खुले बिक रहे पेय पदार्थों की जांच, कार्रवाई के लिए उपभोक्ता कांग्रेस आई सामने

खुले बिक रहे पेय पदार्थों की जांच, कार्रवाई के लिए उपभोक्ता कांग्रेस आई सामने

Sunil Vandewar | Publish: May, 08 2018 12:41:21 PM (IST) Seoni, Madhya Pradesh, India

जिला उपभोक्ता कांग्रेस ने कहा नागरिक भी रहे सतर्क

सिवनी. जिला उपभोक्ता कांग्रेस ने दूध से तैयार पेय पदार्थो एवं मिठाईयों में मिलावट की लगातार मिल रही शिकायतों पर जिला प्रशासन के मुखिया कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड से आग्रह किया गया है कि वे खाद्य एवं औषधि विभाग एवं नगर पालिका को निर्देशित करें कि दूध में अपमिश्रण रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
उपभोक्ता कांग्रेस के अध्यक्ष डीबी नायर ने कहा कि दूध हमारे पौष्टिक आहार का अनिवार्य हिस्सा है। दूध मानव जीवन के लिये तभी तक लाभकारी है, जब तक अपमिश्रित ना किया जाए। अपमिश्रित दूध से जहां लीवर पर सीधा प्रभाव पड़ता है, वहीं कृत्रिम और मिलावटी दूध खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ाता है, जिससे हृदय रोग का खतरा बना रहता है। वर्तमान में मांग अनुरूप दूध का उत्पादन नहीं हो रहा है। उपभोक्ता की मांग पूरी करने के लिये इस ग्रीष्म ऋ तु में दूध से तैयार किए जाने वाले पेय पदार्थ लस्सी, विभिन्न प्रकार के मिल्क शेक एवं आइस्क्रीम आदि में मिलावट आम बात हो गई है।
प्रांतीय सचिव रमेंद्र श्रीवास्तव, सचिव जीके वर्मा ने कहा है कि ग्रीष्म ऋ तु के आते ही बाजारों में दूध से बने हुए पेय पदार्थों की दुकानें सज गई हैं। जिले में ही नहीं अब प्रदेश एवं आसपास के प्रदेश में भी गर्मी में दूध की जितनी खपत बढ़ जाती है उसकी तुलना में उत्पादन 50 पचास प्रतिशत भी नहीं होता है। मांग और उत्पादन में यह अंतर ही अपिमश्रण की स्थिति उत्पन्न करता है।
जिला उपभोक्ता कांग्रेस द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि अपमिश्रण के कारण ही मानव स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ता है। यही कारण है कि न केवल जिला चिकित्सालय में वरन प्रायवेट नर्सिंग होमों और क्लीनिकों में मरीजों की लगातार बढ़ रही संख्या है।
संगठन के पदाधिकारियों ने बताया है कि अपमिश्रण के हालात यह हो गये हैं कि दूध से बनने वाले दही को गाढ़ा करने के लिये ब्लाटिंग पेपर मिलाया जा रहा है, वहीं मिल्क शेक को गाढा करने के लिये स्टार्च का उपयोग किया जा रहा है।
संगठन ने बताया है कि बाजार में वर्तमान में पके हुए आम की कीमत 80 रूपये से 100 रूपये प्रति किलो के बीच है। इसके बावजूद मेगों शेक मात्र 10 और 20 रूपये ग्लास बिक रहा है। इसका प्रमुख कारण मेंगो शेक के नाम पर केमिकल और सेंट धड़ल्ले से बेचा जाकर मानव स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। यही हाल प्राय: सभी फलों के जूस का है। उपभोक्ता कांग्रेस ने कहा है कि व्यापारी तो अपना काम कर रहे हैं किंतुु अपने स्वास्थ्य की चिंता उपभोक्ता को ही करनी है। संगठन ने उपभोक्ताओं से कहा है कि वे लालच के चक्कर में झूठे विज्ञापन और कम रेट पर आकर्षित न हों और अपने आप को स्वस्थ्य रखें। संगठन ने व्यापारियों से भी कहा है कि वे प्रतिस्पर्धा के चक्कर में मानव स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न करें।

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