SEED BANK सूरत समेत दक्षिण गुजरात में अपने भरोसे है खेती-किसानी

सूरत तक नहीं पहुंचा किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का ऐलान, अधिकारियों को बीज बैंक लाइसेंस की जानकारी भी नहीं

By: विनीत शर्मा

Published: 02 Aug 2020, 05:02 PM IST

विनीत शर्मा

सूरत. किसानों को कम से कम बीज के मामले में आत्मनिर्भर बनाने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऐलान अभी सूरत तक नहीं पहुंचा है। यहां के अधिकारियों को नहीं पता कि बीज बैंक बनाने के लिए चुने गए देशभर के 650 जिलों में सूरत है भी या नहीं। खाद-पानी हो या फिर बीज की व्यवस्था, यहां किसान अपने भरोसे ही खेती-किसानी करता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों देशभर के किसानों को आत्मनिभग्र बनाने के लिए जिलों में बीज बैंक बनाने का ऐलान किया था। देश के 650 जिलों में यह बैंक खोले जाने हैं। योजना के तहत मैट्रिक पास किसानों को बीज बैंक का लाइसेंस दिया जाएगा। केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण विभाग का मानना है कि जिलास्तर पर बीज बैंक खुलने से किसान बीजों के मामले में आत्मनिर्भर हो सकेंगे। जानकारों के मुताबिक कागजों पर भले लुभावनी हो, लेकिन प्रधानमंत्री की यह योजना परवान चढ़े कैसे जब अधिकारियों तक जानकारी ही नहीं पहुंची है।

जिला कृषि अधिकारी खुद इस योजना को लेकर अनभिज्ञ हैं। सूरत जिले का कृषि विभाग बीज बैंक योजना और किसानों को बीज बैंक के लाइसेंस देने की प्रक्रिया को लेकर अनजान है। उसके मुताबिक शासन से इस आशय का कोई परिपत्र ही उनके पास नहीं आया है। उन्हें तो यह भी नहीं पता कि इस योजना से जोड़े गए 650 जिलों में सूरत शामिल भी है या नहीं।

दक्षिण गुजरात में यह है बीज की व्यवस्था

दक्षिण गुजरात में किसान तीन तरीकों से कृषि बीज हासिल करता है। लगभग तीस फीसदी बीज तो किसान अपनी फसल से खुद ही बना लेता है। बाकी बीजों के लिए उसे खुले बाजार और सरकार पर निर्भर रहना पड़ता है। राज्य बीज निगम के पास कई बार हाइब्रिड और उच्च क्वालिटी के बीज नहीं मिलते तो किसान को विभिन्न एजेंसियों से उन्नत बीज खरीदने पड़ते हैं। इनकी कीमत सरकारी बीज से तो अधिक होती है, लेकिन फसल की उत्पादकता पर काफी असर पड़ता है। इसलिए समृद्ध किसान तो निजी एजेंसियों को ही प्राथमिकता देते हैं। सूरत जिला समेत दक्षिण गुजरात में बीज बैंक का लाइसेंस किसानों को मिले तो उनकी बड़ी मुश्किल आसान हो सकती है।

सरकार कहे नहीं करे

बीज बैंक बनाना और लाइसेंस देना ही नहीं कई दूसरी योजनाएं भी कागजी ही ज्यादा हैं। सरकार थोड़ा भी करेगी तो खेती को बड़ा फायदा होगा। किसानों को ट्रेनिंग देकर अगर बीजों को चुनने और सहेजने की प्रकिया ही समझा दी जाए तो गुणात्मक बदलाव दिख सकते हैं।
किरन पटेल, कृषक, राजपीपला, नर्मदा जिला

सिर्फ वादे हैं

सरकार किसानों के लिए कुछ नहीं कर रही है। किसानों को पता ही नहीं है कि कृषि के लिए क्या योजनाएं हैं और उनका लाभ किस तरह लिया जाए। सरकार भी खोखले वादे ही कर रही है। किसानों का भला करना है तो जमीन पर काम दिखाना होगा।
दर्शन नायक, किसान नेता, सूरत जिला

मेरे पास कोई जानकारी नहीं

बीज बैंक को लेकर मेरे पास कोई जानकारी नहीं है। शासन से भी कोई परिपत्र नहीं मिला है, जिसमें सूरत जिले को बीज बैंक योजना से जोड़ा गया हो।
नितिन गामित, जिला कृषि अधिकारी, सूरत

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