पहले जंगली हाथियों का उत्पात, अब गांवों की ओर बाघों का रुख, टेरिटरी छोड़ घूम रहे बाहर

एक माह में बांधवगढ़ सीमा में तीन बड़ी घटनाएं: मानव के साथ संघर्ष रोकना चुनौती

By: Ramashankar mishra

Published: 23 Oct 2020, 12:31 PM IST

शहडोल. बाघ और वन्यजीवों के लगातार बढ़ते कुनबे के बीच बांधवगढ़ का ग्रास लैंड कम पड़ रहा है। बांधवगढ़ नेशनल पार्क की सीमा में भले ही बढ़ोत्तरी नहीं हुई लेकिन यहां वन्यजीवों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। हालात यह है कि यह वन्यजीव जंगल की सीमा छोड़ अब रिहायसी क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे है। बाघ लगातार अपनी टेरिटरी से बाहर जा रहे हैं। जिसके चलते ग्रामीणों के साथ ही वन्यजीवों को भी लगातार खतरा बना हुआ है। एक ओर जहां शिकार की घटनाएं बढऩे की आशंका है। वहीं दूसरी ओर मानव और वन्यजीवों के बीच द्वंद की घटनाएं भी बढ़ेंगी। वन्यजीवों के लगातार ग्रामीण अंचलो की ओर रुख ने पार्क प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी है। प्रबंधन इनकी चौकसी भी कर पाने में असफल साबित हो रहा है। पिछले एक माह में भीतर तीन बड़ी घटनाओं ने पार्क प्रबंधन की खामियों को भी उजागर किया है।
हाथियों का उत्पात, प्रबंधन और ग्रामीण परेशान
बांधवगढ़ नेशनल पार्क में लगभग दो वर्ष से डेरा डाले हुए जंगली हाथियों ने पार्क प्रबंधन व वन विभाग को अच्छा खासा परेशान करके रखा है। जंगली हाथियों का यह झुंड 27 सितम्बर को जिला मुख्यालय में प्रवेश कर गया था। जहां दो दिन तक मुख्यालय की सीमा से लगे क्षेत्रों में किसानों की फसल को नुकसान पहुंचाया। वहीं एक सप्ताह पूर्व पतौर वन परिक्षेत्र अंतर्गत 13-14 अक्टूबर को दशरथ तलैया के समीप बांधवगढ़ नेशनल पार्क के कैम्प में तोड़-फोड़ कर लाखों का नुकसान पहुंचाया है। क्षेत्र के किसानों की फसलों को रौंद रहे है।
जिनकी निगरानी करना पार्क प्रबंधन के लिए बड़ा मुश्किल हो रहा है।
जंगली हाथियों के हमले से हो चुकी है छह मौतें
संभाग में छह लोगों की मौत जंगली हाथियों के हमले में हुई है। अनूपपुर जिले में जंगली हाथियों ने इस वर्ष 4 लोगों की जान ले चुके हैं। अप्रैल में छत्तीसगढ़ के जनकपुर की जंगल सीमा लांघकर वनपरिक्षेत्र बिजुरी के जर्राटोला के सुईडांड पहुंचे हाथियों के दल ने गांव में बडही डबरा बरने नदी किनारे मछली मार रहे 45 वर्षीय अधेड़ रामचंद्र पाव को कुचल कर मार डाला था। सितम्बर माह में राजेन्द्रग्राम वनपरिक्षेत्र के पुरगा ग्राम पंचायत के तीन गांव लंघवाटोला, मझौली और नौसा में 2 अप्रैल को डिंडोरी की सीमा से नर्मदा नदी पार कर पहुंचे हाथियों के दल ने खेत में काम कर रहे तीन ग्रामीणों को कुचल कर मार डाला। ब्यौहारी से सटे सथनी गांव में एक वृद्ध को मार दिया था। हाल ही में सेहरा में किसान पर हमला कर दिया था। जिससे मौत हो गई थी। पनपथा कोर एरिया अंतर्गत ग्राम पंचायत नौगमा के ग्राम सेजहा निवासी अन्नू केवट खेत में लगी फसल की रखवाली के लिए मचान बनाकर सो रहा था तभी हाथी ने हमला कर दिया था।
सोलो और एक शावक की संदिग्ध मौत
दो शावकों की मौत के मामले के ठीक एक सप्ताह बाद 17 अक्टूबर को धमोखर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पर्यटकों के बीच सोलो नाम से जानी जाने वाली टी-42 व उसके एक शावक का शव देखा गया। जिनकी मौत की गुत्थी पार्क प्रबंधन अभी तक नहीं सुलझा पाया। बताया जा रहा है कि बाघिन और शावक का गांव की तरफ भी मूवमेंट था। पार्क प्रबंधन निगरानी भी कर रहा था। इसी बीच शावक और बाघिन की मौत हो गई।
उमरहा पहाड़ी में दो शावकों की मौत
बांधवगढ़ नेशनल पार्क के ताला वन परिक्षेत्र अंतर्गत दक्षिण गोहड़ी उमरहा पहाड़ी की गुफा में 10 अक्टूबर को गश्ती दल को दो बाघ शावक मृत अवस्था में मिले। वहीं बाघिन के पदचिन्ह तो घटना स्थल पर मिले थे लेकिन बाघिन के संबंध में कोई जानकारी नहीं मिल पाई। दोनों बाघ शावकों की मौत की मिस्ट्री भी नहीं सुलझी है।
गांव में शावकों के साथ बाघिन का डेरा
मानपुर बफर जोन अंतर्गत दमना बीट के ग्राम कछौहा के आस-पास पिछले कई दिनों से बाघिन अपने शावकों के साथ देखी जा रही थी। जिसे लेकर ग्रामीण काफी दहशत में थे। जिसे पार्क प्रबंधन द्वारा स्थानीय वन अमले व हाथियों के दल की मदद से जंगल की ओर भेजा है। वहीं जगल व गांव के बीच निगरानी के लिए टीम तैनात की गई है। गांव और जंगल के बीच अधिकारियों और पार्क प्रबंधन का पहरा है।

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