष्कर्म की घटना के विरोध में महावीर पार्क से सुबह दस बजे जिलाध्यक्ष वंदना मीना के नेतृत्व में मौन कैंडल मार्च निकाला जाएगा।

रंजिशवश होते हैं दर्ज
जिले में किशोरियों से दुष्कर्म के अधिकांश मामले रंजिश वश झूठे दर्ज कराए जाते हैं। सही मामलों में पुलिस आरोपितों को गिरफ्तार करती है व पीडि़ता को न्याय दिलाती है। पिछले डेढ़ साल में 76 दुष्कर्म के मामलों में 35 मामले झूठे निकले हैं।
योगेन्द्र फौजदार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सवाईमाधोपुर।

दुष्कर्म आरोपितों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग
सवाईमाधोपुर. ऑल इण्डिया स्टूडेन्टस फैडरेशन ने सोमवार को सूरत, कठुआ व उन्नाव में हुई बालिका से दुष्कर्म की घटना पर रोष जताया। इस दौरान कलक्टर को ज्ञापन सौंपकर आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। ज्ञापन में बताया कि सूरत में आठ साल एवं कठुआ में 10 वर्षीय एवं उन्नाव में बीजेपी विधायक की ओर से बेटी के साथ दुष्कर्म व पिता की जेल में मौत की वारदात हुई। सभी ने बालिका के साथ हुई घटना पर रोष जताते हुए शीघ्र आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई कराने की मांग की। इस मौके पर जिला उपाध्यक्ष राजेश मीना, प्रदेश संयोजक अनिल गुणसरिया, तबस्सुम बानो आदि थे।

मानसिकता में बदलाव जरूरी
समाजशास्त्री डॉ. ओपी शर्मा ने बताया कि जनसंचार माध्यमों द्वारा महिलाओं को एक उत्पाद की तरह पेश किया जाना। वहीं गिरते नैतिक मूल्यों की वजह से महिलाओं पर बलात्कार के मामले बढ़ रहे हैं। आठ साल की बच्ची व किशोरियों से दुष्कर्म के मामले इसका ताजा उदाहरण हैं। यह एक सभ्य समाज के लिए कतई अच्छी बात नहीं है। आज जनसंचार माध्यमों में महिलाओं के प्रदर्शन को विनियमित करने, बलात्कार व छेड़छाड़ के कानूनों के तहत सख्त सजा का प्रावधान करने व भावी पीढ़ी को संस्कारित कर ऐसे मामलों पर अंकुश लगाया जा सकता है।

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