साख खराब कर माल बटोर रहा राजस्थान बोर्ड, दांव पर लग रहा बच्चों का भविष्य

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की साख पर भी अब सवाल खड़े होने लगे है। इस साख की वजह से राजस्थान बोर्ड लगातार मालामाल भी हो रहा है।

By: Sachin

Published: 14 Jan 2021, 10:16 PM IST

योगेश पारीक
सीकर/फतेहपुर. राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की साख पर भी अब सवाल खड़े होने लगे है। इस साख की वजह से राजस्थान बोर्ड लगातार मालामाल भी हो रहा है। मामला कक्षा दसवीं व बारहवीं के बोर्ड परिणाम से जुड़ा है। पिछले चार वर्षो के परिणाम को लेकर सूचना के अधिकार के तहत परिणाम में गलतियों को लेकर जानकारी ली तो मामला बेहद चौकाने वाला सामने आया है। पिछले चार वर्षो में परिणाम से संतुष्ट नहीं होने पर तीन लाख 58 हजार 697 विद्यार्थियों ने संवीक्षा परिणाम के लिए आवेदन किया। इनमें से 51 हजार 528 विद्यार्थियों के परिणाम में गड़बड़ी बोर्ड ने मानी और विद्यार्थियों के अंक सुधार किए। इन आवेदनों से बोर्ड को तीन साल में 15 करोड़ से अधिक की आय हुई। आरटीआई कार्यकर्ता अजीत सिंह की ओर से ली गई जानकारी से यह खुलासा हुआ है। खास बात यह है कि परिणाम में इन गलतियों को जहां बोर्ड मानवीय भूल बताकर पीछा छुडा लेता है वही बच्चों का भविष्य दावं पर लगा हुआ है।


संवीक्षा के लिए किस वर्ष कितने आवेदन

परीक्षा 2017 2018 2019 2020
माध्यमिक 34850 42446 41332 50011

त्रुटि पाई गई 6162 7499 7083 7279
प्रतिशत 17.68 17.66 17.13 14.55


12वीं के परिणाम में सामने आ रही लगातार चूक

परीक्षा 2017 2018 2019 2020
उच्च माध्यमिक 47096 53342 46767 42853

त्रुटि पाई गई 5471 7389 6201 4444
प्रतिशत 11.61 13.85 13.25 10.37

 

10 वीं 12 वी के कुल आवेदन

वर्ष आवेदन त्रुटि पाई गई प्रतिशत
2017 81946 11633 14.19

2018 95788 14888 15.54
2019 88099 13284 15.07

2020 92864 11723 12.64

संवीक्षा से कमा रहा है बोर्ड, तीन वर्ष में 15 करोड़ की आय
परिणाम में गलती भले ही विद्यार्थियों व अभिभावकों की मुसीबत बढ़ा रही हो लेकिन यह बोर्ड की इससे तिजोरी भर रही है। पिछले तीन साल में बोर्ड को संवीक्षा आवेदनों के जरिए 15 करोड़ से अधिक की आमदनी हुई है। हर साल औसत चार से पांच करोड़ की आय हो रही है।


आवेदनों से बोर्ड को हुई आय

वर्ष कुल प्राप्त राशि
2017 4,65,71,700 रुपए

2018 5,46,74,100 रुपए
2019 5,03,13,500 रुपए


12 वी से ज्यादा 10 वी के बोर्ड परीक्षा में ज्यादा गफलत

बोर्ड के द्वारा आयोजित की जाने वाली 10 वीं व 12 वीं की परीक्षा के परिणाम में सबसे ज्यादा गड़बड़ी 10 वी के परिणाम में सामने आई। 12 वी की तुलना में 10 के विद्याथियों ने संवीक्षा के लिए ज्यादा आवेदन किए है। जबकि बोर्ड की ओर से कराई जाने वाली दोनों परीक्षाओ के अंक विद्याथियों के लिए भविष्य में मायने रखते हैं।

और ऐसे समझे विद्यार्थियों की पीड़ा

केस एक:
विज्ञान मे मिले 43 नंबर, कॉपी मंगवाई तो निकले 94, नतीजा विज्ञान की जगह कला संकाय में लेना पड़ा प्रवेश

सीकर जिले के फतेहपुर क्षेत्र के गांव नगरदास की बालाजी स्कूल में पढऩे वाली छात्रा कविता के 10 वी बोर्ड की 2019 की परीक्षा में 80 फीसदी अंक आए। लेकिन कविता के विज्ञान विषय मे 43 नम्बर दे रखे थे। हर विषय मे 80 से अधिक अंक लाने वाली छात्रा के विज्ञान में कम नंबर आने से वह विज्ञान संकाय नहीं ले स्की। जब बोर्ड से कॉपी मंगवाई तो कॉपी में 94 नंबर थे। एक साथ 51 नंबर बढ़े लेकिन तब तक छात्रा ने कला संकाय ले लिया। नंबर कम आने की वजह से छात्रा कई दिन अवसाद में रही।

केस दो: एक महीने बाद मिली छात्रा को राहत
परीक्षा व्यवस्था की खामी से छात्रा दीप्ति भी एक महीने तक परेशान रही। कक्षा 12 वीं भौतिक विज्ञान में होनहार छात्रा के सबसे कम अंक आए। जबकि सभी विषयों में प्रथम श्रेणी के अंक थे। भौतिक विज्ञान में कम अंक आने पर शिकायत थी। जांच में छात्रा की शिकायत सही मिली ओर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकी।


कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति, चार वर्ष में महज 503 शिक्षकों को किया डिबार

संवीक्षा में अधिक अंक की त्रुटि एवं अन्य प्रकार की त्रुटि पाये जाने पर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के द्वारा शिक्षकों को एक वर्ष के लिए डिबार किया जाता हैं व निर्धारित टोकन राशि की कटौती की जाती है। इसके साथ ही अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए निदेशक को लिखा जाता है। चार वर्ष में हजारों वि?द्यार्थियों के साथ हुई गलफत के बाद भी बोर्ड महज 503 शिक्षकों को ही डिबार कर सका। वर्ष 2018 में माध्यमिक परीक्षा में 234 व उच्च माध्यमिक परीक्षा में 114 शिक्षकों के विरूद्ध कार्रवाई की। बोर्ड का कार्रवाई सिस्टम इतना लचर है कि 2019 में हुई माध्यमिक परीक्षा में हुई गलती वाले शिक्षकों को अभी तक डिबार नहीं किया जा सका।

एक्सपर्ट व्यू:
राजस्थान बोर्ड का पूरे देश में अपना एक अलग स्थान है। ऐसे परीक्षकों की लापरवाही कहे या बोर्ड की चूक। आखिरकार खामियाजा विद्यार्थियों को मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से भुगतना पड़ता है। पिछले कुछ सालों में इस तरह की शिकायत काफी बढ़ी है। ऐसे में बोर्ड प्रशासन को इस पर चिन्तन करना चाहिए कि आखिकार इस तरह की चूक कैसे रह जाती है। कक्षा दसवीं और बारहवीं युवाओं के कॅरियर में विशेष महत्व रखती है। कई विद्यार्थी ऐसे भी है जिनका भविष्य इस लापरवाही की वजह से खराब भी होता है।

शंकरलाल बगडिय़ा, मानद निदेशक, नवजीवन साइंस स्कूल

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