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सीधी में अवैैध खनन से खतरे में चंबल से लाए गए 27 घडिय़ालों की जान !, खुशियां आने से पहले आ रही बुरी खबरें, जाने क्या है मामला

स्थानीय लोगों ने उठाए विभागीय अफसरों पर सवाल

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27 khangals brought from chambal in danger from unauthorized mining!

27 khangals brought from chambal in danger from unauthorized mining!

सीधी. सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य में राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य मुरैना के देवरी पुनर्वास केंद्र से लाए गए 27 नग घडिय़ालों की सुरक्षा पर सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया गया कि प्रतिवर्ष आधा सैकड़ा से ज्यादा घडिय़ाल जन्म लेते रहे हैं, लेकिन अवैध रेत खनन व अन्य कारणों से मौत के शिकार होते रहे हैं। विभागीय अधिकारी इनके संरक्षण पर गंभीरता नहीं दिखाई। हालांकि, गत दो वर्षों से घडिय़ालों का प्रजनन सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य में बंद है। इसका कारण अभ्यारण्य में नर घडिय़ाल का न होना था। हालांकि इस कमी को अब दूर कर दिया गया है, और राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य से लाए गए २७ घडिय़ालों में से तीन नर घडिय़ाल भी शामिल हैं। यदि इन घडिय़ालों को सुरक्षित बचा लिया तो लंबे समय से सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य में रुकी घडिय़ालों की वंशबृद्धि एक बार फिर शुरू हो जाएगी।

20 लाख से ज्यादा का बजट संरक्षण पर खर्च
विलुप्त होते घडिय़ालों को संरक्षण के लिए देश में पांच अभ्यारण्य बनाए गए हैं, जिसमें एक अभ्यारण्य सोन नदी में बनाया गया है। किंतु सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य में घडिय़ाल सुरक्षित नहीं है। दो वर्ष पूर्व तक इस अभ्यारण्य में प्रतिवर्ष आधा सैकड़ा से ज्यादा घडिय़ाल जन्म लेते थे, किंतु वे अवैध रेत उत्खनन व अन्य कारणों से असमय ही काल के गाल में समा जाते थे। विभागीय लापरवाही व उदासीनता के कारण घडिय़ालों का संरक्षण खतरे में है। शासन के द्वारा घडिय़ालों के संरक्षण के लिए विभाग को प्रतिवर्ष 20 लाख से ज्यादा का बजट व लाखों रूपए कर्मचारियों पर ब्यय कर रही है उसके बाद भी घडिय़ालों की संख्या मे कोई खास वृद्धि न होना चिंता का विषय है। ज्ञात हो कि विलुप्त होते घडिय़ालो के संरक्षण के लिए सोन नदी को अभ्यारण्य क्षेत्र बनाने की अधिसूचना शासन के द्वारा 23 सितंबर 1981 को जारी की गई थी। वर्ष 1994-95 में इसका प्रशासकीय नियंत्रण संजय राष्ट्रीय उद्यान को हस्तांतरित किया गया।

तीन जिलों की सीमा
सोन नदी अभ्यारण्य का विस्तार विंध्य के तीन जिलो में है। जिसमे शहडोल, सतना व सीधी शामिल हैं। इन तीन जिले अंतर्गत अभ्यारण्य क्षेत्र 196 ग्रामो का आंशिक भाग शामिल है। अभ्यारण्य मे सोन नदी के साथ बनास व गोपद नदी को भी शामिल किया गया है। जिसमें सोन नदी की लंबाई 160.93 किमी, बनास नदी का क्षेत्रफल 22.53 किमी व गोपद नदी का 25.75 किमी कुल 209.21किमी के क्षेत्रफल को घडिय़ालो के लिए अभ्यारण्य क्षेत्र घोषित किया गया है।

सेंचुुरी मे हैं 76 घडिय़ाल
सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य क्षेत्र में वर्तमान मे विभागीय आंकड़े के आधार पर संख्या 49 बताई जा रही है। यह संख्या कई वर्षों से यथावत आंकड़ो मे बनी हुई है। बताते चले कि वर्ष 2009 में विभागीय गणना मे घडिय़ालो की संख्या 235 थी, वहीं माह जनवरी मे संख्या घटकर 210 पर पहुंच गई वहीं संख्या लगातार घटती गई फरवरी 2010 में फिर 5 घडिय़ाल घटकर संख्या 206 पर रह गई। वर्तमान में आंकड़े महज 49 रह गई है। अब 27 घडिय़ाल चंबल अभ्यारण्य से लाए जाने के बाद सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य में घडिय़ालों की संख्या बढ़कर 76 हो गई है। अब इन घडिय़ालों को सुरक्षित बचाना विभागीय अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती है।