जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में डेंगू जांच की सुविधा नहीं

. जिले में डेंगू ने एक बार फिर दस्तक दे दी है और इसके मरीज भी मिलना शुरू हो गए। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में भले ही दो मरीज चिह्नित हुए हैं, लेकिन हकीकत में कई लोग इस बीमारी से ग्रसित होकर ग्वालियर में उपचार करवा रहे हैं।

By: rishi jaiswal

Published: 10 Sep 2021, 10:43 PM IST

शिवपुरी. जिले में डेंगू ने एक बार फिर दस्तक दे दी है और इसके मरीज भी मिलना शुरू हो गए। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में भले ही दो मरीज चिह्नित हुए हैं, लेकिन हकीकत में कई लोग इस बीमारी से ग्रसित होकर ग्वालियर में उपचार करवा रहे हैं। शिवपुरी में जिला अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद यहां डेंगू का इलाज तो दूर जांच तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में शहर सहित जिलेवासियों को मजबूरी में महंगा इलाज करवाने के लिए ग्वालियर तक का सफर तय करना पड़ रहा है। यदि समय रहते स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार नहीं किया तो आने वाले समय में स्थिति अधिक बिगड़ेगी तथा पैसों के अभाव में बिना इलाज के दम तोडऩे का सिलसिला शुरू हो जाएगा, जैसा वर्ष 2018 में डेंगू के चलते थोकबंद मौतों के दौरान हुआ था।

ऐसे समझें आमजन का दर्द : शहर के साइंस कॉलेज के पास रहने वाले शैलेष की 18 वर्षीय बेटी को भी डेंगू जैसे लक्षण नजर आने पर उसे डॉ. पीएल गुप्ता को दिखाया। बकौल शैलेष, जब स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो बीते शनिवार को जिला अस्पताल लेकर गए, लेकिन यहां पर जांच के नाम पर सिर्फ बीपी व शुगर की जांच की और लक्षण देखकर वो ही दवा दी, जो डॉ. गुप्ता दे रहे थे। हालत बिगडऩे पर रात में ही बेटी को लेकर ग्वालियर पहुंचे, जहां पर उसका इलाज चल रहा है तथा अब कम हुईं प्लेटलेट्स में सुधार है। अभी तक लगभग 70 हजार खर्च हो गए तथा छुट्टी होने तक 1 लाख पर गाड़ी पहुंच जाएगी। शैलेष एक छोटी सी दुकान करते हैं। वे खुद कहते हैं कि जब मेडीकल कॉलेज है तो यह सुविधाएं तो होनी चाहिए।

ग्वालियर व अन्य जिलों में इलाज करा रहे आधा दर्जन मरीज

कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच डेंगू ने दस्तक दे दी है तथा मलेरिया विभाग के अनुसार अभी तक दो मरीज मिले हैं, जबकि कुल आधा दर्जन मरीज ग्वालियर सहित आसपास दूसरे जिलों में इलाज करवा रहे हैं। डेंगू की आमद के साथ ही जिला अस्पताल में भी अलग से डेंगू वार्ड बनाने की चर्चा पिछले 7 दिन से चल रही है, लेकिन अभी तक एक भी मरीज भर्ती नहीं किया गया, क्योंकि यहां समुचित इलाज नहीं है। यही वजह है कि लक्षण देखने के बाद मरीज के परिजन खुद ही उसके खून की जांच करवाने के बाद ब्लड प्लेटलेट्स कम होने पर उसे इलाज के लिए ग्वालियर लेकर भाग रहे हैं। चूंकि ग्वालियर में प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाने के फेर में एक मरीज का इलाज कराने में लगभग 1 लाख रुपए तक खर्च हो रहे हैं। वर्ष 2018 में भी डेंगू के चलते न केवल थोकबंद मौत हुईं थीं, बल्कि बीमारी का इलाज कराने में कई परिवार कर्ज के बोझ तले दब गए थे। शिवपुरी में स्वास्थ्य सेवाओं का दावा तो अधिकारी व जनप्रतिनिधि करते हैं, लेकिन अभी तक डेंगू जैसी बीमारी का कोई इलाज शिवपुरी में नहींं हो रहा, जबकि यहां मेडीकल कॉलेज भी है।


मशीन का पाट्र्स खराब है, इंस्टॉल नहीं हुई
जिला अस्पताल में ब्लड बैंंक प्रभारी व मेडिकल ऑफिसर दीप्ति बंसल ने बताया कि हमारे यहां प्लाज्मा को ब्लड से अलग करने की जो मशीन आई है, उसी से प्लेटलेट्स भी अलग की जा सकती हैं, लेकिन मशीन को जब इंस्टॉल किया तो उसका एक पार्ट खराब था। यह पार्ट जर्मनी से आएगा तथा उसकी डिमांड भेजी गई है।

ब्लड बैंक शुरू होगा, तब होगी सुविधा
ब्लड में प्लेटलेट्स को अलग करने की मशीनरी व सुविधा अभी मेडिकल कॉलेज में नहीं है। जब ब्लड बैंक शुरू होगा, तब यह मशीन भी उपलब्ध होगी। अभी ब्लड बैंक खोला जाना प्रस्तावित है। वैसे हर डेंगू मरीज को प्लेटलेट्स की जरूरत नहीं होती।
डॉ. अपराजिता तोमर, पैथोलॉजी प्रभारी मेडीकल कॉलेज शिवपुरी

जांच तो हो रही है
डेंगू की जांच जिला अस्पताल में हो रही है तथा उसका इलाज अलग से कुछ विशेष नहीं होता है। अभी प्लेटलेट्स अलग करने की मशीन नहीं है।
डॉ. राजकुमार ऋषिश्वर, सिविल सर्जन जिला अस्पताल शिवपुरी

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