CORONA MYSTRY : तो इसलिए पैदा होती हैं चीन में महामारी

-एक सदी में 10 बड़ी महामारियों में चार अकेले चीन से पैदा हुई हैं

-Four out of 10 major epidemics in a century have been born from China

-2002 में सार्स ने 8098 लोगों को संक्रमित किया और 17 देशों में 774 लोगों की मौत का कारण बना।

By: pushpesh

Updated: 17 May 2020, 06:17 PM IST

जयपुर.

1957 में एशियाई फ्लू से 15 से 20 लाख लोगों की मौत हुई थी। 2002 में सार्स ने 8098 लोगों को संक्रमित किया और 17 देशों में 774 लोगों की मौत का कारण बना। इसी तरह बर्ड फ्लू और अब कोविड-19 ने पूरी दुनिया में कोहराम मचाया। यानी एक सदी में 10 बड़ी महामारियों में चार अकेले चीन से पैदा हुई हैं। आखिर इनके लिए चीन हॉटस्पॉट क्यों है? डॉॅ. स्टीवन नोवेला ने ’स्केप्टिक्स सेंट्रल चाइना वायरस’ में हाल ही इसके बारे में बताया कि चीन की बड़ी आबादी पशुपालन से जुड़ी है। इनमें काफी संख्या में जानवर मीट मार्केट में पहुंचाए जाते हैं, जहां सफाई का ध्यान नहीं दिया जाता है। ये वायरस उत्पन्न होने और उसके प्रसार का बड़ा जरिया हैं। 2016 में इकोलिटिक्स एलायंस के अध्यक्ष डॉ. पीटर डास्जाक ने बताया कि दक्षिण मध्य चीन वायरस के लिए अनुकूल है। यहां बहुतायत में सूअर और मुर्गी पालन होता है, वह भी कम साफ सफाई और बिना उचित देखभाल के। पशुपालक अपने पशुओं को वेट मार्केट अर्थात मीट मार्केट ले जाते हैं, जहां वे सभी प्रकार के विदेशी जानवरों के संपर्क में आ सकते हैं। विभिन्न प्रजाति के पक्षी, स्तनधारी और सरीसृप किसी भी वायरस की उत्पत्ति और उसके उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) का कारण बन जाते हैं। ये संक्रमण इंसानों में भी आसानी से प्रवेश कर जाता है।

सांस्कृतिक कारण भी हैं
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा कोविड-19 के मामले में भी ऐसा ही हुआ है। कुछ सांस्कृतिक कारणों से भी चीन में ऐसे प्रकोप सामने आए हैं। पत्रकार मेलिंडा लियू ने 2017 में लिखा था कि चीन में लोगों का मानना है कि ताजा मांस अधिक स्वादिष्ट और फ्रिज में रखे मांस की बजाय ज्यादा स्वास्थ्यवद्र्धक होता है। इसी कारण मीट बाजारों में लोगों की भीड़ इंसानों में वायरस के उत्परिवर्तन का कारण बनती है।

पारंपरिक दवा और चिकित्सा पद्धति भी खतरा
बीमार होने पर यहां लोग टीसीएम (पारंपरिक चीनी दवा) की तलाश करते हैं, जहां चिकित्सक नियमित रूप से लक्षणों के आधार पर गलत इलाज करते हैं। फिर एक्यूपंक्चर, हर्बल या पशु आधारित उपचार की पेशकश करते हैं। जो प्रकोप के दौरान मृत्युदर बढ़ाने में सहायक होता है और संक्रमित व्यक्ति को जनता के बीच जाकर और अधिक लोगों को संक्रमित करने का मौका देता है। चीन में बड़ी संख्या में देखी जानी वाली पोस्ट टीसीएम ने पहले ही कई तरह के भ्रामक उपचार लोगों को सुझाए हैं, जिनमें शहद, खोपड़ी में मिलने वाले तरल से इलाज का तरीका बताया जाता है। अब कोरोना में फोर्सीथिया (एक प्रकार की वनौषधि) से इलाज को प्रचारित किया जा रहा है। सवाल ये है कि भविष्य में चीन ऐसे प्रकोप और वायरस से बचने के लिए कोई नीति तैयार करेगा? जिससे ऐसी पद्धति पर रोक लग सके।

गलत सूचनाएं और सेंसरशिप के लिए कुख्यात है चीन
चीन गलत सूचना, गोपनीयता और सेंसरशिप के लिए भी कुख्यात है। जनवरी के शुरुआत में चीन के सरकारी अधिकारियों ने बताया कि नए संक्रमण के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोक दिया गया है। यह सच नहीं था। उसी समय केंद्रीय सरकार ने उन स्वास्थ्य विशेषज्ञों को भी धमकाया, जिन्होंने यह सूचना देने का प्रयास किया। युवा डॉक्टर ली वेनलियांग ने नए कोरोनावायरस के बारे में दूसरों को चेतावनी देने का प्रयास किया तो उन्हें पुलिस की फटकार मिली। इसके बाद ली खुद कोविड-19 के शिकार हो गए।

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