सुबह से शाम तक हुई बारिश, किसानों के खिले चेहरें, फसलों को मिली संजीवनी

विशषज्ञों ने दिया फसलों को लेकर किसानों को सलाह

By: akhilesh thakur

Published: 22 Jul 2021, 10:07 AM IST

सिवनी. जिले में सुबह से ही आसमान पर काले बादल छाए रहे। रूक-रूक कर रिमझिम बारिश होती रही। इसके पूर्व मंगलवार को दोपहर में हल्की बारिश हुई। इस बारिश के साथ ही किसानों के मुरझाए चेहरें पर हल्की रौनक लौटी है। किसानों का कहना है कि यह बारिश पर्याप्त नहीं है, लेकिन इससे फसलों को संजीवनी मिली है। खेतों में सूख रहे फसलों में अब जान आई है। हालांकि ऐसी ही बारिश यदि दो-तीन दिन और बनी रहेगी तब फसल बेहतर हो पाएंगे। उधर बारिश शुरू होते ही कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञों ने सलाह देने शुरू कर दिए हैं।


मक्का फसल पर दिख रहे फॉल आर्मीवर्म कीट, किसान करें दवाओं का छिड़काव
कृषि विभाग द्वारा मक्का उत्पादक किसानों को सलाह देते हुए बताया कि मक्का फसल में फॉल आर्मीवर्म कीट का प्रकोप देखा जा रहा है। कृषक मक्का की फसल का अवलोकन करें यदि पत्तियों पर कटे-फटे गोल से आयताकार आकार के छिद्र बने दिखाई देते है तो नियंत्रण हेतु पांच प्रतिशत नीम बीज कर्नल सत या एजाडिरेक्टीन 1500 पीपीएम का 5 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। जिन खेतों मे संक्रमण 10 प्रतिशत से अधिक होता है तो बड़े लार्वा के लिए अनुशासित रासायनिक कीटनाशकों का छिड़काव करना चाहिए। इसमें स्पाइनटोरम की 11.7 प्रतिशत एससी 0.5 मिली या क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोएल 18.5 एससी 0.4 मिली या थियोमेथोक्जाम 12.6 प्रतिशत लेम्बड़ा साइहेलोथ्रीन 9.5 प्रतिशत जेडसी का 0.25 मिली या इमामेक्टिन बेन्जोएट पांच प्रतिशत एसजी का 0.6 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।


सोयाबीन फसल को सूखने से बचाने निराई, गुड़ाई, डोरा व कुल्पा चलाएं
कृषि विभाग द्वारा सोयाबीन उत्पादक किसानों को सलाह देते हुए बताया कि सोयाबीन फसल के कई क्षेत्रों में बोनी के बाद विगत कुछ दिनों से वर्षा के अभाव में सोयाबीन की फसल प्रभावित हुई है। ऐसी स्थिति में फसल को सूखे से बचाने के लिए सलाह है कि निराई, गुड़ाई, डोरा, कुल्पा चलाएं या पुरानी फसल के अवषेषों गेहूं-चना का भूसा 2.5 टन प्रति हेक्टेयर की दर से पलवार लगाएं। सूखे की स्थिति में लोह तत्व की अनुपलब्धता के कारण सोयाबीन की उपरी पत्तियां पीली होने (पत्तियों की शिराएं हरी रहते हुए पीलापन) देखने में आया है। जो कि पर्याप्त वर्षा होने पर फसल का पीलापन अपने आप समाप्त हो जाएगा।
वर्तमान में लगी सोयाबीन की फसल में पीला मोजेक वायरस एवं सेमीलूपर कीट का प्रकोप देखा जा रहा है। सलाह है कि पीला मोजेक वायरस के नियंत्रण हेतु तत्काल रोगग्रस्त पौधों को खेत से उखाड़कर अलग करें तथा इन रोगों को फैलाने वाले वाहक जैसे सफेद मक्खी, एफिड की रोकथाम हेतु पूर्व मिश्रित कीटनाशक थायोमेथोक्जाम लेम्बडासायलोहेथ्रीन 125 मिली प्रति हेक्टेयर या वीटासायहेलोथ्रीनइमीडाक्लोप्रीड 350 मिली प्रति हेक्टेयर का छिडकाव करें। इनके छिड़काव से तना मक्खी का भी नियंत्रण किया जा सकता है। सोयाबीन फसल में खरपतवार नियंत्रण हेतु नमी की अवस्था में बुआई के 15-20 दिन के अंदर सोडियम एसीफ्लोरफेन क्लोडीनोफॉप प्रोपारगिल का एक लीटर या इमाझेथापायर ़ इमेजामॉक्स का 100 ग्राम इमेझेथापायर 10 एसएल का एक लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से 400-500 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।


धान की रोपाई करते समय पंक्ति से पंक्ति की दूरी रखे २० सेमी
कृषि विभाग द्वारा धान उत्पादक किसानों को सलाह देते हुए बताया गया कि धान की नर्सरी यदि 20-25 दिन की हो गई है तो तैयार खेतों में धान की रोपाई शुरू करें। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 20 सेमी तथा पौध से पौध की दूरी 20 सेमी रखें। धान की पौधशाला में यदि पौधों का रंग पीला पड़ रहा है तो इसमें लोह तत्व की कमी हो सकती है। पौधों में यदि ऊपरी पत्तियां पीली और नीचे की हरी हो तो यह लोह तत्व की कमी को दर्शाता है। नियंत्रण के लिए फैरस सल्फेट का 0.5 प्रतिशत चूना 0.25 प्रतिशत घोल का छिड़काव आसमान साफ होने पर करें। धान की फसल में बुआई के 20 दिन के अंदर या खरपतबार की 2 से 3 पत्ति की अवस्था पर बिसपायरीबेक सोडियम 10 प्रतिशत एससी का 100 मिली क्लोरीमिरान मेटसल्फ्यूरान का 8 ग्राम को 125 लीटर पानी में घोल बनाकर नमी की अवस्था में छिड़काव करें। खरीफ की सभी फसलों मे देशी खाद सड़ी गली गोबर की खाद या कम्पोस्ट का अधिक से अधिक प्रयोग करें ताकि भूमि की जल धारण क्षमता और पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ सकें। धान फसल में रोपाई के पूर्व गालमिज के नियंत्रण के लिए धान की रोपा को क्लोरोपायरीफास का तीन मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर रोपा को 8 से 10 घंटे तक डुबाकर फिर लगाए। खड़े खेत में नियंत्रण हेतु फिप्रोनिल 0.3 प्रतिशत का 10 किलोग्राम या कार्टप हाइड्रोक्लोराइड का 10 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से रोपाई के 3 सप्ताह बाद खेत में डालें। धान की खड़ी फसल में रोगों के नियंत्रण एवं फसल की बढ़वार हेतु स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस एक लीटर को 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।


दलहन फसलों हेतु सलाह :
अरहर, मूंग एवं उड़द की फसल में बुआई के 15-20 दिन के अंदर इमेजाथापायर का एक लीटर दवा प्रति हेक्टेयर की दर से 350-400 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

यूरिया का विकल्प
वर्तमान में लगी मक्का एवं धान की फसल में बुआई के 25-30 दिन बाद यूरिया के विकल्प के रूप में नैनो यूरिया का 500 मिली या एनपीके 19:19:19 का 1.5 किग्रा प्रति एकड़ की दर से 120 से 150 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।


जिले में अब तक 309.3 मिमी औसत वर्षा दर्ज
कार्यालय भू-अभिलेख के अनुसार एक जून से 21 जुलाई तक जिले के आठों विकासखंडों में 309.3 मिमी औसत वर्षा दर्ज हुई है। सिवनी में 399.6 मिमी, कुरई में 326.0 मिमी, बरघाट में 440.7 मिमी, केवलारी में 323.2 मिमी। छपारा में 244.9 मिमी, लखनादौन में 254.9 मिमी, धनौरा में 235.1 मिमी, घंसौर में 250.0 मिमी वर्षा दर्ज हुई है। इस वर्ष कुल 2474.4 मिमी वर्षा दर्ज हुई हैं, जो गत वर्ष इस अवधि में दर्ज की गई कुल 3839.9 मिमी वर्षा से 1365.5 मिमी कम हैं।

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