यहीं बस गए लेकिन इतने वर्ष बीत जाने के बावजूद इनकी तरफ किसी का ध्यान नहीं गया। यहां रेलवे की दीवार व नगरपरिषद की दूसरे भवन के बीच करीब आठ-दस फीट की जगह पर अपनी झुग्गियों में रहते हैं। इनके राशनकार्ड, वोटर आईडी कार्ड आदि बने हुए हैं। यहां न तो उनके लिए स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था है। न बिजली है और न आने-जाने के लिए कोई उचित रास्ता है। पानी के लिए इन परिवारों के लोगों को दिनभर इधर-उधर भटकना पड़ता है। इन लोगों का आरोप है कि यदि वे स्टेशन पर पानी लेने जाते हैं, तो उनको वहां से भगा दिया जाता है।