बहनों ने तोड़ा चीन का एकाधिकार, स्वदेशी एवं परंपरागत राखियों से सजाई भाई की कलाई

सोशल मीडिया पर भी दिखी परंपरागत राखियां, पेटीएम पर भी एड

By: Raj Singh

Published: 03 Aug 2020, 11:06 PM IST

श्रीगंगानगर. कोरोना संक्रमण काल में इस बार बहनों ने राखियों में चीन का एकाधिकार तोड़ दिया और बाजारों में अपने भाईयों के लिए केवल परम्परागत राखियां ही खरीदी। इससे चीन निर्मित राखियों की बिक्री जीरो प्रतिशत पर आ गई है। इस बार बहनों ने हाथ से बनी परम्परागत राखियों को ही पसंद किया।


राखी के होलसेलर विक्रेताओं ने बताया कि कोरोना काल व चीन की राखी कम आने की वजह से उनको धंधा मंदा रहने की उम्मीद थी लेकिन जब राखी पर बाजारों में भीड़ उमड़ी तो कोरोना व चीन की राशियों का असर जाता रहा। इस बार भी हर साल की तरह राखी पर कोरोना का असर नहीं पड़ा और जमकर राखियों की बिक्री हुई।

इस बार होलसेलरों के यहां से रिटेलरों ने ग्राहकों की मांग के अनुसार ही स्थानीय हैंडमेड परम्परागत राखियों की मांग ज्यादा रही। व्यापारियों को चीन की राखी भी बिकने की उम्मीद थी लेकिन इनका कारोबार जीरो प्रतिशत पर आ गया है। जिन व्यापारियों के पास पिछले साल की चीन की राखी बची थी, वे इस बार भी बची रही।


इस बार अस्सी प्रतिशत राखियां स्थानीय स्तर पर बनाई गई हैंड मेड व परम्परागत राखियां ही बिकी। राखी पर कोरोना का भी कोई असर नहीं दिखा। बीस प्रतिशत राखियां अहमदाबाद, जयपुर व मुम्बई की भी बिकी है। एक मोटे अनुमान के अनुसार जिले में करीब डेढ़ करोड़ राखियों की बिक्री हुई है। जबकि कोरोना को लेकर पंजाब सीमा पर नाकेबंदी चल रही थी। इससे रिटेलर यहां तक नहीं पहुंच सके।

यदि यह नाकेबंदी पर पास अनिवार्यता दो दिन पहले खोल दी जाती तो राखी की बिक्री बढ़ सकती थी। लेकिन इसके बावजूद भी राखी की जमकर बिक्री हुई। व्यापारियों ने बताया कि प्रशासन की ओर से रविवार को चार बजे तक के लिए बाजार खोलने की छूट दी थी, जिसके चलते जमकर राखियों की बिक्री हुई।


सोशल मीडिया व पेटीएम के एड में भी परम्परागत राखी दिखी
- राखी के होलसेलरों ने बताया कि इस बार लोगों ने चीन की राखियों को बिलकुल ही नकार दिया है। स्थानीय परम्परागत राखियों का बोलबोला रहा है।

यहां तक की सोशल मीडिया पर भेजे जा रहे राखियों के फोटोज में भी परम्परागत राखियां ही दिखाई दे रही हैं। उन्होंने बताया कि पेटीएम के एड में परम्परागत राखी का एड देखा गया है।
इनका कहना है
- राखी बिक्री पर कोरोना का कोई असर नहीं रहा। जमकर स्वदेशी व परम्परागत राखियों की बिक्री हुई है। एक अनुमान के अनुसार जिले में डेढ़ करोड़ से अधिक राखी बिकी हैं।

इससे चीन की राखियां बाजार से बाहर हो गई। यहां तक की सोशल मीडिया व पेटीएम के एड पर भी स्वदेशी व परम्परागत राखियां की फोटो ही नजर आई है।
- सीए रोहित गांधी, ***** सेलर रामदेव ट्रेडिंग कंपनी सदर बाजार श्रीगंगानगर

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