MP Assembly Election 2018: देवसर में किसको मिलेगा टिकट, किसका दावा, क्यों मजबूत.. पढ़िए पूरी रिपोर्ट

MP Assembly Election 2018: देवसर में किसको मिलेगा टिकट, किसका दावा, क्यों मजबूत.. पढ़िए पूरी रिपोर्ट

suresh mishra | Publish: Sep, 09 2018 06:09:29 PM (IST) Singrauli, Madhya Pradesh, India

MP Assembly Election 2018: देवसर में किसको मिलेगा टिकट, किसका दावा, क्यों मजबूत.. पढ़िए पूरी रिपोर्ट

सिंगरौली। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव-2018 की तिथि घोषित होने में कुछ ही महीने शेष है। लेकिन सिंगरौली जिले में सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। देश की ऊर्जाधानी कही जाने वाले सिंगरौली जिले की देवसर सीट में इस बार भाजपा को कड़ी चुनौती मिल सकती है। अभी देवसर विधानसभा सीट से भाजपा के राजेन्द्र मेश्राम विधायक हैं। इस बार के चुनाव में भाजपा को सीधे कांग्रेस से टक्कर मिल सकती है।

क्योंकि कांग्रेस कार्यकाल में प्रदेश के पूर्व मंत्री रहे वंशमणि वर्मा ने 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार को कड़ी टक्कर दी थी। 2018 के चुनाव में पुन: विधायक बनने की मंशा पाल रहे वर्मा क्षेत्र में लगातार सक्रिय है। जो भाजपा का चुनावी गणित बिगाड़ सकते है। वहीं बसपा, सपा और आम आदमी पार्टी भी दोनों ही दलों के समीकरणों को बिगाडऩे के लिए तैयार बैठे हैं। सपाक्स ने चुनाव में दावेदारी जताकर मामले को और रोचक बना दिया है।

देवसर: पूर्व मंत्री भी टिकट चाह रहे
यहां भाजपा के राजेन्द्र मेश्राम ने पूर्व मंत्री वंशमणि वर्मा को करीब 28 हजार मतों से हराकर विधायक बने थे। मेश्राम इस बार फिर टिकट के दावेदार हैं। इधर, कांग्रेस से वंशमणि वर्मा भी ताल ठोंक रह हैं। इधर, भाजपा से सुभाष वर्मा भी जोर-आजमाइश को तैयार हैं।

विधानसभा चुनाव 2013 के वोट
- भाजपा: राजेन्द्र मेश्राम 60 हजार
- कांग्रेस: वंशमणि वर्मा 32 हजार

मजबूत दावेदार भाजपा
- राजेन्द्र मेश्राम- वर्तमान विधायक
- सुभाष वर्मा-पूर्व विधायक रामचरित्र वर्मा के पुत्र

ये हैं चार मुद्दे
विस्थापन एवं पुनर्वासन, स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव, बेरोजगारी, बदहाल सड़कें

मजबूत दावेदार कांग्रेस
- वंशमणि वर्मा- पूर्व मंत्री
- बालेन्द्र वर्मा-कार्यकर्ता

ये भी ठोंक रहे ताल
- राजकुमार साकेत, रामभजन साकेत, सविता साकेत

जातिगत समीकरण
- अनुसूचित जाति, आदिवासी, साहू और ठाकुर वोट ज्यादा हैं। राजेन्द्र मेश्राम को अपनी जाति के वोटरों पर भरोसा है।

चुनौतियां
- परंपरागत वोटरों को एकजुट रखना।
- पार्टी में आपसी फूट व कार्यकर्ताओं में निरंतरता का अभाव।

विधायक की परफॉर्मेंस
- विकास कार्य भी किए हैं। 1284 करोड़ की गोंड़ परियोजना का शिलान्यास, तीन नये महाविद्यालय की स्थापना, बेराजगारी दूर करने में विफल रहे हैं।

बदहाल सड़कें, पेयजल की समस्या और स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर व्यवस्था नहीं है।
-श्यामकार्तिक चौबे, किसान

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