Video: पुराने कैमरों को समझा कबाड़, कम हुए कद्रदान

Sonakshi Jain

Publish: Oct, 13 2017 06:10:51 (IST)

Sri Ganganagar, Rajasthan, India
Video: पुराने कैमरों को समझा कबाड़, कम हुए कद्रदान

गुजरात का संजय कर रहा है इक

श्रीगंगानगर। पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें भले ही आज की रंगीन फोटो को गुणवत्ता के मामले में पीछे छोड़े लेकिन नई तकनीक के आने के बाद पुराने कैमरों को कबाड़ समझा जाने लगा है। ऐसे लोग कम ही हैं जो इनकी कद्र करते हैं। गुजरात के संजय पटेल कई सालों से देश भर में घूम-घूमकर पुराने कैमरों को कर रहे हैं। पुराने कैमरों की तलाश में संजय श्रीगंगानगर पहुंचे हैं, यहां से शुक्रवार को लौटने से पहले उन्हें निराशा हाथ नहीं लगी। पुराने फोटोग्राफरों के यहां ढाई-तीन दशक पहले तक काम आने वाले कई कैमरे मिल गए। संजय ने इनकी रकम लगाई और खरीद लिया। क्या करेंगे इनका? सवाल पर बोले कि फोटोग्राफी का प्रशिक्षण देने वाले कई संस्थानों को इनकी दरकार है। फोटोग्राफी को महत्व देने वाले ऐसे कुछ लोग आज भी हैं जो पुराने कैमरों को सहज कर रखना चाहते हैं।

 

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संजय के अनुसार हनुमानगढ़ सहित कई शहरों में उन्हें यह जानकर दुख हुआ कि पुराने कैमरों को कबाड़ के भाव बेच दिया गया, कुछ ने तो वैसे ही फेंकने की बात बताई। चेन्नई एवं गुडग़ांव में दो शख्स ऐसे हैं जो फोटोग्राफी की पुरानी तकनीक को जिंदा रखे हुए हैं। कोलकाता में भी पुराने कैमरों के कद्रदान हैं। उनके अनुसार गोवा, उत्तरप्रदेश, पंजाब एवं मध्यप्रदेश में अधिकतर जगह पुराने कैमरों की तलाश में खाली हाथ नहीं लौटना पड़ा वहीं ऐसे शहरों की संख्या अधिक हैं, जहां पुराने कैमरे ढूंढे ही नहीं मिले। संजय का मानना है कि नई तकनीक एवं रंगीन फोटो का जमाना आने के बाद प्लेट कैमरा, वन ट्वंटी, 2 बी, 35 एमएम, वुडन कैमरों की पूछ नहीं के बराबर रह गई है।

 

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सेल्फी ने किया बिलकुल कबाड़ा
वरिष्ठ फोटोग्राफर किशोरीलाल धींगड़ा के अनुसार मोबाइल में शुरू हुई सेल्फी तकनीक ने तो फोटोग्राफी का बिलकुल कबाड़ा ही कर दिया है। इससे किसी दूसरे की जरूरत ही नहीं पड़ती, लोग अपने आप फोटो खेंच कर काम चला लेते हैं। अब गुणवत्ता की तरफ विशेष ध्यान नहीं है, बस स्मृति के लिए फोटो होनी चाहिए। मोबाइल से वीडियो तक बनाए जाने लगे हैं, ऐसे में फोटोग्राफर की जरूरत कम महसूस होती है।

 

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चल रहे हैं सरकार के सहारे
कई फोटोग्राफरों के अनुसार उनका काम सरकार के सहारे ही अधिक चल रहा है। विवाह आदि अवसरों पर भी फोटोग्राफी करवाना कम हुआ है, फोटो बनवाई कम जाती है पेन ड्राइव, कम्प्यूटर आदि में सेव अधिक रखी जाती है। सरकारी कार्यों, आवेदनों में फार्म पर फोटो चिपकाना अनिवार्य होने से फोटो बनवाई जाती है। जिस दिन यह सारा काम ऑन लाइन हो जाएगा, फोटोग्राफी व्यवसाय पर संकट और बढ़ जाएगा।

 

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कैमरे को कैद करता कैमरा
श्रीगंगानगर में शुक्रवार को रविंद्र पथ स्थित एक स्टूडियो पर पुराने कैमरे को देखकर कई जने ठहर गए। नई पीढ़ी को यह अजूबे से कम नहीं लगा। इस कैमरे के साथ खुद को कैमरा में कैद करवाने के कई दृश्य भी नजर आए। पुराने कैमरे को बेचने वाले फोटोग्राफर का कहना था कि अब यह बिलकुल नहीं चलता। काम नहीं आने के कारण इसे बेचना ही उचित समझा है। इसी के साथ उनका कहना था कि पुराने कैमरे के साथ काम करने का अपना ही आनंद था।

 

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