कड़वी हकीकत : देश में रोल मॉडल सीकर नगर परिषद सफाई में फिसड्डी

कड़वी हकीकत : देश में रोल मॉडल सीकर नगर परिषद सफाई में फिसड्डी

Vishwanath Saini | Publish: Sep, 07 2018 07:23:17 PM (IST) Sikar, Rajasthan, India

www.patrika.com/sikar-news/

सीकर. देश में कचरा निस्तारण के लिए रोल मॉडल बनाने नगर परिषद सीकर में ही सफाई के मामले में फिसड्डी है। हाल यह है कि शहर के दो दर्जन से ज्यादा वार्डों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चौपट है। न तो वार्डों में नियमित रूप से ऑटोटीपर जाते हैं और न ही कचरा पात्रों को नियमित रूप से बदला जाता है। नतीजन कचरा पात्रों की बजाए कचरा बाहर फैला रहता है। निराश्रित मवेशियों के जमावड़े के कारण वहां से सुरक्षित पैदल तक नहीं निकला जा सकता है। हालांकि परिषद का दावा है कि शहर के सभी वार्डों में नियमित रूप से सफाई होती है। गौरतलब है कि नगर परिषद ने हाल में जीरो वेस्ट मॉडल बनाया है। जिसके तहत जागरुकता अभियान चलाया जाएगा।

यह है हकीकत


नगर परिषद क्षेत्र में घर-घर कचरा उठाने के लिए ५९ ऑटो टिपर है। हकीकत यह है इन सभी ऑटो टीपर पर नियमित रूप से स्थाई चालक तक नहीं लगा पाई है। एेसे में ठेके पर लिए गए चालकों के भरोसे डोर टू डोर कचरा उठाने का काम करवाया जाता है। सूत्रों के अनुसार रोजाना औसतन पांच से छह चालक नहीं आते हैं। जिससे संबंधित क्षेत्र की सफाई व्यवस्था ही ठप होती है। यही कारण है कि शहर में कचरा संग्रहण गति नहीं पकड़ पाया है। वार्ड पार्षदों की माने तो शहर में पचास वार्ड है लेकिन ऑटो टीपर महज ४० वार्डों तक ही पहुंच पाते हैं। गौरतलब है कि शहर में रोजाना औसतन सौ टन से ज्यादा कचरा होता है। परिषद इस कचरे को ऑटो टीपर, ट्रेक्टर आदि संसाधनों से नानी बीड में गिरवाती है।


अब यह है रोल मॉडल

नगर परिषद की ओर से कचरा निस्तारण के लिए रोल मॉडल बनाया गया है। जिसे सीकर मॉडल ऑफ मिन्यूसिपल सोलिड वेस्ट नाम दिया गया है। शहर में कचरे का प्रमुख स्रोत घर, दुकान और मॉल्स, सेमीबल्क जनरेटर, मैरिज होम्स, बल्क जनरेटर और अस्पताल और डिस्पेंसरी हैं। इनसे गीला कचरा, सूखा कचरा और संक्रामक कचरा है। इनमें घरों से किचन वेस्ट के रूप में छह दिन तक रोजाना गीला कचरा उठाया जाएगा। दुकानों-मॉल्स और ज्यूस, रेस्टोरेंट और होटलों से छह दिन तक रोजाना दो बार गीला और सूखा कचरा उठेगा। मैरिज हॉल, धर्मशालाओं जैसे संस्थानों से जरूरत के अनुसार गीला कचरा उठेगा। कोचिंग संस्थानों जैसी व्यवसायिक संस्थाओं , अस्पताल और डिस्पेंसरियों पर ही गीला कचरा कम्पोस्ट यूनिट लगवाई जाएगी। यहां से रोजाना सूखा कचरा उठाया जाएगा। घरों और दुकानों से सप्ताह में एक दिन सूखा कचरा और संक्रामक कचरा उठाया जाएगा। इसके लिए ऑटो टीपर पर लाल रंग का बाक्स बनाकर कचरा संग्रहण होगा।


अब बढ़ाएंगे आय

शहर में गीला कचरा कम्पोस्ट करने के लिए अलग-अलग जगह चिन्हित कर कम्पोस्ट यूनिट बनाई जाएगी। जहां रोजाना काम होगा। इस कम्पोस्ट को खाद के रूप में किसानों को बेचा जाएगा। सूखे कचरे को प्राथमिक संग्रहण केन्द्र पर अलग कर लिया जाएगा। इसके बाद मशीनों के जरिए सोलिड रूप देकर बनाया जाएगा। जिसके जरिए सीमेंट रूपी ब्लॉक तैयार होंगे जो ईधन के रूप में काम आएंगे। परिषद की ओर से नानी बीड में आरडीएफ यूनिट में देरी के कारण फिलहाल तैयार ब्लॉक्स को निजी कम्पनियों को बेचा जाएगा। संक्रामक कचरे के निरस्तारण के लिए परिषद की ओर से इंसीनेटर प्लांट लगवाया जाएगा।

इनका कहना है...
शहर में सफाई व्यवस्था ठीक है। जहां नियमित रूप से सफाई हो रही है। वहां के लिए सफाई निरीक्षक को सख्त निर्देश दिए जाएंगे। शहर के लिए कचरा निस्तारण के लिए रोल मॉडल को तैयार किया लिया गया है। परिषद की ओर से जागरुकता अभियान चलाया जाएगा। जल्द ही यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।

- श्रवण कुमार बिश्नोई, आयुक्त नगर परिषद सीकर

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned