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श्री गंगानगर

कैंसर से पति की मौत के बाद खुद को संभाला, फिर बेटियों की जिम्मेदारी उठाई, किया कामयाब

मुश्किल हालात में बेटियों को बेटा मानकर पढ़ाया-लिखाया, अब दो बेटियां आरएएस

श्री गंगानगरMay 12, 2024 / 12:13 am

Ajay bhahdur

विपरीत हालात में बेटियों को बेटा मानकर पढ़ाया-लिखाया

अनूपगढ़. अमरजीत कौर के साथ उनकी तीन पुत्रियां।

भुवनेश चुघ
अनूपगढ़
. वैसे तो मां के लिए हर पल खास होता है, लेकिन 12 मई का दिन माताओं को समर्पित किया गया है। आज हम आपको एक ऐसी मां के बारे में बता रहे हैं, जिसने 23 साल पहले पति का साथ छूटने बाद बच्चों के लिए मां के साथ-साथ पिता का भी फर्ज निभाया। पति की मौत के बाद अनुकूल परिस्थितयां परिस्थ्तियां विपरीत हो गई, लेकिन अनूपगढ़ के वार्ड 27 निवासी अमरजीत कौर पत्नी महेंद्र सिंह ने अपनी बेटियों को ही अपना बेटा मान कर खूब पढ़ाया-लिखाया और एक अच्छे मुकाम तक पहुंचाया। आज उनकी दो पुत्रियां आरएएस हैं तथा एक पुत्री व पुत्र अपना व्यवसाय कर रहे हैं। वर्ष 1990 में पंजाब से अनूपगढ़ आकर बसे महेंद्र ङ्क्षसह के परिवार के खुशियों के दिन चल रहे थे। वर्ष 1998 में पता चला कि महेंद्र ङ्क्षसह को कैंसर है। तीन साल की बीमारी के बाद 23 मार्च 2001 को महेंद्र सिंह की मौत हो गई। घर की जिम्मेदारी अमरजीत कौर के कंधों पर आ गई। महेंद्र सिंह सरकारी कार्यों के ठेके लिया करते थे,उनके इस व्यवसाय के बारे में उनकी पत्नी को कुछ भी पता नहीं था। पति की मौत के बाद यह काम बंद हो गया। तब उनकी सबसे बड़ी बेटी कमलप्रीत कौर बीए, मझली बेटी गुरप्रीत कौर दसवीं तथा सबसे छोटी बेटी हरप्रीत कौर सातवीं कक्षा में पढ़ रही थी। अनूपगढ़ में ही अमरजीत का पीहर है। रिश्तेदार कमलप्रीत की पढ़ाई छुड़वाकर शादी करने के लिए दबाव बना रहे थे लेकिन उसने पढ़ाई जारी रखी। फिर एक निजी स्कूल में पढ़ाना शुरू किया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी शुरू कर दी।विद्यालय के प्राचार्य राजबहादुर सिंह कुशवाहा ने समय समय पर पढ़ाई के लिए प्रेरित करते हुए उनके आत्म विश्वास को बढ़ाया। कमलप्रीत की मेहनत थी कि उसका चयन सब इंस्पेक्टर राजस्थान पुलिस, केंद्रीय विद्यालय में अध्यापक के पद पर एक साथ हुआ। उसने पुलिस सेवा में कॅरिअर चुना। इसके बाद कमलप्रीत का चयन राजस्थान प्रशासनिक सेवा के रूप में अच्छी रैंक पर हुआ। इस दौरान दूसरी बेटी को भी एमए बीएड करवा कर उसकी शादी करवा दी। उसने ससुराल पक्ष के व्यापार में साथ दिया। वहीं, अमरजीत की एक बेटी ना केवल वर्तमान में व्यापार कर रही है बल्कि अनेक महिलाओं को पैरों पर खड़ा होने के लिए सौंदर्य प्रसाधन कौशल निर्माण कर प्रशिक्षण दे रही है। अमरजीत की सबसे छोटी बेटी ने एमए बीएड नेट की है। उसका चयन द्वितीय श्रेणी के अध्यापिका के रूप में हुआ। इसका वर्ष 2012 में चयन आरएएस के लिए हो गया। अमरजीत कौर ने बताया कि मझली बेटी जहां महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सहायता कर रही हैं। वहीं बड़ी बेटी कमलप्रीत कौर जयपुर में राजस्थान एकाउंट सर्विसेज, सबसे छोटी बेटी हरप्रीत कौर जयपुर में उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां में डिप्टी रजिस्ट्रार है। उसका एक बेटा हरछविंद्र सिंह (हैप्पी) जयपुर में अपना कृषि कार्य देखता है। वह स्काउङ्क्षटग में राष्ट्रपति अर्वाड पा चुका है।

…अब सुकून मिलता है

अमरजीत कौर ने बताया कि पति की मौत के बाद बेटियों को पढ़ाने में परिवार का किसी का साथ नहीं देना। लोगों की छींटाकशी सहना, परिवार के ही लोगों का साथ नहीं खड़े होकर विरोध में खड़े होना। ऐसे कई कारण थे, जिन्होंने संघर्ष को लम्बा और कठिन कर दिया। लेकिन, आज जब अपने बच्चों को आएएस बनकर देश की सेवा करते हुए देखती हूं तो अपने लिए निर्णय पर सुकून मिलता है।

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