अब दर्द देने लगा खाड़ी देशों में नौकरी का सपना

ठगों का जाल : एजेंटों के जाल में फंसकर हर साल सैकड़ों लोग गंवा देते हैं लाखों रुपए
बिग इश्यू

By: Narendra

Updated: 22 Sep 2021, 08:21 PM IST

नरेंद्र शर्मा. सीकर. कभी प्रतिष्ठा और रोजगार के प्रतीक रहे खाड़ी देश अब हमारे अपने लोगों को दर्द देने लगे हैं। खाड़ी देशों के कड़े नियम...एजेंटों की ठगी...परदेश में कानून की अनभिज्ञता...पंजीयन न होना और अब रोजगार के कम होते अवसरों के कारण खाड़ी देशों के प्रति शेखावाटी के लोगों का मोह कम होता जा रहा है। शेखावाटी से हर साल करीब 8 से 10 हजार लोग खाड़ी देशों में रोजगार के लिए जाते थे। अब कोविड के बाद इनकी संख्या में भारी कमी आई है, लेकिन इनमें भी औसतन 200 से 300 लोग एजेंटों की ठगी का शिकार हो जाते हैं। ठगी में सर्वाधिक मामले टूरिस्ट वीजा पर विदेश भेजने के सामने आए हैं। यहां का कामगार करीब डेढ़-दो लाख रुपए खर्च कर एजेंट के माध्यम से खाड़ी के किसी देश के लिए रवाना होता है, वहां उसका वर्किंग वीजा की बजाय ट्यूरिस्ट वीजा सामने आता है। दो लाख खर्च होने के बाद भी वह वहां काम नहीं कर सकता और कुछ ही दिनों में लौट आता है। बाद में एजेंट के खिलाफ केस दर्ज करवाया जाता है। इसके बाद ज्यादा मामले वो हैं जिनमें उन्हें जिस नौकरी के लिए भेजा जाता है, वह नहीं मिलती।


हर साल ठगी की 55 शिकायतें...केस औसतन छह
विदेश में बेहतरीन नौकरी, अच्छी तनख्वाह और आराम की जिंदगी का सब्जबाग दिखाकर युवाओं से हजारों रुपए ले लिए जाते हैं। युवा भी अशिक्षा और जानकारी के अभाव में जो कागजात एजेंट देता है, उन्हें लेकर खाड़ी देशों के लिए उड़ान भर देता है। वहां जाकर जब कागजात सही नहीं पाए जाते, तो परेशानी में घिर जाता है। सालभर में 55 से ज्यादा शिकायतें शेखावाटी में सामने आती है। सालाना 50 से 70 लाख रुपए एजेंट पीडि़तों से ठग लेते हैं। अधिकांश में एजेंट और पीडि़तों के बीच समझौता हो जाता है, तो कुछ में पीडि़त केस दर्ज करवा देते हैं। इस वर्ष अब तक सीकर जिले में ऐसे तीन मामले दर्ज हुए हैं।


खाड़ी में हमारे ज्यादा कामगार फिर भी पंजीयन के इंतजाम नहीं
सरकार खाड़ी देशों में जाने वाले कामगारों के पंजीयन की स्थायी व्यवस्था नहीं कर सकी है। पिछली भाजपा सरकार ने श्रम विभाग के जरिए पंजीयन की व्यवस्था शुरू करने का दावा किया था। एक सेंटर सीकर में भी शुरू होना था, लेकिन अभी इस दिशा में कोई खास काम नहीं हुआ है।


धरातल पर नहीं उतरी सरकार की योजना
सरकार का मानना है कि खाड़ी देशों में जाने वाले ज्यादातर कामगार बिना स्किल के ही जा रहे हैं। इस कारण उनको वहां सही पगार नहीं मिल पाती। इसके लिए सरकार ने विदेश जाने वाले बेरोजगारों को उनकी पसंदीदा ट्रेड में प्रशिक्षण दिलवाने की योजना बनाई। इसके बाद नामी कंपनियों से एमओयू कर विदेश भेजा जाएगा ताकि कबूरतबाजी के बढ़ते मामलों को रोका जा सके। यह योजना अभी धरातल पर नहीं उतरी है।


फैक्ट फाइल
कितने कामगार जाते हैं हर साल : 8 से 10 हजार
पहले से कार्यरत : 25 हजार
हर साल ठगी की शिकायत : 55


इन दो मामलों से समझें पीड़ा
केस वन : फतेहपुर क्षेत्र के एक युवक ने गत वर्ष रिपोर्ट दी कि उसके साथ मर्चेंट नेवी में नौकरी के नाम पर ठगी हुई। एजेंट ने अच्छी नौकरी का झांसा दिया, लेकिन कम वेतन वाली कंपनी में नौकरी दी।
केस दो : गत वर्ष रानोली थाने में एक युवक ने रिपोर्ट दी कि साढ़े तीन लाख रुपए एजेंट को देकर कुवैत गया था। जो बताई वह नौकरी नहीं मिली। मजबूरी में तीन माह तक मजदूरी की। उसका भी वेतन नहीं मिला। बाद में कुवैत पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। महीनों बाद किसी तरह छूटकर स्वदेश लौटा।


क्या रखें सावधानियां
- एजेंट का रजिस्ट्रेशन देखें
- सारा पेमेंट चेक से करें और रसीद जरूर लें
- सादे कागज पर दस्तखत करके न दें
- एम्प्लॉयमेंट कांट्रेक्ट की शर्तें पढ़ें, ठीक लगने पर दस्तखत करें
- वीजा लगने के बाद पासपोर्ट, कॉन्ट्रेक्ट व एजेंट का ब्यौरा परिजनों के पास छोड़ें
- केंद्र सरकार की टोल फ्री हेल्पलाइन नम्बर 1800113090 पर मदद लें

Narendra Desk
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned