राजस्थान में यहां मरीजों तक पहुंची नकली दवाएं, स्वास्थ्य विभाग की जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

राजस्थान में यहां मरीजों तक पहुंची नकली दवाएं, स्वास्थ्य विभाग की जांच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Sachin Mathur | Publish: Aug, 11 2019 11:35:42 AM (IST) Sikar, Sikar, Rajasthan, India

सीकर. अगर आप ब्लड प्रेशर की दवा ऑनलाइन फार्मेसी के जरिए मंगवा रहे हैं तो सावधान रहे। सोच समझ कर ही इन दवाओं को विक्रेताओं के यहां से खरीदे जिससे मरीज की जान के साथ खिलवाड़ नहीं हो।


सीकर. अगर आप ब्लड प्रेशर की दवा ऑनलाइन फार्मेसी के जरिए मंगवा रहे हैं तो सावधान रहे। सोच समझ कर ही इन दवाओं को विक्रेताओं के यहां से खरीदे जिससे मरीज की जान के साथ खिलवाड़ नहीं हो। प्रदेश में ऑनलाइन फार्मेसी के जरिए नकली दवाओं की पांच हजार गोलियां सीकर जिले में पहुंची है। मुनाफे के चक्कर में मेडिकल स्टोर के संचालकों ने ह्दय रोग और ब्लड प्रेशर के हजारों मरीजों को 750 गोलियां बेच दी गई। औषधि नियंत्रण विभाग की टीम ने शनिवार को सीकर जिला मुख्यालय पर दो दुकान और नीमकाथाना में चार दुकानों पर ह्दय रोग के उपचार में काम आने वाली लोसार एच दवा के नमूनों की जांच की और इस दवा को जब्त कर बिक्री पर रोक लगा दी। इन नमूनों को जांच के लिए जयपुर लैब में भेजा जाएगा जहां से रिपोर्ट आने के बाद सख्त कार्रवाई होगी। गौरतलब है कि सीकर जिले में लोसार एच दवा की पांच हजार से ज्यादा दवाएं पहुंची और करीब 18 फीसदी गोलियां मरीजों को दी जा चुकी है।


36 लाख की नकली दवाएं
औषधि नियंत्रक अधिकारी मनोज टोंगरा ने बताया कि शुक्रवार को जयपुर की फिल्म कॉलोनी की दक्ष फार्मा और वृंदावन फार्मा, कालवाड़ स्कीम की सनशाइन एंटरप्राइजेज, सुदर्शनपुरा की थीया टेक्नोलॉजिस और मेडि लाइफ इंटरनेशनल प्रा.लि., कोटपुतली में यूनाइटेड मेडिकल एजेंसी, वीकेआई में अग्रवाल स्टोर्स और 22 गोदाम स्थित एपिओन मेड आरएक्स फार्मेसी पर कार्रवाई की गई। जयपुर में 37 लाख रुपए से अधिक की नकली दवाएं जब्त की गई। । जांच में पता चला कि ये नकली दवाएं जयपुर के पूरे प्रदेश में बेची गई है। सीकर, झुंझुनू, अलवर, जोधपुर, भरतपुर, हनुमानगढ़, नागौर, दौसा और करौली सहित प्रदेश के दस जिलों में ज्यादा खपत हुई है।

ब्रांडेड के नाम पर खिलवाड़
सुदर्शनपुरा औद्योगिक क्षेत्र स्थित थीया टैक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ऑनलाइन फार्मेसी के जरिए बेहद कम कीमत पर दवाओं को बेच रही थी। इस पर औषधि विभाग की कार्रवाई ब्लड प्रेशर में काम आने वाली दवा लोसार एच टेबलेट पर की गई। सिक्किम स्थित टोरेंट फार्मास्यूटिकल लिमिटेड की इस दवा का बैच नम्बर 9एफजेड9ई047 है। फिलहाल लोसार एच टेबलेट की जब्ती गई है। इसके अलावा यूरिमेक्स डी टेबलेट, सिपला, डुफास्टोन, एटोरवेस्टीन सहित सिपला, अबोट जैसी ब्रांडेड, शुगर और बीपी की अन्य दवाओं की भी जांच की जा रही है।

इसलिए नकली दवाएं
जयपुर के प्रतिष्ठान नकली और अमानक दवाओं की बिक्री का गढ़ बना हुआ है। सीकर जिले में कई दवाओं की दुकानों पर बरसों से मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। वजह ऑनलाइन कम्पटीशन के जरिए किसी भी कंपनी की दवा बेचने पर रिटेलर को 16 प्रतिशत और हॉलसेलर को 10 प्रतिशत कमीशन ही मिलता है। जबकि, ऑनलाइन कंपनियां 20 प्रतिशत तक फायदा तो ग्राहक को ही दे देती हैं।

एक पर कार्रवाई नहीं
विभाग की ओर से नकली दवाओं की बिक्री को लेकर बार-बार कार्रवाई के दावे किए जाते हैं। बरसों से हो रही इस कार्रवाई के बावजूद आज तक सीकर जिले में नकली दवाओं के बेचने के मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि प्रदेश सहित शेखावाटी में दिमागी बुखार, कफ सीरप, डायबीटिज, किडऩी रोग से संबंधित कई नकली दवाओं के जखीरे और सरगना तक पकड़े जा चुके हैं। इसके बावजूद किसी पर सख्त कार्रवाई नहीं हो पाई है जिससे पुष्टि हो रही है कि औषधि प्रशासन विभाग भी इन दवाओं पर नियंत्रण के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं कर रहा है। जबकि डब्ल्यूएचओ के अनुसार बाजार में बिकने वाली लगभग 20 फीसदी दवाइयां नकली होती हैं। जिनमें सिर दर्द और सर्दी-जुकाम की ज्यादातर दवाएं शामिल है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेची जाने वाली 40 फीसदी से ज्यादा दवाएं नकली और घटिया होती हैं।

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