करचुरी कालीन है बूढ़ी माता का मंदिर, 51 शक्तिपीठों में से एक है स्थल

माता का यहां पर स्वत: हुआ है उद्गम

By: amaresh singh

Published: 18 Oct 2020, 12:18 PM IST

शहडोल। शहर के बार्डर पर स्थित बूढ़ी माता का मंदिर करचुरी कालीन है। यहां पर माता का यहां पर स्वत: उद्गम हुआ है। सोहागपुर के एक भक्त को माता ने बूढ़ी माता के रूप में दर्शन दिया था। इसलिए इसे बूढ़ी माता के मंदिर के नाम से जाना जाता है। मंदिर के पुजारी राजेश कचेर ने बताया कि यहां पर मां दुर्गा स्वरूप में है। माता जिस रूप में प्रकट हुई, उसी रूप में प्रचलित हो गई हैं। मां दुर्गा के बगल में श्रीणगेश और भगवान शिवशंकर की प्रतिमा स्थापित है।


नागदेवता भी देते हैं दर्शन
यह स्थल 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां पर भैरव की प्रतिमा भी स्थापित है। भक्त माता का दर्शन करने के बाद भैरव का भी दर्शन करते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां पर जो भी भक्त अपनी मन्नत मांगते हैं। वह पूरा हो जाता है। बूढ़ी माता के दर्शन के दर्शन और अपनी मन्नत के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं। नवरात्रि शुरू होने पर भक्तों का सुबह से दर्शन के लिए तांता लगा रहा। मंदिर में नागदेवता भी भक्तों को दर्शन देते हैं। उनके लिए स्थान भी बना हुआ है। भजन कभी होता है तो वे अचानक आ जाते हैं। कई बार वे भक्तों को दिख चुके हैं।


कुंए के पानी से गैस्टिक और चर्म रोग होता है दूर
मंदिर में एक प्राचानी कुंआ भी है। जो भी भक्त मंदिर में आते हैं इस कुंए का पानी जरूर पीते हैं। कुंए का पानी सल्फर युक्त है। इस पानी को पीने से गैस्टिक और स्नान करने से चर्मरोग दूर हो जाते हैं।

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