कलेक्टर, डॉक्टर, वकील स्कूलों में लेंगे क्लास

कलेक्टर, डॉक्टर, वकील स्कूलों में लेंगे क्लास

Sunil Vandewar | Publish: Aug, 03 2018 11:56:12 AM (IST) Seoni, Madhya Pradesh, India

आओ एक बारे फिर स्कूल चलें हम, बच्चों संग मिल-बांचें हम

सिवनी. विगत शैक्षणिक सत्रों की तरह इस वर्ष भी जिले की समस्त शासकीय प्राथमिक व माध्यमिक शालाओं में मिल-बांचे मध्यप्रदेश कार्यक्रम का आयोजन 17 अगस्त को होना है। मिल-बॉचें मध्यप्रदेश कार्यक्रम अंतर्गत शाला विकास एवं गुणवत्तायुक्त शिक्षा के लिए समुदाय की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करना है।
डीपीसी जीएस बघेल ने बताया कि इस कार्यक्रम के लिए 5 अगस्त तक अपना पंजीयन बेवसाइट के माध्यम से कराया जा सकता है। कार्यक्रम के लिए इक्छुक वालिन्टियर को 2 श्रेणियों में विभाजित किया गया है, पूर्व से पंजीकृत वालिन्टियर एवं नवीन वालिन्टियर। वालिन्टियर शाला की सह शैक्षिक गतिविधियों में सहयोग करने के लिए शाला पर एक बार जाना चाहता है, अथवा शैक्षिणिक सत्र के दौरान बालसभा दिवस पर एक से अधिक बार जाना चाहता है, का विकल्प बेवसाइट पर दर्ज कराना होगा।
शाला पर शैक्षणिक सत्र के दौरान बालसभा दिवस पर एक से अधिक बार जाने की सहमति की स्थिति पर स्वंय के वेरीफिकेशन के लिए आईडी जैसे आधारकार्ड, वोटरआइडी, ड्रायविंग लाइसेंस का चयन करना होगा। प्रत्येक शनिवार को बालसभा का आयोजन होता है इसलिए एक से अधिक बार शाला में जाने वाले इक्छुक वालिन्टियर शनिवार को मध्यान्ह भोजन उपरान्त शाला में उपस्थित हो सकेंगे।
डीपीसी ने कहा कि वालिन्टियर द्वारा चयनित शाला में सह-शैक्षिक गतिविधियों में सहयोग करने से संबंधित फीडवेक को बेवसाइट पर भी दर्ज करना होगा। कार्यक्रम के फोटोग्राफ व विडियो अथवा विशेष प्रसंग आदि बेवसाइट पर अपलोड किए जा सकते है। शासकीय शालाओं से पढ़े पूर्व छात्र-छात्राओं को कार्यक्रम अंतर्गत पंजीयन विशेष रूप से करना है। वालिन्टिर यदि चयनित शासकीय शाला में उपहार देना चाहते है, तो शाला की आवश्यकता अनुसार उपहार का चयन कर सकते है। उपहार के रूप में ज्ञानवर्धक, मनोरंजक एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी पुस्तकें उपहार स्वरूप प्रदान कर सकते हैं।
कार्यक्रम में बच्चों को कहानी सुनाकर उनसे रूचिकर प्रश्न, सामुहिक परिचर्चा, संवाद कर उन्हें पढऩे की कला से परिचित करा सकते हैं। साप्ताहिक बालसभा के दौरान सांस्कृतिक, साहित्यिक, खेल-कूद, लोककला एवं जीवन कौशल संबंधी सह-शैक्षिक गतिविधियों का संचालन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त केरियर गाइडेंस, कहानी एवं लेख पढऩे, बच्चों को रचनात्मक लेखन करने, चित्रकारी, सार्वजनिक बोलचाल का कौशल बढाने, नृत्य एवं संगीत आदि में भी सहयोग कर सकते हैं।
डीपीसी ने जिला प्रशासन जिले के समस्त शिक्षाविदों, अधिकारियों, कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों एवं समाज के सभी वुद्धिजीवी वर्ग से आग्रह कर कहा है कि इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक अपना पंजीयन कराएं एवं मिल-बांचे मध्यप्रदेश कार्यक्रम में सभी लोग भागीदार बने। बच्चों में किताबे पढऩे की ललक जगाए, कुछ खेलें-कुछ सिखाएं, उनके सम्रग विकास में सहभागी बन जाए।

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