शिक्षक भर्ती के मनमर्जी के कायदे, पांचवी बार कोर्ट पहुंचा मामला

(Questions raised on teacher recruitment in Rajasthan) प्रदेश में नौकरी के मनमर्जी के कायदों ने बेरोजगारों की मुसीबत बढ़ा दी है। रीट भर्ती (REET)2018 की प्रतीक्षा सूची में ज्यादातर जिलों में पंचायत समिति स्तर की प्रशासनिक एवं स्थापना समिति का गठन नहीं हुआ है।

By: Sachin

Updated: 01 Mar 2021, 03:23 PM IST

सीकर. प्रदेश में नौकरी के मनमर्जी के कायदों ने बेरोजगारों की मुसीबत बढ़ा दी है। रीट भर्ती 2018 की प्रतीक्षा सूची में ज्यादातर जिलों में पंचायत समिति स्तर की प्रशासनिक एवं स्थापना समिति का गठन नहीं हुआ है। जबकि रीट द्वितीय लेवल में अंग्रेजी विषय को छोड़कर सभी विषयों में नियुक्ति दी जा चुकी है। हालांकि अब 25 फरवरी से न्यायालय ने नियुक्ति देने पर दुबारा रोक लगा दी है। पंचातीयराज अधिनियम के तहत पंचायत समिति की स्थापना समिति से अनुमोदन के बाद ही तृतीय श्रेणी शिक्षकों को नियुक्ति देने का प्रावधान है। मनमर्जी के कायदों की वजह से प्रदेश में भर्ती लगातार न्यायालय के फेर में उलझ रही है। रीट शिक्षक भर्ती 2018 अब तक पांच बार अलग-अलग विवादों की वजह से न्यायालय तक पहुंची है। इस बार बेरोजगारों ने आरक्षण रोस्टर की पालना नहीं करने व बिना स्थापना समिति के नियुक्ति देने के मामले को लेकर चुनौती दी है। बेरोजगार अभ्यर्थी अनिल कुमार का कहना है कि भर्ती एजेन्सियों की लापरवाही वजह से युवाओं का नौकरी का सपना भर्ती की विज्ञप्ति के कई साल बाद पूरा होता है।


डेढ़ गुना अभ्यर्थियों की नहीं की सूची जारी, इसलिए दो बार निकालनी पड़ी प्रतीक्ष सूची
प्रदेश में वर्ष 2018 में 54 हजार तृतीय श्रेणी शिक्षकों के पदों पर भर्ती की विज्ञप्ति जारी हुई थी। पंचायतीराज अधिनियम 277 ए के तहत रीट के अंकों के आधार पर 54 हजार अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की गई। इस दौरान शिक्षा विभाग को दस्तावेज सत्यापन के लिए लगभग डेढ़ गुना अभ्यर्थियों को बुलाया जाना था। लेकिन विभाग ने महज 54 हजार को ही बुलाया। पद रिक्त रहने और बेरोजगार के लगातार आंदोलन की वजह से विभाग ने लगभग एक साल बाद रीट प्रथम व द्वितीय लेवल की प्रतीक्षा सूची जारी की। इस सूची में लगभग साढ़े सात हजार अभ्यर्थियों को शामिल किया गया। इसके बाद भी लगभग साढ़े तीन हजार पद रिक्त रह गए।


सभी भर्तियों के अलग-अलग कायदे

प्रदेश में सभी विभागों में भर्ती के अलग-अलग कायदे होने की वजह से बेरोजगारों की चुनौती बढ़ रही है। दरअसल, राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से होने वाली प्रथम व द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में परिणाम के साथ प्रतीक्षा सूची भी जारी की जाती है। ऐसे में प्रतीक्षा सूची को लेकर विवाद काफी कम होता है। जबकि तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में पंचायतीराज विभाग की ओर से एक साथ सूची जारी नहीं करने की बजह से विवाद बढ़ रहा है।


ऐसे समझें विभाग की लापरवाही को

1. कई वर्गो में ज्यादा सीट दी, बाद में मानी गलती
विभाग की ओर से न्यायालय में दिए जवाब में बताया कि रीट प्रथम लेवल में अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थियों का तय आरक्षण से ज्यादा चयन कर लिया गया। बाद में भूल सुधार करते हुए प्रतीक्षा सूची में पुराने पदों को समायोजित करते हुए नई सूची जारी की। हालांकि कुछ अभ्यर्थियों ने विभाग के इन आंकड़ों पर भी सवाल उठाया है। इन श्रेणियों में 31 से 86 अभ्यर्थियों का अधिक चयन किया गया।


2. नई सूची में सामान्य वर्ग की बढ़ानी पड़ी सीट

रीट प्रथम लेवल में तय आरक्षण के हिसाब से 284 पदों पर अभ्यर्थियों का कम चयन हुआ। ऐसे में विभाग ने नई प्रतीक्षा सूची में रिक्त 493 पदों को जोड़ते हुए 777 पदों की प्रतीक्षा सूची जारी की गई।


इधर, खुद विभाग अपने आंकड़ों में उलझा
एक तरफ विभाग की ओर से कई श्रेणियों में अधिक अभ्यर्थियों के चयनित होने का दावा किया गया तो दूसरी तरफ आठ मई 2019 के आदेश के हिसाब से एक भी अधिक अभ्यर्थी का चयन नहीं हुआ। इसके हिसाब से रीट प्रथम लेवल में सामान्य वर्ग में 9947, एमबीसी में 188, ओबीसी में 4123, सहरिया में सात, एससी में 3142 व एसटी में 2553 का चयन हुआ। इस हिसाब से एक भी अभ्यर्थी का अधिक चयन नहीं हुआ है।

 

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