
हाल ही सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एक निर्णय के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) की सुनवाई के दौरान युवती से छेड़छाड़ करने के आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। उक्त व्यक्ति के विरुद्ध आईपीसी की धारा 354 के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसलिए बेंच ने अग्रिम ज़मानत देने से इंकार कर दिया।
क्या है धारा 354
आइपीसी की धारा 354 इज्जत खराब करने के इरादे से महिला का उत्पीडऩ या आपराधिक बल प्रयोग और 354A यौन उत्पीडऩ से जुड़ी है। बेंच ने सार्वजनिक स्थान पर माता-पिता के सामने छेडऩे और धमकाने को गंभीर माना।
हाल ही केरल उच्च न्यायालय ने माना है कि किसी भी प्रकार का यौन उत्पीड़न या व्यवहार जो अस्वीकार्य है, वह कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत 'यौन उत्पीड़न' की परिभाषा के अंतर्गत आएगा। जस्टिस एएम शफीक की पीठ और जस्टिस पी गोपीनाथ की एकल पीठ ने एक कार्यस्थल में एक महिला के खिलाफ यौन उत्पीड़न की अवधारणा पर फैसले (अनिल राजगोपाल बनाम केरल राज्य और अन्य 2017 (5) केएचसी 217) को बरकरार रखते हुए कहा एक एक्सप्रेस यौन अग्रिम, अवांछित व्यवहार से शुरू होनी चाहिए, जिसके पीछे एक यौन स्वर है जिसके बिना अधिनियम 2013 के प्रावधान लागू नहीं होंगे।
Published on:
09 Dec 2020 03:51 pm
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