जब सत्या नडेला के पिता ने प्रधानमंत्री नरसिम्हाराव को नहीं बुलाया

जब सत्या नडेला के पिता ने प्रधानमंत्री नरसिम्हाराव को नहीं बुलाया
जब सत्या नडेला के पिता ने प्रधानमंत्री नरसिम्हाराव को नहीं बुलाया

Pushpesh Sharma | Updated: 22 Sep 2019, 06:43:47 PM (IST) स्‍पेशल

बीएन युगांधर 1962 बैच के आइएसएस थे। उन्होंने कई सरकारों में महत्वपूर्ण पदों पर रहकर गरीबों के लिए खूब काम किए। आंध्र प्रदेश में दो रुपए किलो चावल वाली योजना उन्हीं की देन थी

बीएन युगांधर को ज्यादातर लोग सत्य नडेला के पिता के रूप में ही जानते हैं, लेकिन उनका खुद का व्यक्तित्व काफी बड़ा था। वरिष्ठ आइएएस अधिकारी ने कई सरकारों में विभिन्न पदों पर रहते हुए गरीबों की सेवा को अपना मिशन बनाया। उन्हें ऐसे ईमानदार अधिकारी के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने लालफीताशाही को खत्म किया। अविभाजित आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एनटी रामाराव के सचिव के रूप में उन्होंने कई कल्याणकारी योजनाओं को लागू करवाया। इसमें गरीबों के लिए दो रुपए किलो चावल की योजना भी है। 90 के दशक में पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव के रूप में हाशिए पर रहने वाले गरीबों के उत्थान के लिए काम किया। इतना ही नहीं उन्होंने केंद्र से सीधे जिलों में वाटरशेड विकास परियोजनाओं के लिए उल्लेखनीय काम किया। समय-समय पर केंद्र प्रायोजित योजनओं में उन्होंने गरीब का हक पहले रखा।

रसूख को कभी आड़े नहीं आने दिया
युगांधर ने राजनीतिक रसूख को कभी काम में आड़े नहीं आने दिया। 1992 में उनके बेटे सत्या नडेला की शादी में इसी सादगीपसंद सोच के चलते उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हाराव को भी इसमें आमंत्रित नहीं किया। हालांकि राव शादी में पहुंचे और युगांधर से नाराजगी जताई। उस वक्त वे मंत्रालय में सचिव थे। जब सत्या माइक्रोसॉफ्ट सीईओ बने तो उन्होंने इतना ही कहा था कि -हम चाहते हैं बेटा और तरक्की करे।

जब युगांधर ने लगाई कार्ल माक्र्स की तस्वीर
नडेला के पिता ने हैदराबाद में अपने शुरुआती वर्षों में अपने बैडरूम में कार्ल माक्र्स का पोस्टर लगा रखा था। उस वक्त किशोर रहे नडेला की स्कूल टीचर मां को यह पसंद नहीं आया और उन्होंने दूसरी तरफ लक्ष्मीजी की तस्वीर लगा दी। उनके पिता चाहते थे कि बच्चा माक्र्स जैसा बुद्धिमान बने, जबकि उनकी मां की ख्वाहिश थी कि वह सुखी रहे, क्योंकि लक्ष्मीजी सुख-समृद्धि की देवी हैं। सत्या ने अपने पिता से सामाजिक मूल्यों की समझ सीखी।

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