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नागौर

तलाक बिन लिव इन रिलेशन तो प्रेम-विवाह बाद भी टेंशन

– पुलिस करे तो क्या, प्रेम-प्रसंग में भागी युवती हो या विवाहिता, दस्तयाबी के बाद भी नहीं जाना चाहती घर
-प्रेम विवाह करने वाले एसपी से मांग रहे सुरक्षा, केवल दस्तयाब करना पुलिस के अधिकार क्षेत्र में

नागौरApr 21, 2024 / 10:56 am

Sandeep Pandey

crime news
नागौर. अपराध से इतर मामलों ने भी पुलिस को उलझा कर रखा है। खास तौर से प्रेम विवाह हो या फिर घर से विवाहिता/युवती अथवा नाबालिग का घर से लापता हो जाना। अब ऐसे मामलों में पुलिस का किरदार ‘ विलेन ‘ की तरह नजर आ रहा है। कुछ करे तो फंसे और कुछ ना करे तो भी। प्रेम-प्रसंग के चलते घर से भाग जाने पर परिजनों की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर भी पुलिस को फटकार झेलनी पड़ रही है।
सूत्रों के अनुसार नागौर (डीडवाना-कुचामन) जिलेभर की यही हकीकत सामने आई है। पुलिस में दर्ज गुमशुदगी हो या फिर बहला-फुसलाकर अपहरण अथवा घर से जेवरात-नकदी ले जाने के, अधिकांश मामलों में पुलिस की कड़ी मशक्कत भी कुछ खास हासिल नहीं कर पाती। दस्तयाबी को सफलता मान भी लो तो भी परिजनों तक संबंधित को पहुंचाना तक नियम-कायदे से ऊपर चला गया है। लिव-इन-रिलेशन सहित अन्य प्रेम संबंध में पुलिस का दखल पूरी तरह बंद हो चुका है। ऐसे मामलों की बरसों जांच-पड़ताल करने वाले पुलिस अफसर तक कबूलते हैं कि नए जमाने में नए तौर-तरीकों के बीच नए नियम-कायदों के चलते सबकुछ उनके हाथ से छिटक गया है।
कुछ समय पहले नौकरी से रिटायर हुए पुलिसकर्मी रामचंद्र का कहना है कि बरसों पहले मोबाइल जैसी सुविधाएं नहीं थी, इसके बाद भी भागने वाली नाबालिग हो या बालिग को जल्द पकड़ लिया जाता था। अब आलम यह है कि पति लिखवाता है पत्नी के अपहरण की रिपोर्ट, बाद में वो किसी के साथ लिव इन रिलेशन में रहती मिलती है। ऐसे मामलों में कुछ नहीं कर पाती पुलिस, वो बालिग है, इच्छा के अनुसार पति के साथ नहीं रहना चाहती। ऐसा ही कई मामले महिला की ओर से पति के खिलाफ दर्ज कराए जाते हैं। होता कुछ नहीं है, बयानबाजी के बाद वो अपने हिसाब से जीने को स्वतंत्र हो जाते हैं। यही मामला बालिग युवती का हो या फिर विवाहिता का। अब पुलिस ऐसे मामलों में क्या करें?
ऐसे-ऐसे मामले, क्या करें पुलिस

राज्य के बाहर किसी दूसरे शहर में नौकरी करने वाले युवक ने पुलिस को बताया कि उसकी पत्नी वहीं किसी और के साथ रहने लगी है। समझाइश के बाद भी नहीं आ रही। पुलिस गई भी पर बाद में नतीजा सिफर। अपहरण के मामले में दस्तयाब करने के बाद युवती ने कोर्ट में बयान दे दिया कि वो माता-पिता के साथ नहीं रहेगी, प्रेमी के साथ जाएगी। अदालत ने उसे हरी झंडी दे दी। बेटी के अपहरण का मामला दर्ज कराया, बाद में बेटी ने मर्जी से जाने की बात कह दी। ऐसे अनगिनत मामलों में गुमशुदगी पर पुलिस को कोई क्रेडिट नहीं मिलता, बल्कि कभी परिजन तो कभी बालिका/युवती अथवा विवाहिता उसे विलेन समझने लगते हैं। पुलिस खुद कबूल करती है कि नाबालिग को छोड़ दें तो अधिकांश मामलों में सब उनकी मर्जी से होता है और कानूनन उन्हें इसकी पूरी स्वतंत्रता है।
प्रेम-विवाह के बाद पुलिस से गुहार

प्रेम विवाह कितने हो रहे हैं, इसका ठीक-ठाक आंकड़ा तो पुलिस के पास भी नहीं है। बावजूद इसके हर दूसरे दिन प्रेम विवाह करने वाला जोड़ा एसपी के पास जान की सुरक्षा के लिए पहुंच रहा है। हर मामले में युवती के घर वालों से ही खतरा होने की आशंका जताई जाती है हालांकि नागौर में ऑनर किलिंग जैसा कोई मामला हाल-फिलहाल नजर नहीं आता। नागौर एसपी नारायण टोगस को आए लगभग सात माह होने आए और अब तक 113 प्रेमी युगल ने यहां गुहार लगाई। यह भी सामने आया कि चालीस फीसदी प्रेम विवाह भी असफल रहते हैं।
एक नजर इस पर भी

घर से गायब होने वाली नाबालिग बालिकाओं की संख्या में तेजी आई है। प्रेम-प्रसंग का झूठा झांसा देकर बालिकाओं को बरगलाया जा रहा है। करीब सत्तर फीसदी मामलों में परिजन थाने पहुंचकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराते हैं तो उसमें शक के आधार पर किसी भगवैया का नाम तक दर्ज कराते हैं। तीस फीसदी ही मामलों में बिना किसी पर शक जताए बालिकाओं की गुमशुदगी दर्ज की जाती है।
इतनों ने छोड़ा घर, पुलिस ने तलाशा

आंकड़ों पर नजर डालें तो पंद्रह से साढ़े सत्रह साल तक की बालिकाएं घर से भाग रही हैं। करीब आठ साल में नागौर (डीडवाना-कुचामन) जिले में करीब साढ़े आठ सौ नाबालिग बालिकाओं ने घर छोड़ा। वर्ष 2016 में 47, वर्ष 2017 में 31, वर्ष 2018 में 93, वर्ष 2019 में 106, वर्ष 2020 में 93, वर्ष 2021 में 120, वर्ष 2022 में 141 तो वर्ष 2023 में 127 और इस साल के तीन माह में 47 नाबालिग घर से गायब हुईं। इनमें से करीब एक दर्जन बालिकाएं अब भी दस्तयाब नहीं हो सकी हैं, इनमें वर्ष 2016, 2017 व 2018 में लापता हुई बालिकाएं भी शामिल है।

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