वनमंत्री ने कहा : बढ़ते बाघों को करेंगे अलग शिफ्ट, फायर फाइटर हवाई जहाज का भेजेंगे प्रस्ताव

जंगल से लकडिय़ों को एकत्रित नहीं कर सकते, इसलिए आग हो जाती है भयावह, ग्रामीणों पर भी मढ़ा दोष

By: Ramashankar mishra

Published: 04 Apr 2021, 12:36 PM IST

शहडोल/उमरिया. बांधवगढ़ नेशनल पार्क के जंगलों में चार दिन तक आग धधकने के बाद वन मंत्री डॉ कुंवर विजय शाह ने जायजा लिया। वन मंत्री शाह ने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं नहीं हो इसके लिए बड़े स्तर पर रणनीति तैयार की जा रही है। बांधवगढ़ नेशनल पार्क में अग्नि दुर्घटना से कोर एवं बफर जोन में जंगल का नुकसान हुआ है। प्रशासन, वन अमले और ग्रामीणों व वन समितियों के सहयोग से नेशनल पार्क में लगी आग पर 48 घंटे के भीतर काबू पा लिया था। पत्रकारवार्ता में वन मंत्री शाह ने कहा कि महुआ बीनने के समय तक जंगल और नेशन पार्क क्षेत्रों में एक माह के लिए चौकीदारों की व्यवस्था, नाइट विजन के लिए ड्रोन की व्यवस्था , एंबुलेंस, ब्लोअर और फायर फाइटर की व्यवस्था का प्रस्ताव है। इसी तरह दूसरे बड़े देशों में फायर फाइटर हवाई जहाज का उपयोग जंगलों की आग बुझाने के लिए किया जाता है जिसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि नेशनल पार्क में बाघों की संख्या अधिक होने के कारण उनके बीच आपसी संघर्ष के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। जिसके लिए नेशनल पार्क के बाघों को अलग शिफ्ट करने का काम किया जाएगा।
एक फीसदी नुकसान, 48 घंटे में बुझाई आग
वन मंत्री ने कहा कि प्रशासन और वन विभाग एवं आस पास के ग्रामीणों तथा मनरेगा के श्रमिकों ने तत्परता दिखाकर 24 से 48 घंटे के भीतर आग पर नियंत्रण पा लिया था। नेशनल पार्क में एक प्रतिशत जंगल के नुकसान का आकलन किया गया है। इस दौरान विंन्सेंट रहीम , वन संरक्षक शहडोल , कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव, वन मण्डलाधिकारी मोहित सूद मौजूद रहे।
ंतर्क: महुआ बीनते मिले, आग न लगाने की दी समझाइश
आग्निदुर्घटना के पीछे वन मंत्री ने लकडिय़ों को संकलित न करना बताया है। उन्होने कहा कि नेशनल पार्क में प्राकृतिक वातावरण के लिए जंगल की सूखी लकड़ी न तो संकलित की जाती है और न ही उपयोग की जाती हैं। इसी कारण नेशनल पार्क में अग्नि दुर्घटना भयावह रूप ले लेती है, जिसके कारण नेशनल पार्क में आग पर काबू पाना कठिन काम हो जाता है। वन मंत्री ने कहा कि नेशनल पार्क का मैनें स्वयं भ्रमण किया है तथा नुकसान का जायजा भी लिया है। कोर एरिया में वनोपज एवं महुआ संकलन की छूट नही है, लेकिन वन ग्राम के लोगों की आजीविका इस पर निर्भर है। इसलिए ज्यादा कड़ाई नही की जाती। पार्क में स्थित 10 ग्रामों के लोगों के पुर्नवास एवं विस्थापन के प्रयास किए जा रहे है, उनके पुर्नवास हेतु बेहतर विकल्प तथा बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी।

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