हे राम... 3 शवों के साथ आक्रोशित जनता सड़कों पर, प्रशासन को जांच रिपोर्ट का इंतजार

Sikar Cylinder Blast : संवेदनशील और पारदर्शी सरकार का दावा करने वाली कांग्रेस के दावे सीकर जिला प्रशासन के आगे बौने साबित हो रहे हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री एक तरफ जहां पेंशन स्वीकृति के मामले में कोटा कलक्टर को फटकार लगाते है दूसरी तरफ सीकर जिला मुख्यालय पर सोमवार को तीन लाशों के साथ आक्रोशित जनता सडक़ पर प्रदर्शन करती रही।

By: Naveen

Published: 18 Feb 2020, 11:29 AM IST

सीकर.

Sikar Cylinder Blast : संवेदनशील और पारदर्शी सरकार का दावा करने वाली कांग्रेस के दावे सीकर जिला प्रशासन के आगे बौने साबित हो रहे हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री एक तरफ जहां पेंशन स्वीकृति के मामले में कोटा कलक्टर को फटकार लगाते है दूसरी तरफ सीकर जिला मुख्यालय पर सोमवार को तीन लाशों के साथ आक्रोशित जनता सडक़ पर प्रदर्शन करती रही। लेकिन जिम्मेदार अफसर श्याम मेले की तैयारियों के लिए बाबा श्याम की शरण में चले गए। सिस्टम से परेशान लोगों का यही सवाल था कि क्या आज ही खाटू बैठक लेना जरूरी था। जिला कलक्टर व डीएसओ तीन दिन बाद भी हादसे की असली वजह तक नहीं पहुंच सके। दोपहर को शिक्षा राज्य मंत्री ने जिला कलक्टर सहित अन्य अधिकारियों को फोन किया तो मुख्यमंत्री सहायता कोष से एक-एक लाख की स्वीकृति जारी हुई। इधर, विवाहिता की मौत के मामले में भी आक्रोशित लोग सडक़ पर आ गए। इस कारण शहर में दिनभर यातायात व्यवस्था बेपटरी रही। तीसरा मामला खंडेला से जुड़ा है जहां भी सोमवार को धरना जारी रहा।

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मंत्री ने फोन किया तो दो घंटे में जारी की सहायता राशि
शहर में हुए गैस हादसों से तीन मौतों के बाद भी जिला प्रशासन की संवेदना सोमवार तक नहीं जगी। सोमवार दोपहर को शिक्षा राज्य मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने अधिकारियों को इस मामले की जांच में ढि़लाई बरतने पर फटकार लगाई। डोटासरा ने जिला कलक्टर यज्ञमित्र सिंह देव व एडीएम जयप्रकाश को फोन कर मामले की जांच रिपोर्ट नहीं आने का कारण भी पूछा।

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अधिकारियों ने जल्द सहायता राशि दिलवाने की बात कही तो मंत्री ने कहा कि आपके नियमों की खानापूर्ति होती रहेगी, पहले पीडि़त परिवारों को सहायता राशि दिलाओ। डोटासरा ने अधिकारियों को शाम तक ही सहायता राशि पीडि़त परिवारों को दिलाने की बात कही है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि कंपनी तो नियमों का हवाला देकर इस तरह के मामलों में टालमटोल करती रहेगी। लेकिन यह तो सबके सामने है कि हादसा गैस सिलेंडर की वजह से हुई है। इसकी जांच में इतना समय लगना ही नहीं चाहिए था। इसके बाद दो घंटे बाद जिला कलक्टर ने मुख्यमंत्री सहायता कोष से शेखपुरा हादसे के दो मृतकों के परिजनों को एक-एक लाख रुपए की सहायता राशि स्वीकृत कर दी।

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सभी मामलों में प्रशासनिक लापरवाही
1. गैस हादसे के बाद भी जिला कलक्टर, डीएसओ सहित अन्य अधिकारियों ने जनता के सामने लापरवाही का कारण अब तक उजागार नहीं किया। इस कारण लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
2. पीडि़त परिवारों के रहने के अस्थाई इंतजाम कराने की बजाय प्रशासन ने जांच को ही कंपनियों के हवाले कर दिया।
3. मुख्यमंत्री सहायता कोष से सहायता राशि देना स्थानीय जिला प्रशासन का काम था। लेकिन उसकी याद भी शिक्षा मंत्री को फोन कर अधिकारियों को दिलानी पड़ी।
4. विवाहिता की हत्या के मामले में पुलिस धरने पर बैठे लोगों को समझाने में पूरी तरह विफल रही। ग्रामीणों से पहले दिन कोई वार्ता ही नहीं हुई। इस कारण सोमवार को आंदोलन और उग्र ले गया।
5. खंडेला में चल रहे आंदोलन के मामले में प्रशासनिक लापरवाही के चलते आंदोलन की डोर दिनों दिन मजबूती होती गई। प्रशासन ने यहां ने आंदोलनकारियों से वार्ता करने के बजाय अपने चैम्बर से रणनीति बनाने में बने रहे।

शहर में हुए दोनों हादसों में कंपनियों ने माना कि सिलेंडर की वजह से हादसा हुआ है। लेकिन लीकेज सहित अन्य कारणों की तकनीकी विंग की टीम जांच में जुटी है। बीपीसीएल व एचपीसीएल कंपनियों ने छह-छह लाख रुपए के प्रस्ताव बीमा कंपनी को भिजवा दिए हैं। -जयप्रकाश, एडीएम, सीकर

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