क्या फिर से ज़िंदा हो जाएंगे 28 हज़ार साल पहले लुप्त हो चुके विशालकाय ''मैमथ' !

वैज्ञानिकों ने 28 हजार साल पुराने 'मैमथ' का डीएनए खोजा, अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की टीम ने मैमथ के सेल न्यूक्लाई को चूहे के गर्भ में रख विकसित करने में पाई सफलता

धरती पर आज विचरने वाले दुनिया के सबसे बड़े जमीनी स्तनपायी जानवर हाथी के वंशज विशालकाय 'मैमथ' एक बार फिर चलते-फिरते नजर आएंगे। नए निष्कर्षों की मानें तो यह संभव है और आने वाले सालों में वैज्ञानिक इसे वास्तविक बनाने के और करीब पहुंचने का दावा कर रहे हैं। कम से कम जापान के किंडाई विश्वविद्यालय में जापानी वैज्ञानिकों के साथ शोध कर रहे विदेशी वैज्ञानिकों का तो यही कहना है। टीम ने हाल ही 28 हजार साल पुराने मैमथ के छोटे बच्चे के बालों से कोशिका केन्द्रक प्राप्त करने में सफलता पाई है।

क्या फिर से ज़िंदा हो जाएंगे 28 हज़ार साल पहले लुप्त हो चुके विशालकाय ''मैमथ' !

ब्रिटेन की विज्ञान पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध के एक लेख के अनुसार जब इस कोशिका केन्द्रक को मादा चूहों के गर्भ में रखा गया तो यह कोशिकीय विभाजन से ठीक पहले बनने वाली कोशिका में विकसित होने लगा। इससे वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि वे एक दिन मैमथ का पूरा डीएनए हासिल करने में सफल होंगे।
टीम में जापान और रूस के विश्वविद्यालयों के शोधकर्ता शामिल हैं। ये शोधकर्ता हजारों साल पहले विलुप्त हो चुके मैमथ को पुनर्जीवित करने के लिए क्लोनिंग प्रक्रिया विकसित करने की योजना पर 20 साल से काम कर रहे हैं। टीम ने 3.5 मीटर लंबे बालों वाले एक छोटे मैमथ 'यूका' के शरीर से यह सेल न्यूक्लाई प्राप्त किया था। इसे मैमथ के इस बच्चे की मांसपेशियों और त्वचा के ऊत्तकों से निकाला गया था। इसे साल 2010 में साइबेरिया के पेमाफ्रॉस्ट में कई फीट बर्फ के नीचे से निकाला गया था। जब इसकी नाभिकीय कोशिका को मादा चूहे के गर्भ में डाला जाता है तो 43 में से 5 नाभिक उस बिंदू तक विकसित होने लगते हैं जब नाभिक कोशिका विभाजन के परिणामस्वरूप दो भागों में विभाजित हो जाता है। इसी नाभिकीय कोशिका में किसी भी जीव का डीएनए मौजूद होता है। इसे blueprint भी कहा जा सकता है जिसकी सहायता से किसी भी जीव को दोबारा बनाया जा सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस मैमथ का डीएनए बहुत लंबे समय तक बर्फ में दबे रहने के कारण नष्ट हो गया। वैज्ञानिकों ने इसी डीएनए को दोबारा बनाने में आंशिक सफलता हासिल की है।

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टीम के सदस्य और किंडाई विश्वविद्यालय में जीव विज्ञान के प्राध्यापक काई मियामोटो ने बताया कि यूका के शरीर में मौजूद सेल न्यूक्लाई (डीएनए का प्रारंभिक चरण) हमारी उम्मीद से कहीं ज्यादा नष्ट हो चुके थे। लेकिन इस सफलता ने हमारी उम्मीदें फिर से जगा दी हैं। वहीं यामानाशी विश्वविद्यालय के रिप्रोडक्टिव बायोलॉजी के प्रोफेसर टेरुहिको वाकायामा का कहना है कि यह एक छोटा कदम है उस बड़ी सफलता की ओर जब हम विलुप्त हो चुकी प्रजातियों को फिर से जीवित कर सकेंगे।

क्या फिर से ज़िंदा हो जाएंगे 28 हज़ार साल पहले लुप्त हो चुके विशालकाय ''मैमथ' !
Mohmad Imran
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