सुकमा के दर्जनों गाँव को बाहरी दुनिया से जोड़ता है सीआरपीएफ का बनाया रस्सी का पुल

सुकमा के दर्जनों गाँव को बाहरी दुनिया से जोड़ता है सीआरपीएफ का बनाया रस्सी का पुल

Deepak Sahu | Publish: May, 01 2019 07:44:51 PM (IST) | Updated: May, 01 2019 07:54:06 PM (IST) Sukma, Sukma, Chhattisgarh, India

सुकमा जिले के धर्मापेंटा के गुब्बल नाले पर पुल नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में किस्टाराम इलाके के दो दर्जन से ज्यादा गावों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट जाता है।ग्रामीणों को इमरजेंसी में जान जोखिम में डालकर नदी पार करना पड़ता है।

सुकमा. छत्तीसगढ़ में आज भी ऐसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र हैं जहाँ प्रशासन की पहुंच लगभग ना के बराबर है। जिसके कारण इन इलाकों के ग्रामीणों को सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी स्थानीय प्रशासन और नक्सलियों के कारण ग्रामीणों को नहीं मिल पाए रहा है।

सुकमा जिले के धर्मापेंटा के गुब्बल नाले पर पुल नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में किस्टाराम इलाके के दो दर्जन से ज्यादा गावों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट जाता है।ग्रामीणों को इमरजेंसी में जान जोखिम में डालकर नदी पार करना पड़ता है। हालाँकि गुब्बल नाले पर पुल बनाने के लिए शासन के स्वीकृति दे दी है लेकिन निर्माण एजेंसी की लापरवाही के कारण अब तक काम शुरू नहीं हो सका है।

ग्रामीणों की समस्याओं को देखते हुए नक्सल मोर्चे पर तैनात सीआरपीएफ की 217वीं बटालियन के जवानों ने गुब्बल नाले पर बर्मा ब्रिज बनाया है। जो इन दिनों इलाके में 'रस्सी का पुल' नाम से मशहूर हो गया है।सीआरपीएफ के जवानो का कहना है की बारिश के दिनों में इस नाले पर बने रपटे के 20-25 फीट ऊपर तक पानी का बहाव रहता है जिसे पार करना संभव नहीं है। ऐसे में बारिश के तीन महीने किस्टाराम इलाके के दो दर्जन से ज्यादा गांव शासन-प्रशासन की पहुंच से दूर हो जाते हैं।

छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के सरहदी गांव धर्मापेंटा में नवंबर 2014 में नया कैम्प खुला था। कैंप खुलने के साढ़े चार साल बाद भी धर्मापेंटा से महज 100 मीटर दूर गुब्बल नाला पर पुल नहीं बन सका जिसके कारण बारिश के दिनों में ग्रामीणों के साथ जवानों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा था।

जहरीले जानवरो के अलावा मौसमी बीमारियों से पीड़ित लोगों तक स्वास्थ्य सेवायें पहुंचा पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।इसी समस्या को देखते हुए सीआरपीएफ के जवानों ने में बर्मा ब्रिज बनाया।

स्थायी पुल की जगह प्रशासन ने बना दिया रपटा

नक्सलियों के कब्जे वाले इलाके में कैम्प बनाने के लिए मटेरियल और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए प्रशासन ने धर्मापेंटा के गुब्बल नाले पर 30 लाख रुपये खर्च कर रपटा बनाया है जिसके सहारे किस्टाराम, धर्मापेंटा, पलोड़ी समेत दो दर्जन गांव के लोग आना-जाना करते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि नाले पर बड़ा पुल का निर्माण होना चाहिए था ताकी समस्या से स्थायी निजात मिल जाता।प्रशासन ने रपटा बना तो दिया है लेकिन बारिश में इसका कोई कोई फायदा नहीं है।

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