पांच से छह किमी से परिवहन करना पड़ रहा पेयजल

Yogendra Sen

Publish: Mar, 14 2018 12:05:38 PM (IST)

Sehore, Madhya Pradesh, India
पांच से छह किमी से परिवहन करना पड़ रहा पेयजल

पार्वती नदी किनारे के गांवों में भी भारी जल संकट, कई लोगों ने खेतों पर बने मकानों में किया पलायन, हैंडपंपों और जलस्त्रोतों में अभी से जलस्तर गया नीचे.

सीहोर. जल संकट की भयाभयता अभी से नजर आने लगी है। शहर के कंठों की प्यास बुझाने वाली पार्वती नदी में मार्च माह में भी तली दिखाई देने लगी है। जलसंकट के हालात अभी से इतने खराब होने लगे हैं कि पार्वती नदी के समीपस्थ गांवों में भी जलसंकट गहरा गया है। गांव के हैंडपंप, जलस्त्रोतों ने अभी से जवाब दे दिया है। इसके अनेक ग्रामीणों ने अपने खेतों को ही आसरा बना दिया हैं, जो गांव में निवास कर रहे हैं वह पांच से छह किमी दूर से खेतों पर बने जलस्त्रोतों से पानी परिवहन कर गांव में ला रहे हैं।

इस साल अल्प बारिश के चलते जलसंकट ने तेजी से अपने पैर पसारना शुरू कर दिया है। जलस्त्रोतों ने तेजी से पाताल नापना शुरू कर दिया है। शहर के लिए जीवन दायिनी और लोगों के कंठ की प्यास बुझाने वाली पार्वती नदी में अभी से तली नजर आ गई है। जल संकट के हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता हैकि पार्वती नदी पर बने रेलवे पुल के नीचे पानी पूरी तरह से गायब हो गया है। इसी तरह पार्वती नदी में बने आधा दर्जन स्टाफ डेम भी पूरी तरह से सूख चुके हैं।पार्वती ेमें पानी नहीं होने के कारण अनेक लोगों ने नदी का सीना चीरते हुए इसके अंदर से निकलना शुरू कर दिया है।

नदी किनारे वाले गांवों में भी अभी से बना जलसंकट
सीहोर जिले और शाजापुर जिले को पार्वती नदी जोड़ती है। नदी किनारे सीहोर जिले में कपूरी, मनाखेड़ा, मूड़ला, कराडिय़ा, गोलूखेड़ी सहित एक दर्जन से अधिक गांव लगे हंै। इसी तरह पार्वती नदी के दूसरी तरफ शाजापुर जिले के जनखेड़ी, खजुरी, पार्वती नगर, देवली, बावडिया, सगरामपुरा, नांदनी गांव लगते हैं। सीहोर सहित पार्वती नदी के नजदीकी गांवों की प्यास नदी से शांत होती है, लेकिन अल्प बारिश और जिम्मेदारों की लापरवाही से पानी चोरों ने पार्वती नदी के पानी को भी सूखा दिया है।

नदी दूर-दूर तक खाली नजर आ रही है। नदी किनारे की बसाहट भी जल संकट का सामना कर रही है। आसपास का भू-जल पाताल नाप रहा है। पेयजल व्यवस्था को लेकर ग्रामीण सुबह शाम बैलगाड़ी और अन्य संसाधनों से पांच से छह किलो मीटर से अधिक की दूरी से व्यवस्था करने मजबूर है। कई ग्रामीणों ने तो जल संकट के चलते गांव से पलायन कर खेतों पर बने मकानों पर रहने चले गए हैं।

बैलगाड़ी और अन्य साधनों से कर रहे पेयजल परिवहन
नदी में पानी नहीं होने के कारण अनेक गांवों में गंभीर पेयजल संकट बन गया है। ग्रामीण पांच से से अधिक दूरी पर स्थित खेत खलिहानों से बैलगाड़ी व अन्य संसाधनों पीने के पानी की व्यवस्था कर रहे है। पार्वती गांव के संतोष प्रजापति ने बताया जब नदी में पर्याप्त पानी था, उस समय अवैध रूप से मोटरें डालकर नदी को खाली कर दिया गया।

पार्वती के ही प्रेम नारायण शर्मा का कहना है कि नदी का भूजल स्तर के साथ आसपास के जल स्त्रोतों का पानी भी पाताल में चला गया है। नलजल योजना भी महीनों से बंद पड़ी है। गांव के कई लोग अभी से शुरू हुए जलसंकट के कारण दूर दराज खेतों पर रहने को मजबूर है। गांव के लोग पांच से छह किमी दूर खेतों से पानी ला रहे हैं।

मूड़ला गांव के चंदर मालवीय का कहना हैकि पानी की कमी के चलते गांव के अनेक लोगों ने खेतों में निवास करना शुरू कर दिया है।खेतों पर बने जलस्त्रोतों में अभी अच्छा पानी है, लेकिन गांव के हैंडपंप, कुएं आदि में पानी की कमी है। अनेक ने तो पानी देना ही छोड़ दिया है।

पार्वती नदी की खारपा डाल में एक सप्ताह का पानी
शहर में पार्वती नदी के अलावा जमोनिया और भगवानपुरा तालाब से जलापूर्ति की जाती है। पार्वती नदी की खारपा डाल में भी मुश्किल से एक सप्ताह का पानी बचा है। वहीं भगवानपुरा और जमोनिया में भी १५ मई तक का पानी बताया जा रहा है।नपा के अनुसार १५ मई के बाद जलस्त्रोतों और ट्यूबवेलों की सहायता से शहर में जलापूर्ति की जाएगी।

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