शहरों की सरकार पर गहलोत सरकार मेहरबान, सड़कों की सेहत ठीक करने के लिए खोला खजाना

Gehlot government was kind to the government of the cities, opened treasury to improve the health of the roads- 34 नगर परिषद और 169 नगर पालिकाओं पर एक हजार करोड़ रुपए का बजट किया मंजूर.

By: surender ojha

Published: 01 Aug 2021, 10:22 PM IST

श्रीगंगानगर. प्रदेश में सियासी संकट के बादल छंटने के आसार होने की संभावनाओं के बीच राज्य सरकार ने शहरों में जजज़्र हो चुकी सड़कों को सुधारने के नाम पर अब दरियादिली दिखाई है।

सरकार ने करीब एक हजार करोड़ रुपए का बजट मंजूर कर दिया है। इसमें प्रदेश के 10 नगर निगम, 34 नगर परिषद और 169 नगर पालिकाएं शामिल है। प्रत्येक नगर निगम को करीब 19 करोड़ रुपए, नगर परिषद को छह करोड़ और नगर पालिका को चार करोड़ का बजट खचज़् करने का प्रावधान रखा गया है।

इससे श्रीगंगानगर जिले की नौ नगर पालिकाओं में चार चार करोड़ रुपए प्रत्येक पालिका और एक नगर परिषद में छह करोड़ रुपए कुल 42 करोड़ रुपए का बजट सड़कों की मरम्मत के लिए खचज़् किया जाएगा।

स्वायत्त शासन विभाग जयपुर ने मुख्यमंत्री की ओर से वित्तीय वषज़् 2021-22 की बजट घोषणा के रूप में एक हजार करोड़ रुपए का यह बजट दिया है। स्वायत्त शासन विभाग के शासन सचिव भवानी सिंह देथा ने यह आदेश जारी किए है।

यह बजट नगर निगम, नगर परिषद या नगर पालिका की बजाय सावज़्जनिक निमाज़्ण विभाग की ओर से खचज़् किया जाएगा। इस आदेश में बताया गया है कि नगर निगम एरिया में तीस किमी लंबी दूरी की सड़क का निमाज़्ण हो सकेगा।

वहीं नगर परिषद क्षेत्र में बीस किमी रोड और नगर पालिका क्षेत्र में दस किमी लंबी सड़क का निमाज़्ण कराया जाएगा। इन सड़कों के लिए प्रस्ताव चार महीने पहले माचज़् में जिला कलक्टर की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान प्रत्येक विधायक या जनप्रतिनिधियों की राय के अनुरुप लिए जा चुके है। स्वायत्त शासन विभाग ने इस बजट को खचज़् करने के लिए अलग अलग श्रेणियां बनाई है।

प्रदेश की 10 नगर निगमों को 194 करोड़ 44 लाख रुपए का बजट दिया है। वहीं प्रदेश की 34 नगर परिषद को 200 करोड़ 20 लाख 51 हजार रुपए का बजट का प्रावधान रखा है।

इसके साथ साथ राज्य की 169 नगर पालिकाओं के लिए 610 करोड़ 48 लाख 40 हजार रुपए का बजट खचज़् का प्रस्ताव मंजूर किया है। इसके लिए बकायदा तीन अधिकारियों की कमेटी भी गठित की गई है।

अधिकारियों की माने तो प्रदेश में पायलट और गहलोत खेमे के बीच चल रहे सियासी संकट को देखते हुए सरकार ने यह निणज़्य लिया है। इससे विधायकों की नाराजगी को दूर करना है।

विधायको से ही जजज़्र सड़कों के प्रस्ताव मांगे गए थे। इन सड़कों को दुरुस्त करने के लिए नगर पालिकाओं, नगर परिषद या नगर निगमों में इतना बजट नहीं था।

वहीं कई स्थानीय निकायों में विपक्ष का बोडज़् होने के कारण सत्तारुढ़ विधायकों को सड़क दुरुस्त कराने के लिए मुख्यमंत्री तक अपनी फरियाद दी गई थी। ऐसे में विधायकों को संतुष्ट करने के लिए राज्य के बजट में इसकी बकायदा घोषणा भी की गई।

surender ojha Reporting
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