सिरोही

Chaitra Navratri 2024: राजस्थान में यहां गिरे थे मां के अधर, दर्शन के बिना तीर्थ अधूरा, जानें कहानी

देश के 51 शक्तिपीठों में से एक आबू के पहाड़ों के मध्य गुफा में विराजित कात्यायनी मां अधर देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़नी आरंभ हो गई है।

सिरोहीApr 09, 2024 / 02:21 pm

Santosh Trivedi

Chaitra Navratri 2024: पर्यटन स्थल माउंट आबू की प्राचीन मंदिरों, देवालयों, तप स्थलियों के कारण धार्मिक जगत में एक अलग ही पहचान है। जिसके चलते देश के 51 शक्तिपीठों में से एक आबू के पहाड़ों के मध्य गुफा में विराजित कात्यायनी मां अधर देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़नी आरंभ हो गई है।


मंदिर के प्रधान पुजारी भरत रावल ने बताया कि मां कात्यायनी की मां दुर्गा के छठे रूप की पूजा होती है। चैत्रीय नवरात्रों के चलते घट स्थापन, वेदी निर्माण, नवमी तक अखंड ज्योति प्रज्वलन व सप्त चंडी महायज्ञ आयोजन सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।

ऋषियों को मिला अभय आशीर्वाद
पुराणों के अनुसार यहां पर मां के अधर गिरे थे, जिसकी वजह से ये स्थान अधर देवी मंदिर ( Adhar Devi Temple ) के नाम से प्रसिद्ध हुआ। अर्बुदांचल में तप करने वाले ऋषियों को शुंभ नामक दैत्य अत्यधिक परेशान करता था और हर समय उनके धार्मिक जप तप में बाधाएं डालकर उन्हें भयभीत करता था। मां की आराधना करने पर ऋषियों को अभय आशीर्वाद मिला।

भक्त 370 सीढ़ियां चढ़कर करते है दर्शन
370 सीढ़ियां चढ़कर श्रद्धालु आस्था स्थल अधर देवी के दर्शन करते हैं। दर्शनार्थी जब तक अर्बुदा देवी मंदिर ( Arbuda Devi Temple ) के दर्शन नहीं कर लेते, तब तक उनका तीर्थ पूरा नहीं माना जाता।

वर्षभर होते हैं विभिन्न महोत्सव
परमार राजपूतों की कुल देवी का अक्षय तृतीया को वार्षिक उत्सव मनाया जाता है। वर्ष के चारों नवरात्रों पर यहां अखण्ड चंडी पाठ, नवचंडी यज्ञ, अक्षय तृतीया पर वार्षिकोत्सव, चैत्रीय पूनम पर ध्वजादंड सहित विभिन्न महोत्सवों का आयोजन होता है।

घर के सारे दूध को चढ़ाता राजपूत समाज
आषाढ़ महीने में मानसून के मध्य सावन में दो बार राजपूत समाज के लोग घर में उपलब्ध सारे दूध को माता के मंदिर में चढ़ाकर खीर प्रसादी बनाते हैं।

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