वन विभाग की टीम ने कारोबारी के यहां से 50 क्विंटल कुरैठा की छाल जब्त की

छापामार टीम को कारोबारी के पुत्रों ने रोका, दर्ज किया 353 का मामला।

By: shatrughan gupta

Published: 27 Nov 2020, 10:56 PM IST

शिवपुरी. वन विभाग ने शुक्रवार को शहर की कृष्णपुरम कॉलोनी में एक जड़ी-बूटी कारोबारी के गोदाम पर छापा मारकर 50 क्विंटल कुरैठा की छाल जब्त की। टीम गुरुवार शाम जब छापा मारने गई तो सेठ के पुत्रों ने अभद्रता करते हुए उन्हें तलाशी लेने से रोक दिया, जिसके चलते कोतवाली पुलिस ने उन पर शासकीय कार्य में बाधा का मामला दर्ज कर लिया। पकड़ी गई छाल की कीमत 2 लाख बताई जा रही है, जिसे अवैध रूप से संग्रहित करके रखा गया था। वन विभाग को सूचना मिली थी कि जड़ी-बूटी का कारोबार करने वाले राजेंद्र गोयल के कृष्णपुरम कॉलोनी स्थित गोदाम में अवैध रूप से कुरेठा की छाल रखी गई है। इस पर टीम गुरुवार शाम जब गोदाम पर पहुंची तो राजेंद्र गोयल के पुत्रों ने टीम के साथ अभद्रता की। टीम ने जब तलाशी लेने का प्रयास किया तो कारोबारी व उसके पुत्रों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया तथा गाली-गलौज भी की। उस समय तो अमला वापस लौट आया, लेकिन वहा निगरानी के लिए अपने कर्मचारी तैनात कर आया। शुक्रवार सुबह कोतवाली पुलिस को साथ लेकर वन अमला फिर सेठ के गोदाम पर पहुंचा तो फिर कारोबारी व उसके परिजनों ने किसी तरह का विरोध नहीं किया।

फिर शुरू हुए छाल से भरे बोरे निकलना
गोदाम में छिपाकर रखी गई कुरैठा की छाल बोरों में भरी थी। टीम ने एक-एक कर जब छाल की बोरियां निकलवाईं तो लगभग 50 क्विंटल छाल जब्त की गई। छाल से भरी बोरियों को ट्रैक्टर-ट्रॉलियां में भरवाकर उसे वन विभाग ने अपनी जब्ती में ले लिया। वन विभाग ने जड़ी-बूटी कारोबारी के खिलाफ जैव विविधता अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। जड़ी-बूटी कारोबारी राजेंद्र गोयल की फर्म सोनू गोयल के नाम से है। वन विभाग ने जो प्रकरण बनाया है उसमें दोषी पाए जाने पर 5 लाख का जुर्माना और 3 साल की सजा का प्रावधान है।

कोतवाली में 353 का मामला दर्ज
वन टीम को कार्रवाई करने से रोकने पर कोतवाली पुलिस ने डिप्टी रेंजर आशीष समाधियाकी रिपोर्ट पर आरोपी सोनू, रवि, नीतेश व राजेंद्र गोयल के विरुद्ध धारा 353, 506, 294 के तहत प्रकरण दर्ज किया है।

आयुर्वेदिक सीरप के काम आती है छाल
कुरैठा की छाल जंगल में पाई जाती है तथा इसका उपयोग आयुर्वेदिक सीरप बनाने में होता है। दस्त व पेचिश में दिया जाने वाला सीरप इसी छाल से बनता है। इस छाल को संग्रहित करना गैर कानूनी है तथा जड़ी-बूटी कारोबारी ने किसी दूसरे से मिलकर अपने गोदाम में अवैध रूप से उसका संग्रहण किया था।

जनप्रतिनिधियों के भी आए फोन
छापामार कार्रवाई करने वाली वन विभाग की टीम ने बताया कि जब हम गोदाम पर छाल की तलाशी के लिए आए तो इस दौरान दो-तीन जनप्रतिनिधियों के फोन भी आए थे। हालांकि, फोरेस्ट टीम ने यह नहीं बताया कि फोन करने वाले नेता किस हैसियत और स्तर के थे, लेकिन शायद वे अधिक पॉवरफुल नहीं थे, अन्यथा कार्यवाही इतनी आसानी से नहीं हो पाती।

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