प्राण के लिए 4 गुना बढ़ी वायु की खपत

सांसों पर संकट: ऑक्सीजन के 350 सिलेंडरों की रोजाना हो रही है खपत

By: Suresh

Published: 21 Apr 2021, 06:30 PM IST

पूरण सिंह शेखावत. सीकर. कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने गंभीर मरीजों को जीवन देने वाली ऑक्सीजन सिलेंडर की खपत को चार गुना तक बढ़ा दिया है। ऑक्सीजन की खपत की बानगी है कि महज 20 दिन में ही अकेले सांवली कोविड अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर की खपत 105 सिलेंडर तक पहुंच गई। जबकि जिले के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में ऑक्सीजन की खपत को देखा जाए तो कोरोना संक्रमित और सामान्य मरीजों को लगाए जाने वाले सिलेंडरों की संख्या इन दिनो 350 सिलेंडरों तक पहुंच गई है। ऑक्सीजन की खपत को देखते हुए अब अधिकांश कोविड अस्पतालों में डी टाइप के सिलेंडर के जरिए ही आपूर्ति दी जा रही है।
सौ में तीस मरीजोंको हाई फ्लो
कोरोना संक्रमण का फेफडों पर असर ज्यादा होने के कारण इन दिनो सौ में तीस मरीजों की स्थिति गंभीर हो रही। जिसके कारण इन मरीजों को हाई फ्लो से ऑक्सीजन दी जा रही है।
एक डी टाइप सिलेंडर सात क्यूबिक मीटर का होता है। एक सिलेंडर में करीब 7000 लीटर ऑक्सीजन आती है। जिले के एकमात्र डेडीकेटेड कोविड अस्पताल में तीस मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट पर है। कोविड अस्पताल में हर मरीज को औसतन हर मिनट में करीब 20 लीटर ऑक्सीजन दी जा रही है। कोरोना मरीज का ऑक्सीजन सेचुरेशन 95 से नीचे पहुंचते ही उसे आक्सीजन दी जाती है। एचआरसिटी का स्कोर 12 से ज्यादा होने और ऑक्सीजन सेचुरेशन 92 से नीचे चला गया तो उसे ऑक्सीजन सपोर्ट दिया जाता है। जिससे मरीज के शरीर के सभी अंग काम कर सके। चिकित्सकों के अनुसार हर संक्रमित को ऑक्सीजन देने की जरूरत नहीं है। ऐसे में लोगों को समझना होगा कि कोरोना संक्रमण से लडऩे के लिए गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन देकर ही बचाया जा सकता है।
यह है स्थिति
जिले में ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाले सात फर्म इस समय है। ये सिलेेंडर की आपूर्ति जयपुर या अन्य जगहों से करवाती है। रींगस में लिक्विड ऑक्सीजन का प्लांट है। जहां से सिलेंडर की रिफिलिंग करवाई जाती है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए जिला प्रशासन ने कोविड मरीजों की बढती संख्या को देखते हुए स्टॉक में हर समय तीन सौ सिलेंडर रखने का निर्णय किया है। इसके अलावा रींगस के रिफिल प्लांट पर आने वाली आपूर्ति में देरी के कारण झुंझुनूं और जयपुर से खाली सिलेंडर में आक्सीजन भरवाई जाएगी।
इनका कहना है...
एक सामान्य मरीज को करीब पांच लीटर प्रति मिनट के हिसाब से आक्सीजन दी जाती है। इस लिहाज से यह सिलेंडर एक मरीज को 24 घंटे तक आक्सीजन की सप्लाई करता है लेकिन इन दिनो ऑक्सीजन की खपत को देखते हुए करीब दस मिनट में ही एक डी टाइप सिलेंडर खर्च हो रहा है।
डा मुकेश मातवा, एनेस्थिेटिक, मेडिकल कॉलेज सीकर
फिलहाल जिले में सात एजेंसियों के पास साढे सात सौ सिलेंडर है। कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के बढ़ते मामलों के चलते कोविड केयर सेंटर और अस्पतालों में अतिरिक्त ऑक्सीजन की बढ़ती जरूरत को देखते केवल अस्पतालों को ही ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति देने के निर्देश हैं।
बलदेव चौधरी, जिला औषधि नियंत्रक अधिकारी सीकर

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