मौसम बदलने से आमजन को हुई परेशानी, अंधेरे में काटनी पड़ी रात

मौसम बदलने से आमजन को हुई परेशानी, अंधेरे में काटनी पड़ी रात

By: सुनील शर्मा

Updated: 04 Jun 2018, 01:09 PM IST

सीहोर/आष्टा। प्री मानूसन की पहली बारिश दस्तक के साथ चली हवा आंधी ने बिजली कंपनी के मैंटनेंस की पोल खोलकर रख दी है। कई जगह खंभे क्षतिग्रस्त हो गए तो कही तार टूटकर गिर गए। इससे नगर में चार घंटे तो एक दर्जन से अधिक गांवों में रातभर ब्लैक आउट रहा। जिससे आमजन को परेशानी उठाना पड़ी। कई जगह लोगों के मकान के ऊपर लगे चद्दर आदि उडऩे के भी समाचार हैं। एक दिन में ही कंपनी को करीब ढाई लाख से अधिक का नुकसान हुआ है।

पिछले दिनों केरल में मानूसन दस्तक देने के बाद प्रदेश में प्री मानूसन की शुरूआत हो गई है। सीहोर जिले में भी इसकी झलक शनिवार को दिख गई। जब अचानक मौसम में आए बदलाव के बाद शाम चार बजे के करीब आसमान से कई जगह बारिश बरसने लगी थी। कुछ देर बरसने के बाद यह थम गई थी। आष्टा ब्लॉक में भी शाम के समय बारिश बरसने के बाद रात १० बजे के करीब फिर कई जगह करीब १० मिनट से ज्यादा तक तेज बारिश हुई थी। बारिश के साथ शुरू हुई हवा आंधी के बाद बिजली चली गई। बिजली जाने के बाद आष्टा में करीब चार घंटे बाद बिजली आई। जबकि एक दर्जन गांव अंधेरे में डूबे रहे। लोग बिजली आने का इंतजार करते रहे, जब काफी देर तक नहीं आई तो उनको बिना कूलर, पंखे के ही रात काटना पड़ी।

इन क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त हुई बिजली खंभे
हवा आंधी से हकीमाबाद, खातचरोद, मेहतवाड़ा, सिद्दीकगंज आदि फीडर से लगे गांवों में करीब १०० से ज्यादा सीमेंट बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हो गए। जबकि मालीखेड़ी सहित अन्य जगह खंभे से तार टूटकर नीचे गिर गए थे। बिजली कंपनी के अफसरों की माने तो इस हवा आंधी से करीब ढाई लाख से अधिक का नुकसान हुआ है। रविवार को दिनभर बिजली सुधार का काम चला। इसके बाद ही कई गांवों में बिजली आ सकी। इस बीच लोगों को पानी की समस्या से भी जूझना पड़ा। इधर-उधर से पानी लाकर काम चलाना पड़ा। मालीखेड़ी, दुपाडिय़ा, मूंदीखेड़ी, हकीमाबाद आदि में बिजली गुल रही। इसी तरह से कुछ एक जगह मकानों पर लगे चद्दर आदि भी उड़ गए। मैना के इमली जोड़ पर गुमठी पर रखे चद्दर उड़ गए। इससे लोगों को छोटा मोटा नुकसान के समाचार हैं।

तो आगे बनेंगे दिक्कत
वर्षो पहले गांवों में बिजली बहाल करने खंभे गाड़े थे। उनमें से अधिकांश की हालत खराब हो चुकी है। यह खंभे आड़े टेड़े होने से उन पर लगे तार जमीन पर आने आबरू हो रहे हैं। थोड़ी बहुत हवा चली कि तार टूटकर गिर भी जाती हैं। इनकी चपेट में आने से कई मवेशियों की जान भी चली गई है। व्यवस्था सुधारने फीडर सेपरेशन के तहत गांवों में काम कराया जा रहा है। इसका श्रीगणेश ऐसी घड़ी में हुआ कि यह कछुआ गति से बाइक की रफ्तार पकड़ ही नहीं पा रहा है।

कई महीने बीतने के बाद भी अब तक कुछ एक गांवों में ही नए खंभे लगाकर उन पर केबलीकरण हुआ है। शेष गांवों में पहले जैसे ही हाल बने हुए हैं। खास बात यह है कि जर्जर खंभों पर लगे तारों की समय पर मरम्मत भी नहीं की जाती है। बावजूद इनमें करंट दौड़ाया जा रहा है। अब बारिश का मौसम शुरू हो गया है। कुछ दिन बाद तेज बारिश होगी, इस दौरान यह फिर से बिजली कंपनी और आमजन के लिए मुसीबत का कारण बनेंगे।

क्षतिग्रस्त हुए खंभे
हवा आंधी और बारिश से करीब सौ से ज्यादा खंभे क्षतिग्रस्त हुए हैं। जिनको बदला जा रहा है। इसमें करीब ढाई लाख का नुकसान हुआ है। बिजली व्यवस्था को लेकर कंपनी लगी हुई है। जिससे कि लोगों को दिक्कत नहीं उठाना पड़े।
धर्मेंद्र कौशिक, डीई बिजली कंपनी आष्टा

सुनील शर्मा
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