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अवैध संबंधों से तंग आकर पत्नी के आशिक की कर दी थी निर्मम हत्या, अब अदालत ने दी उम्रकैद की सजा

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अवैध संबंधों से तंग आकर पत्नी के आशिक की कर दी थी निर्मम हत्या, अब अदालत ने दी उम्रकैद की सजा

श्रीगंगानगर। करीब साढ़े तीन साल पहले चक 3 ई छोटी में अवैध संबंधों को लेकर पत्नी के आशिक की निर्मम हत्या करने के जुर्म में अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास से दंडित किया है। यह निर्णय सोमवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (संख्या-दो) पलविन्द्र सिंह ने सुनाया।

विशेष अपर लोक अभियोजक दिनेश नागपाल ने बताया कि रावला क्षेत्र गांव खानूवाली हाल निवास चरणजीत कौर (25) पत्नी रेशम सिंह मजबी सिख ने 13 जून 2015 को जवाहरनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि उसके पति (30) पुत्र सुखदेव सिंह 12 जून 2015 को एसएसबी रोड पर रहने वाले रणवीर उर्फ सेठी पुत्र खेतपाल मेघवाल के घर पर मीट और शराब पीने की पार्टी में गया था। लेकिन देर रात को उसके किरायेदार ने आकर बताया कि रेशम सिंह की चक 3 ई छोटी में खाली प्लाट में रणवीर उर्फ सेठी ने लोहे के कापे से गला रेतकर हत्या कर दी है।

इसके साथ साथ सेठी ने अपनी 27 वर्षीय पत्नी शारदा के सिर पर भी लोहे के कापे से प्रहार कर गंभीर घायल कर दिया है। यह सूचना मिलते ही वह अपने परिजनों के साथ घटना स्थल पर पहुंची। इस संबंध में पुलिस ने आरोपी गांव मनफूलसिंह वाला निवासी रणवीर उर्फ सेठी पुत्र खेतपाल मेघवाल को गिरफ्तार किया।

सेठी ने पुलिस के समक्ष अपना गुनाह स्वीकारा कि उसकी पत्नी शारदा का रेशम सिंह के साथ अवैध संबंध काफी समय से चल रहा था, समझाइश के बावजूद दोनों नहीं माने। वह चक 3 ई छोटी में किराये पर परिवार के साथ रहता है। रेशमसिंह उसके घर पर शारदा से मिलने आने का सिलसिला जारी रखा। ऐसे में उसने शराब और मीट खिलाने की पार्टी के बहाने रेशमसिंह को बुलाया और उसके किराये के घर के पास खाली प्लाट में ले जाकर रेशमसिंह का गला रेतकर हत्या कर दी। पत्नी शारदा के सिर पर भी लोहे के कापे से प्रहार किए लेकिन वह बच गई। पुलिस ने आरोपी रणवीर उर्फ सेठी को गिर$फतार कर अदालत में चालान पेश किया।

अदालत ने आरोपी रणवीर उर्फ सेठी को दोषी मानते हुए आईपीसी की धारा 302 में आजीवन कारावास व पांच हजार रुपए जुर्माना, धारा 307 में दस साल कठोर कारावास व दो हजार रुपए जुर्माना, धारा 326 में सात साल कठोर कारावास व दो हजार रुपए जुर्माना, धारा 324 में दो वर्ष कठोर कारावास व एक हजार रुपए जुर्माना, धारा 323 में छह माह कारावास व पांच सौ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। इस अदालत में कुल 26 गवाहों ने अपने बयान दर्ज कराए। वहीं 48 दस्तावेज साक्ष्य के तौर पर पेश किए गए।

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